बालोद में धार्मिक पारदर्शिता पर पहली आरटीआई: प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक सौहार्द की दिशा में ऐतिहासिक पहल



बालोद।धार्मिक सौहार्द और प्रशासनिक पारदर्शिता को सुदृढ़ करने की दिशा में बालोद जिले से एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। विश्व हिंदू परिषद के जिला सहमंत्री एवं पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक उमेश कुमार सेन द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत एक विस्तृत और महत्त्वपूर्ण आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जिसने जिले भर में चर्चा और जनजागरूकता को नई दिशा दी है।

यह आवेदन किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थानों और समुदायों से जुड़ी प्रशासनिक जानकारी को पारदर्शी रूप में जनता के सामने लाने के उद्देश्य से किया गया है। आवेदन के माध्यम से बालोद जिले में ईसाई समुदाय के अंतर्गत संचालित सभी गिरजाघरों, उपासना केंद्रों, प्रार्थना स्थलों और कब्रिस्तानों का संपूर्ण विवरण मांगा गया है। इसमें प्रत्येक स्थल का स्थापना वर्ष, भूमि स्वामित्व का प्रकार, वर्तमान संचालन की स्थिति तथा किसी भी प्रकार के विवाद या अतिक्रमण से जुड़ी जानकारी शामिल है।

इसके अतिरिक्त जिले की ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों एवं नगरीय निकायों द्वारा इन धार्मिक स्थलों पर की गई जांच, कार्यवाही अथवा निराकरण से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि बालोद जिले में ईसाई समुदाय की कुल जनसंख्या — पुरुष, महिला एवं बच्चों की श्रेणीवार संख्या — स्थानीय अभिलेखों के अनुसार सार्वजनिक की जाए। यदि किसी धार्मिक स्थल या कब्रिस्तान से संबंधित भूमि विवाद, अतिक्रमण या शिकायत लंबित है, तो उसकी जांच, निपटान और वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए।

आवेदनकर्ता के अनुसार यह पहल पूर्णतः जनहित में है, ताकि धार्मिक नाम पर संभावित अनियमितताओं, अवैध निर्माण या भूमि विवादों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके। यह कदम धार्मिक व्यवस्थाओं को वैधानिक दायरे में लाने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से जिले में लंबे समय से बनी विवादित स्थितियों को सुलझाने में सहायता मिलेगी, जो प्रार्थना सभाओं या धर्मांतरण से जुड़े तनाव के रूप में समय-समय पर सामने आते रहे हैं। खासकर धर्मांतरित व्यक्तियों के अंतिम संस्कार या दफनाने को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों पर भी स्पष्ट अभिलेख तैयार होने से स्थायी समाधान संभव हो सकेगा। धार्मिक स्थलों की स्थिति और स्वामित्व स्पष्ट होने पर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचाव किया जा सकेगा।

यह आवेदन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) एवं धारा 4(1)(ख) के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक लोक प्राधिकरण का कर्तव्य है कि वह अपने अधीन आने वाली सूचनाओं को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करे। यह पहल अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप प्रशासनिक पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस आवेदन से बालोद जिले में धार्मिक स्थलों और समुदायों का प्रमाणिक अभिलेख तैयार होगा, जिससे शासन और नागरिकों दोनों को स्पष्ट दिशा मिलेगी। इससे अवैध प्रार्थना सभाओं, अनधिकृत निर्माण और भूमि अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी तथा समाज में स्थायी शांति और सौहार्द का वातावरण बनेगा।

कानूनी और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस पहल को धार्मिक समरसता और धर्मनिरपेक्ष भावना की सकारात्मक अभिव्यक्ति माना जा रहा है। पारदर्शिता के माध्यम से ही समाज में विश्वास, न्याय और स्थायी सौहार्द स्थापित किया जा सकता है।

अंततः यह कहा जा सकता है कि उमेश कुमार सेन द्वारा उठाया गया यह कदम धर्म और कानून के संतुलन की दिशा में एक मिसाल बनकर सामने आया है। यह संदेश देता है कि —
“जब धर्म कानून की मर्यादा में रहेगा, तभी समाज में शांति, सौहार्द और न्याय स्थायी रूप से स्थापित हो सकेगा।”

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