बालोद को मिली बड़ी सौगात: अब गंदे पानी से नहीं फैलेगी गंदगी, 6.91 करोड़ से बनेगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट



स्वच्छता रैंकिंग में लंबी छलांग की तैयारी, शहर का दूषित पानी होगा ट्रीटमेंट के बाद उपयोगी

बालोद, 21 मई। बालोद नगर पालिका क्षेत्र को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर की वर्षों पुरानी सीवेज और गंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए अब बहुप्रतीक्षित 2.00 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। लगभग 691.55 लाख रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से टेंडर जारी कर दिया गया है।

इस खबर के सामने आते ही शहरवासियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों में उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि यह परियोजना आने वाले समय में बालोद की तस्वीर बदलने वाली साबित होगी।

नालों का गंदा पानी अब नहीं बनेगा बीमारी की वजह

वर्तमान में शहर के वार्डों और प्रमुख नालों से निकलने वाला दूषित पानी बिना किसी उपचार के सीधे जल स्रोतों और निचले इलाकों में पहुंच रहा है। इससे जल प्रदूषण, बदबू, मच्छरों का प्रकोप और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा था।

अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने के बाद इस गंदे पानी को आधुनिक मैकेनिकल और बायोलॉजिकल तकनीक से शुद्ध किया जाएगा। उपचारित पानी का उपयोग पार्कों की सिंचाई, सड़क सफाई, फायर ब्रिगेड और निर्माण कार्यों में किया जाएगा, जिससे स्वच्छता के साथ-साथ पेयजल की भी बचत होगी।

स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत होगा निर्माण

यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन (SBM 2.0) के मानकों के तहत विकसित की जा रही है। इसके जरिए बालोद नगर पालिका की स्वच्छता रैंकिंग में भी बड़ा सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पार्षद दीपक लोढ़ा ने जताया आभार

नगर पालिका पार्षद एवं जलकार्य विभाग के पूर्व सभापति दीपक लोढ़ा ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव का आभार व्यक्त किया है।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिर्फ सीवेज समाधान नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है।

जनता की मांग— गुणवत्ता और समय-सीमा पर रहे निगरानी

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा पर सख्ती से निगरानी रखी जाए, ताकि परियोजना जल्द धरातल पर उतर सके और शहरवासियों को इसका लाभ मिलना शुरू हो।

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