बालोद – मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म तड़ीपार तो आपको याद होगी ,की कैसे उस फिल्म में कोर्ट के आदेश पर शहर से तड़ीपार कर दिया जाता है. ऐसा ही कुछ एक तड़ीपार का किस्सा बालोद जिले में सामने आया है. पर जिसे जिला प्रशासन ने जिला बदर किया है, उसके काम मिथुन की तरह हिरोगिरी जैसी नही है, बल्कि उसे लोग गुंडा बोलते हैं. खुद को भाई व डान बताने वाले चिखलाकसा के सतीश सोनी को उसकी बढती गुंडागर्दी के चलते प्रशासन ने उसे जिले से बाहर निकाल दिया है. एक साल तक वह घर, नगर क्या जिले में नजर नहीं आएगा. अगर नजर आया तो देखते ही उसे पुलिस जेल में डाल देगी. ऐसा कुछ आदेश कलेक्टर ने जारी किया है. सतीश क्रिमनल व्यक्ति है. जिसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, सरकारी अफसर से मारपीट, तलवार बाजी सहित कई केस दर्ज हैं.
जारी आदेश में कुछ ऐसा है आप भी पढ़िये
जिला दंडाधिकारी जनमेजय महोबे ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 5, 6 के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राजहरा थाना अंतर्गत नगर पंचायत चिखलाकसा के वार्ड क्रमांक-05 के सतीश सोनी पिता स्व.गणेश सोनी को आगामी 01 वर्ष के लिए जिला बालोद, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगॉव, कांकेर जिलों की राजस्व सीमाओं से हट जाने (जिला बदर) आदेश पारित किया है। जिला दंडाधिकारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पुलिस अधीक्षक बालोद के पत्र अनुसार आरोपी सतीश सोनी के आपराधिक कृत्यों में एक प्रकरण हत्या का, दो प्रकरण हत्या का प्रयास करना, शासकीय कार्यालय में घुसकर शासकीय कार्य में बाधा डालकर मारपीट करना, एक प्रकरण जुए का, एक प्रकरण घर में प्रवेशकर तलवार से मारपीट कर मोटर सायकिलों को आग लगाने का जैसे घटनाओं को आरोपी ने अंजाम दिया है। अब तक आरोपी के खिलाफ धारा 151 जाफौ, धारा 107, 116(3) जाफौ के तहत कुल 03 प्रतिबंधक कार्यवाही भी किया गया है। किन्तु आरोपी के अपराधिक गतिविधियों पर अब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। इसके खिलाफ क्षेत्र में आम लोगों में खौफ और दहशत का माहौल बना हुआ है, तथा लोग शिकायत करने और गवाही देने से कतराते हैं, इस पर सामान्य कानून और प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। यहां तक कि आरोपी शासकीय सेवक पर भी प्राणघातक हमला कर चुका है, जिससे इसकी आवारागर्दी, गुण्डागर्दी, रंगदार चरम पर है, आरोपी का गांव क्षेत्र व जिले में निवासरत रहना क्षेत्र व समाज के लिए अत्यंत ही घातक है। अत: सतीश सोनी पिता स्व. गणेश सोनी उम्र 31 साल निवासी वार्ड क्रमांक 05, चिखलाकसा नगर पंचायत के पास थाना राजहरा, जिला-बालोद के विरूद्ध छ.ग. राज्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 5, 6 के अंतर्गत कार्यवाही कर आसपास के जिला में इसके प्रवेश का प्रतिबंधित किए जाने के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है।
जिला दंडाधिकारी ने जारी आदेश में कहा है कि प्रकरण के अध्ययन और मनन करने के बाद यह समाधान हो गया है कि अनावेदक की गतिविधियॉ अन्य कानूनी प्रावधानों से नहीं सुधर रही है। ऐसी स्थिति में अनावेदक की अपराधिक गतिविधियों से शंाति व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पडऩे की संभावनाएं बनी हुई है। उपरोक्त स्थितियों में छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 5, 6 के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राजहरा थाना अंतर्गत नगर पंचायत चिखलाकसा के वार्ड क्रमांक-05 के सतीश सोनी पिता स्व. गणेश सोनी को आगामी 01 वर्ष के लिए जिला बालोद, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगॉव, कांकेर जिलों की राजस्व सीमाओं से हट जाने (जिला बदर) आदेश पारित किया है। अनावेदक आदेश के जारी दिनांक से एक सप्ताह के भीतर उपरोक्त जिलों की राजस्व सीमाओं से बाहर चले जावें और एक वर्ष की कालावधि अर्थात् 18 फरवरी 2022 के पहले प्रवेश न करे। अनावेदक द्वारा उक्त आदेश का पालन न करने पर उसे बलपूर्वक उपरोक्त जिलों की सीमाओं से बाहर निकाल दिया जाए। यदि इसके बाद भी वह इस आदेश का उल्लंघन करे तो उसके विरूद्ध छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 के सुसंगत प्रावधानों के तहत् कार्यवाही की जाएगी।
जिला बदर क्या होता है यह क्यों होता है और उसके नियम क्या है
जिला बदर से तात्पर्य है किसी व्यक्ति को एक जिले से दूसरे जिले भगा देना या मतलब अपने जिस जिले में वह है उस जिले से उसको प्रतिबंधित कर देना। इसको हमें दी प्रशासनिक शब्द के रूप में तो जिला बदर से मतलब वह प्रशासनिक कार्यवाही है जिसमें आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त व्यक्तियों को कुछ निर्धारित समय के लिए जिले से बाहर कर दिया जाता है। यह कार्यवाही जिला के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई अनुशंसा पर कलेक्टर के द्वारा की जाती है। आमतौर पर चुनाव के समय ऐसा किया जाता है। मतलब कोई भी व्यक्ति जो आदतन अपराधी है जो हमेशा अपराध करता ही है तो ऐसे व्यक्ति को किसी विशेष टाइम के लिए जैसे 2 महीने 1 महीने या 4 महीने या एक साल तक के लिए उस जिले से बाहर आदेश कर दिया जाता है कि आप कहीं भी रहे लेकिन इस जिले में ना रहें। अन्यथा आप पर कार्रवाई की जाएगी। आप को जेल भेज दिया जाएगा। तो ऐसे लोगों के लिए जिला बदर कहा जाता है। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में इसे गुंडा नियंत्रण अधिनियम व तड़ीपार जैसे शब्दों के नाम से भी जाना जाता है। हर राज्य में इसके लिए अपनी अलग-अलग व्यवस्था व शब्द भी तय किए गए हैं।
