अंडा संजय साहू। श्री विष्णु महायज्ञ ओटेबंद में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर पूज्य संत राजीव नयन जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया। कथा स्थल पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
अपने प्रवचन में महाराज श्री ने कहा कि “अंत से अनंत की यात्रा को ही आध्यात्म कहते हैं” और यही यात्रा मनुष्य को जीवन के वास्तविक सत्य तथा परमात्मा की ओर ले जाती है। उन्होंने बताया कि कलियुग में यदि मनुष्य को शांति और संतुलन चाहिए तो उसे श्रीमद् भागवत की वाणी को अपने जीवन में उतारना होगा। भागवत के सिद्धांतों को अपनाकर व्यक्ति सुख, शांति और संतोष प्राप्त कर सकता है।
संत श्री ने कहा कि मनुष्य को अपने उद्देश्य पर संतुलन बनाए रखना चाहिए, क्योंकि संतुलित मन से ही हर कार्य संभव होता है। भारतीय संस्कृति की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा, “कंकर को भी शंकर मानकर पूजा करना ही सच्चा मानव धर्म है।”
इसी क्रम में उन्होंने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव की जिह्वा से दो गंगाओं का प्राकट्य हुआ—एक भागीरथी और दूसरी भागवत गंगा। भागीरथी के पास जाना पड़ता है, लेकिन भागवत गंगा स्वयं आपके द्वार पर आकर आपका उद्धार करती है। उन्होंने श्रीमद् भागवत को “रसमालयम” अर्थात रस का घर बताते हुए कहा कि यह जीवन के हर क्षेत्र में ज्ञान और भक्ति का अद्भुत स्रोत है।
संत श्री के प्रेरक वचनों से उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और आस्था की भावना और प्रगाढ़ हो गई। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन का क्रम भी निरंतर चलता रहा, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
