छत्तीसगढ़ में कट रही गौ वंश, शासन प्रशासन अब तक बेखबर, बाजारों की आड़ में भी हो रही तस्करी : गोरेलाल सोनी



बालोद/डौंडी । नगरपंचायत डौंडी गोठान से 350 गौ वंश तस्करी का मामला सामने आने के बाद जिले में उसी सप्ताह दैहान जंगल पर सैकड़ों गौ को रात्रि तस्करी करते पुलिस व ग्रामीणों ने पकड़ा था,तस्कर मौके से खाना सामाग्री व बाईक छोड़कर नौ दो ग्यारह हो गए थे जो जिले में गौ तस्करी की पोल खोलकर रख दिया है। जिले में लगातार हो रही गौ तस्करी मामले ने गौ रक्षकों को भी खुली चुनौती दें दिया है। अब इस गौ तस्करी मामले से जुड़े हुए हर पहलुओं पर जानकारी लिया जाना अहम हो गया है। जिसका जिम्मा छत्तीसगढ़ राज्य के डौंडी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता गोरेलाल सोनी ने गौ वंश को कत्लखाने तक ले जाने का पुरजोर मुद्दा उठाया है। गौ तस्करी मामले में इसके मूल जड़ तक पहुंचने की दिशा में उन्होंने अपना कार्य गंभीरता के साथ शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता गोरेलाल सोनी ने डौंडी निकाय के सरकारी गौठान से 14 जुलाई सुबह से 350 गौ वंश तस्करी किए जाने की नामजद रिपोर्ट डौंडी थाना में दर्ज कराया गया है। रिपोर्ट पर पुलिस जांच प्रारंभ शुरू की गई और मामले में कोचिया परदेशी राम बांदे सतनामी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस जांच अभी भी जारी है। सोनी के नामजद रिपोर्ट पर पुलिस गंभीरता से जांच करते हुए बस्तर क्षेत्र के नक्सलियों के मांद जंगल तक पहुंची। इसमें बस्तर पुलिस से सहारा लेकर गौ तस्करी के गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई। जिसमें पुलिस प्रशासन को बड़ी सफलता भी मिली है।प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र अंतर्गत नारायणपुर जिला के थाना थोड़ाई में 20 जुलाई को 34 नग गौ तस्करी करते चार आरोपियों दशाराम मुरामी,दियारूराम मुरारी,शंकर लेकाम,रामधार बेके को रंगे हाथ पकड़ा गया है। जिन्होंने पुलिस के समक्ष यह कबूल लिया है कि वे बालोद जिला के ग्राम पंचायत करहीभदर बाजार से खरीदकर लाते है और इसे गीदम बाजार के माध्यम से गौ वध करने के लिए तेलंगाना राज्य को भेज देते है। पुलिस पूछताछ में आरोपितों ने यह भी बताया है कि गौ वंश खरीदी बिक्री परिवहन व व्यापार करने का कोई वैध दस्तावेज उनके पास नहीं है। पुलिस द्वारा चारों आरोपियों के विरुद्ध 11(1) ( घ ) पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 एवं 4,6,10 कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि सामाजिक कार्यकर्ता गोरेलाल सोनी द्वारा राजहरा सीएसपी चित्रा वर्मा को कोचियों द्वारा गौ तस्करी कर इसे कत्लखाना ले जाने की दिए गए संपूर्ण जानकारी सच साबित हो रहा है। सोनी ने नामजद रिपोर्ट में सीएसपी से मांग किया है कि डौंडी गोठान से 350 गौ वंश को कोचिया के हाथों विक्रय कराने से लेकर क्रय कर गौ वध करने वाले मुख्य आरोपी को पकड़कर सख्त कार्यवाही की मांग किया गया है। आपको बता दें कि सोनी ने अपने आपको दाव में रखकर सीएसपी चित्रा वर्मा से कहा है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी झूठा साबित होता है तो उन पर नियमानुसार कार्यवाही की जाय। जिस पर पुलिस जांच अभी जारी बताया गया है।

बालोद जिला में तस्करी का बड़ा रैकेट लंबे समय से है सक्रिय

गोरेलाल सोनी के अनुसार उन्होंने प्रारंभिक पतासाजी में सूत्रों से यह जाना कि बालोद जिले में गौ तस्करी का बड़ा रैकेट लंबे समय से सक्रिय है। जो हिंदू धर्म के आस्था के साथ खिलवाड़ करते हुए कृषि जीव का वध कराने में अहम भूमिका निभा रहे है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी से सभी को हैरानी होगी कि गौ वध छत्तीसगढ़ राज्य से शुरू होकर गौ वध तेलंगाना,कर्नाटक, तमिलनाडु,महाराष्ट्र नागपुर,यवतमाल जैसे प्रमुख स्थानों के कत्लखाना तक कोचियों के माध्यम से पहुंचाया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य में गौ वंश वध कर मांस बिक्री बालोद जिला के आदिवासी ब्लाक डौंडी के अंतिम सीमा आगे साल्हे ग्राम से महज तीन चार किमी दूर एक ग्राम में लंबे समय से खास त्यौहार पर होते आ रही है, जिससे शासन प्रशासन भी बेखबर है। वहीं डौंडी ब्लाक में बस्तर के मुरिया कोचिया आकर कृषि जीव खरीद इसे अपने बस्तर क्षेत्र के उन स्थल ग्रामों में ले जाकर वध कर मांस विक्रय करते है जो बीहड़ जंगल व नक्सली गढ़ कहा जाता है। जहां पुलिस और पत्रकार भी नहीं पहुंच पाते। प्राप्त जानकारी के अनुसार मवेशी खरीदी बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में बैल बाजार खुले हुए है। बालोद जिला में सबसे मुख्य बड़ा बाजार करहीभदर को बताया जा रहा है। जहां विभिन्न ब्लाक, जिला क्षेत्रों के आए हुए काेचिए बैल,भैंस,गाय व बछड़ों को खरीददारी कर यह मवेशी दूसरे स्थान के दलाल को मोलभाव कर बेचते है। यह प्रक्रिया आगे और दलाल तक चलता है,जिसमें कत्लखाना ले जाने की मुख्य भूमिका बालोद जिला में बस्तर क्षेत्र से आए हुए मुरिया जनजाति के कुछ लोग इसमें सहभागिता सदियों से निभाते आ रहे है। यदि छत्तीसगढ़ में गौ हत्या के राज से पर्दा उठाकर इस खेल को पूर्णतः लगाम लगाना है तो सबसे पहले डौंडी ब्लाक के बैल कोचियों की पूरी लिस्ट निकालकर उनसे गौ वंश को किन मुरिया के हवाले विक्रय करते है यह पता लगाने से छत्तीसगढ़ में गौ वध किस किस स्थल में किया जाता है यह मुरिया कोचिया पुलिस प्रशासन की कड़ी पूछताछ में पूरी राज उगल देंगे।

मवेशी तस्करी का ऐसा है रूट:

हाल ही में पकड़े गए तस्करों ने राज उगला है कि तस्कर बालोद के करहीभदर से झलमला होते हुए तराआंदुल पहुंचते हैं वहां से आमांबेड़ा, बड़ेडोंगर, बेनूर, होते हुए पल्ली बारसूर मार्ग से गीदम के नेलसनार पहुंचते हैं. मवेशियों की बिक्री बड़े बाजार में किया जाता है. यही से अन्य तस्कर इन मवेशियों को अन्य सीमावर्ती राज्यों में सप्लाई करते हैं.

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