बालोद के छिंदगांव में 7 वर्षीय बच्चे की दर्दनाक मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी
बालोद। जिले के ग्राम छिंदगांव से एक बेहद दुखद और चेतावनी देने वाली घटना सामने आई है, जहां सांप के डंसने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से एक 7 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। मृतक बालक की पहचान गीतेश्वर कुमार के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे गीतेश्वर अपने घर की बाड़ी में पानी से भरे ड्रम के पास ब्रश कर रहा था। इसी दौरान अचानक सांप ने उसे डस लिया। बच्चे ने इसकी जानकारी तत्काल घरवालों को दी, लेकिन परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लग गए।
चार घंटे की देरी पड़ गई भारी
ग्रामीणों के अनुसार लगभग चार घंटे तक झाड़-फूंक और घरेलू उपचार में समय बीतता रहा। जब बच्चे की हालत लगातार बिगड़ने लगी तब परिजन उसे निजी वाहन से अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पास ही डौंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है, जहां समय पर इलाज मिलने पर बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
बरसात में बढ़ जाते हैं सर्पदंश के मामले
स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना के बाद लोगों से अपील करते हुए कहा है कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। बारिश का पानी सांपों के बिलों में भर जाने के कारण वे बाहर निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं।
“झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें” — स्वास्थ्य विभाग
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेएल उड़के ने लोगों से जागरूक रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांप के दांतों के नीचे विष की थैली होती है और डसने के बाद जहर तेजी से खून में फैलता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सर्पदंश होने पर मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जरूरत
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता और अंधविश्वास के खिलाफ अभियान की जरूरत को सामने लाती है। समय पर इलाज और सही जानकारी कई जिंदगियां बचा सकती है।
