जगन्नाथपुर में हुआ कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन, देश की राजधानी दिल्ली से पहुंची थी टीम, बनी विजेता
बालोद / जगन्नाथपुर। जगन्नाथपुर में इस वर्ष आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता एक ऐतिहासिक रहा। वह इसलिए क्योंकि पहली बार यहां छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य, देश की राजधानी दिल्ली से कबड्डी के खिलाड़ियों की टीम पहुंची थी। दिल्ली की टीम लगातार धाकड़ प्रदर्शन करते हुए अन्य टीम को हराते हुए फाइनल में पहुंची और फतह हासिल की।

दिल्ली की टीम विजेता रही तो दूसरे स्थान पर मतवारी की टीम ने बाजी मारी। तीसरे स्थान पर बालोद के अखाड़ा कबड्डी टीम विजेता रही। तो चौथे स्थान पर कोहंगाटोला की कबड्डी टीम रही। सेमीफाइनल बालोद व दिल्ली की टीम के बीच खेला गया। जो मैच काफी रोमांचक रहा। एक एक प्वाइंट के लिए संघर्ष करते रहे। वहीं विवाद की स्थिति भी बनती रही। दोनों टीम के बीच कांटे की टक्कर भी रही। दर्शक भी रोमांचित होते। अंततः सेमी फाइनल जीतकर फाइनल में मतवारी के साथ खेलते हुए दिल्ली की उक्त टीम प्रथम स्थान पर रही और दूसरे स्थान पर मतवारी की टीम रही। जिन्हें अतिथियों ने ट्रॉफी व इनाम की राशि देकर सम्मानित किया।
एक पंपलेट को देखकर ही युवराज कप जीतने के नाम से यहां तक आए थे खिलाड़ी

दिल्ली के खिलाड़ियों ने बताया कि व्हाट्सएप के जरिए जगन्नाथपुर के इस गांव का पंपलेट उनके तक पहुंचा था। उनमें कबड्डी खेलने का जुनून है इसलिए भी कोई जगह नहीं देखते, जहां भी प्रतियोगिता होती है वह पहुंच जाते हैं। छत्तीसगढ़ में वे पहली बार इस इलाके में पंपलेट के जरिए आये। उन्होंने गूगल मैप से लोकेशन ट्रेस किया और फिर ढूंढते ढूंढते ट्रेन से रायपुर तक पहुंच गए फिर रायपुर से यहां बस में आ गए।

खेलने और कबड्डी के जुनून ने इन खिलाड़ियों को जीत दिला दी और कई टीम को हराकर फाइनल में भी दिल्ली की टीम विजेता बन गई। खिलाड़ियों का कहना था कि पंपलेट में युवराज कप का जिक्र था। बता दें कि इस गांव में दिवंगत कबड्डी के खिलाड़ियों की स्मृति में वर्षों से कबड्डी का आयोजन हो रहा है। पहली बार यहां की चर्चा दिल्ली तक पहुंची और यही वजह थी कि वहां के खिलाड़ी यहां जिले के बालोद के एक छोटे से गांव में आ पहुंचे। दिल्ली के टीम की चर्चा गांव में जमकर होती रही और उत्सुकता वश उसी का प्रदर्शन देखने के लिए भीड़ भी जुटी रही।
दबा बल्लू डायलॉग पर था प्रतिबंध, बेटियों ने भी उठाया कबड्डी का लुफ्त

ज्ञात हो कि इस गांव में दबा बल्लू डायलॉग के नाम से किसी के साथ कोई छेड़खानी या छीटाकसी ना हो इसलिए पहले से ही मुनादी करवाकर ₹5000 दंड का फरमान ग्राम समिति की ओर से जारी किया गया था। कबड्डी प्रतियोगिता के दौरान भी इसको लेकर पहले से एलाउंस कर दिया गया था। इसका असर यह हुआ कि देर रात तक भी गांव की बेटियां व सुबह दूसरे दिन दोपहर 12 बजे तक भी बेटियां कबड्डी का लुफ्त लेती रही। बिना किसी परेशानी के, बिना किसी झिझक के बेटियों ने भी कबड्डी का आनंद लिया।
बेस्ट कैचर मतवारी के खिलाड़ी पालेश को मिला तो बेस्ट रेडर भी मतवारी के विवेक यादव को मिला। पालेश यादव व विवेक यादव दोनों सगे भाई भी हैं। तो वही बेस्ट ऑलराउंडर का खिताब दिल्ली से आए एमडी उर्फ इस्माइल चौधरी नाम के खिलाड़ी को मिला। तो वही बेस्ट अनुशासित टीम मतवारी रही।
सेमीफाइनल में बालोद से हुआ कड़ा मुकाबला, आत्मसमर्पण कर चली गई टीम
सेमीफाइनल मैच सबसे ज्यादा रोमांचित करने वाले थे। क्योंकि फाइनल तक पहुंचने के लिए काफी जी तोड़ मेहनत हो रही थी। एक एक प्वाइंट के लिए कई बार विवाद की स्थिति भी बन रही थी। कुछ खिलाड़ी निर्णायक पर भी दबाव बनाते दिखे। ऐसे में समिति को बीच में निर्णायक भी बदलना पड़ा। तो वही लास्ट 1 मिनट के पहले बालोद की टीम ने आत्मसमर्पण कर दिया। फिर जीत दिल्ली की टीम की हो गई। विजेता खिलाड़ियों को गांव के प्रमुख कोमल देशमुख, सरपंच अरुण साहू, उपसरपंच नोखे लाल पटेल सहित अन्य अतिथियों ने सम्मानित किया।
