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“डीजल नहीं” का बोर्ड, लेकिन पहचान वालों को सप्लाई? झलमला पेट्रोल पंप पर मनमानी के आरोप

ग्रामीणों ने भेजे वीडियो-फोटो, बोले— आम लोगों को मना, परिचितों को दिया जा रहा डीजल

बालोद। झलमला स्थित पेट्रोल पंप एक बार फिर विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों और वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि पेट्रोल पंप में “डीजल नहीं है” का बोर्ड लगाकर आम लोगों को वापस भेजा जा रहा है, जबकि पहचान और संपर्क वाले लोगों को चोरी-छिपे डीजल दिया जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने इस संबंध में वीडियो और फोटो भी साझा किए हैं, जिनमें पंप की मशीन चालू दिखाई दे रही है, लेकिन सामने “डीजल नहीं है” का बोर्ड टंगा हुआ नजर आ रहा है।

“सिर्फ सरकारी गाड़ियों को डीजल” कहकर लौटाए जा रहे लोग

ग्रामीणों का आरोप है कि डीजल लेने पहुंचे कई वाहन चालकों को यह कहकर मना कर दिया गया कि फिलहाल केवल सरकारी गाड़ियों में ही डीजल दिया जाएगा।

हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी दौरान कुछ परिचित लोगों, आसपास के दुकानदारों और यहां तक कि गन्ना रस बेचने वालों को भी डीजल दिया गया।

इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ गई है और लोग इसे खुलेआम पक्षपात और मनमानी बता रहे हैं।

कलेक्टर ने किया स्पष्ट— ऐसा कोई आदेश नहीं

मामले को लेकर जब जिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा से जानकारी ली गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है कि झलमला पेट्रोल पंप में केवल सरकारी वाहनों को ही डीजल दिया जाए। तो अब सवाल उठने लगे हैं कि यदि प्रशासन का कोई आदेश नहीं है, तो आखिर किस आधार पर आम लोगों को डीजल देने से रोका जा रहा है।

पंप संचालक पर मनमानी के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पेट्रोल पंप संचालक द्वारा अपनी मर्जी से डीजल वितरण किया जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और यदि अनियमितता मिली तो कार्रवाई की जाए।

वाहन चालकों में बढ़ा आक्रोश

डीजल नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले वाहन चालक और किसान सबसे ज्यादा परेशान नजर आए। लोगों का कहना है कि खेती-किसानी और दैनिक कार्यों के लिए डीजल जरूरी है, लेकिन मनमानी के कारण उन्हें घंटों परेशान होना पड़ रहा है।

नहीं मिलेगा डीजल, बोलकर लौटाया गया मुझे

एक साउंड सर्विस संचालक लेखराज देशमुख ने बताया कि मैं झलमला के पेट्रोल पंप में डीजल लेने गया था पर मुझे नहीं दिया गया। उल्टा कहा गया कि हम सिर्फ सरकारी गाड़ी के लिए डीजल दे रहे हैं। मैंने देखा कि वहां मशीन चालू है और “डीजल नहीं है” का बोर्ड भी लटका हुआ है। थोड़ी देर बाद पंप वाले के एक पहचान वाले की कार आई, जिसमें उनके कर्मचारियों ने डीजल डाला। इस तरह खुलेआम भेदभाव किया जा रहा है।

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