
जन्मदिन पर पौधे और उपयोगी उपहार देकर पर्यावरण संरक्षण का अनोखा अभियान चला रहे हैं बालोद के पर्यावरण प्रेमी
बालोद, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यदि किसी एक नाम को पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण और निस्वार्थ सेवा की मिसाल कहा जाए, तो वह नाम है रूपेश कुमार सोनकर। शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने बीते 20 वर्षों में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ऐसा कार्य किया है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। अपने अथक प्रयासों से वे अब तक लगभग 10 हजार पौधों का रोपण और वितरण कर चुके हैं।
बालोद के जवाहर पारा निवासी रूपेश कुमार सोनकर पिछले दो दशकों से बिना किसी सरकारी सहायता या किसी संस्था के सहयोग के स्वयं के खर्च पर पर्यावरण संरक्षण का अभियान चला रहे हैं। साइकिल से गांव-गांव, स्कूल, कार्यालय, खेत, बाड़ी और घरों तक पहुंचकर वे लोगों को पौधे भेंट करते हैं तथा उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं।
जन्मदिन को बनाया हरियाली का पर्व

रूपेश कुमार सोनकर का मानना है कि जन्मदिन केवल केक काटने का नहीं बल्कि प्रकृति को कुछ लौटाने का अवसर होना चाहिए। यही कारण है कि वे जिन लोगों का जन्मदिन होता है, उन्हें सुबह शुभकामना संदेश भेजते हैं और बाद में उनके घर, कार्यालय या विद्यालय पहुंचकर पौधा एवं उपयोगी उपहार भेंट करते हैं।
वे न केवल पौधा देते हैं बल्कि स्वयं पौधारोपण करवाकर उसके संरक्षण का संकल्प भी दिलाते हैं। शिक्षक दिवस, महिला दिवस, मित्रता दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस, रक्षाबंधन, विवाह समारोह और अन्य विशेष अवसरों पर भी वे पौधों का निशुल्क वितरण करते हैं।
20 वर्षों से निस्वार्थ सेवा
रूपेश बताते हैं कि उन्हें आज तक सरकार या किसी एनजीओ से आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई है। वे अपने निजी संसाधनों से पौधे तैयार करते हैं और उनका वितरण करते हैं। उनका कहना है कि लोगों की प्रशंसा और पौधों को बढ़ते हुए देखना ही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
कबाड़ से तैयार करते हैं गमले
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वे पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) का भी संदेश देते हैं। घरों में अनुपयोगी हो चुके टब, बाल्टी, घमेला और अन्य सामग्री को कबाड़ में बेचने के बजाय उसमें मिट्टी भरकर पौधे तैयार करते हैं। जब पौधे विकसित हो जाते हैं तो उन्हें उपहार स्वरूप लोगों को भेंट करते हैं।
बच्चों को भी बना रहे पर्यावरण मित्र
रूपेश नियमित रूप से स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों के जन्मदिन पर पौधे और उपयोगी उपहार भेंट करते हैं। प्राचार्य और शिक्षकों के हाथों बच्चों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाते हैं। उनका मानना है कि यदि बचपन से बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित किया जाए तो भविष्य सुरक्षित होगा।
नशा छोड़ो, पौधा लगाओ
रूपेश का संदेश है कि लोग जन्मदिन पर शराब और फिजूलखर्ची करने के बजाय कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं। उनका कहना है कि यदि देश का हर नागरिक अपने जन्मदिन पर एक पौधा लगाए तो देश में करोड़ों नए पौधे तैयार होंगे और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
साइकिल से देते हैं स्वास्थ्य और पर्यावरण का संदेश
रूपेश आज भी अपने अधिकांश कार्य साइकिल से करते हैं। उनका मानना है कि साइकिल चलाने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है, पेट्रोल की बचत होती है और प्रदूषण भी कम होता है। वे लोगों को अधिक से अधिक साइकिल उपयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो नाम
लगातार 20 वर्षों तक जन्मदिन, सामाजिक आयोजनों और विभिन्न अवसरों पर पौधे वितरित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए अनेक लोगों ने मांग की है कि पर्यावरण प्रेमी दिव्यांग रूपेश कुमार सोनकर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए।
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर रूपेश कुमार सोनकर की कहानी यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो शारीरिक सीमाएं भी समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं। उनके 20 वर्षों के समर्पण ने उन्हें बालोद जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का प्रतीक बना दिया है।
