बालोद। छत्तीसगढ़ के हालिया बजट को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी बालोद के अध्यक्ष चन्द्रेश हिरवानी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह “संकल्प” का नहीं बल्कि “संकट” का बजट है, जिसमें जमीनी समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास किया गया है।
चन्द्रेश हिरवानी ने आरोप लगाया कि सरकार सीधे आर्थिक सहायता देने का लालच दिखाकर सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की बदहाली से जनता का ध्यान हटाना चाहती है। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होगी, तब तक ₹1.50 लाख जैसी राशि से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता, अधोसंरचना की कमी और शिक्षकों के रिक्त पदों पर सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की।
उन्होंने कहा कि ‘कृषक उन्नति योजना’ के लिए घोषित राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। बढ़ती खाद-बीज की कीमतें, सिंचाई सुविधाओं का अभाव और खेती की लागत में निरंतर वृद्धि जैसे गंभीर मुद्दों पर बजट में कोई ठोस समाधान नहीं दिखता। उनके अनुसार कृषि क्षेत्र को वास्तविक राहत देने के बजाय केवल घोषणाओं और आंकड़ों का सहारा लिया गया है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की कई योजनाओं का नाम बदलकर और थोड़ा फेरबदल कर उन्हें नई पैकेजिंग में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट में नई सोच या दूरदर्शिता का अभाव है और यह केवल पुराने वादों की पुनरावृत्ति है।
चन्द्रेश हिरवानी ने सरकार से मांग की कि शिक्षा, कृषि और युवाओं के रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों पर गंभीरता से कार्य किया जाए तथा पारदर्शी और प्रभावी नीतियों के माध्यम से प्रदेश के वास्तविक एवं समावेशी विकास को सुनिश्चित किया जाए।
