बालोद। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर, 2015 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 140वीं जयंती के अवसर पर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल की घोषणा की थी। इस अभिनव पहल के माध्यम से, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, परंपराओं और प्रथाओं के ज्ञान से राज्यों के बीच बेहतर समझ और जुड़ाव पैदा करना प्रमुख लक्ष्य है , जिससे भारत की एकता और अखंडता मजबूत होगी।

इसी परिप्रेक्ष्य में स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय बालोद में एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम का आयोजन किया गया ,इस वर्ष की थीम गुजरात राज्य है , जिससे संबंधित विभिन्न गतिविधियों शाला में सम्पन्न हुई, सर्वप्रथम कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शाला विकास एवम् प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राकेश बाफना , कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शाला के प्राचार्य अरूण कुमार साहू, एवम् अन्य वरिष्ठ व्याख्यातागण ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की ।

कक्षा नवमी के बच्चों ने सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का आरंभ महात्मा गांधी के प्रिय भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” से हुआ । कक्षा नवमी के छात्र आदर्श और बालकृष्ण के द्वारा गुजराती भाषा में सामान्य अभिवादन एवं संवाद किस प्रकार होता है उसे अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया । छात्र लक्ष्य ने गुजराती व्यंजनों के बारे में जानकारी दी । गुजरात में स्थित पर्यटन स्थलों स्टेच्यू ऑफ यूनिटी, सोमनाथ मंदिर , द्वारिका नगरी , और कच्छ के रण के बारे में मयंक ,काव्यांश जयकुमार और बालकृष्ण ने बताया। गुजरात की कला और संस्कृति से बच्चों को तुषार ने अवगत कराया , गुजरात में जन्म लिए हमारे देश के महापुरुष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे में बच्चों को भीषम ने अवगत कराया। गुजरात राज्य से संबंधित चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया । अंत में सोमिक्षा ,तानिया , रोशनी ,पूजा, रितु, हिमांशी, पूनम, लक्ष्मी एवम् साथियों ने गरबा के महत्व को बताते हुए गरबा नृत्य प्रस्तुत किया । इस अवसर पर शाला विकास और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राकेश बाफना ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा की इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलता है।

शाला के प्राचार्य अरूण कुमार साहू ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और जीवन-पद्धतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करना ताकि पारस्परिकता को बढ़ावा मिले और भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से सम्पन्न देश में विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच एकता की समृद्ध मूल्य प्रणाली सुनिश्चित हो सके। उक्त दिवस शाला विकास और प्रबंधन समिति की बैठक का भी आयोजन किया गया । जिसमें शाला गतिविधियों की जानकारी , आय व्यय की जानकारी व उसका अवलोकन, साथ ही शाला से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की गई । इस कार्यक्रम व बैठक में सदस्य लालचंद लूनीवाल, व्याख्यातागण एसएन दुबे, आईएल उइके, एमएस डडसेना, नेमसिंह साहू, भागवत साहू, रूखमणी ठाकुर, हर्षा ठक्कर, वंदना शर्मा, नीलम पांडे, पुष्पांजलि पांडे, अर्चना साहू, शैलेंद्री साहू, की उपस्थिति रही । इस कार्यक्रम के सफल आयोजन पर स्टॉफ के सभी सदस्यों ने की बधाई प्रेषित की है ।
