सुशासन की अनूठी मिसाल: सरपंच ने पति के मकान से खुद हटवाया अतिक्रमण



शिकायत के बाद स्वेच्छा से बुलडोजर चलवाकर खाली कराई शासकीय भूमि, क्षेत्र में हो रही सराहना

बालोद, 4 जून 2026। जिले में सुशासन और पारदर्शिता की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। जिला मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर दूर ग्राम मेंड़की में ओरमा की सरपंच मंजूलता साहू ने अपने पति के मकान से लगे शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण को स्वयं हटवाकर जनप्रतिनिधियों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

जानकारी के अनुसार ओरमा निवासी रोहित कुमार साहू ने 14 मई को आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के दौरान शिकायत दर्ज कराई थी कि मेंड़की निवासी परस राम साहू द्वारा निजी भूमि से लगी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। शिकायत मिलने के बाद तहसीलदार आशुतोष शर्मा के निर्देश पर हल्का पटवारी तरन्नुम खान द्वारा शिकायतकर्ता, ग्राम पटेल एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में भूमि का सीमांकन कराया गया।

सीमांकन के दौरान लगभग 3 से 4 डिसमिल शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पाया गया। जांच के बाद जब यह जानकारी सरपंच मंजूलता साहू तक पहुंची कि उनके पति की भूमि से सटी शासकीय जमीन पर भी कब्जा है, तब उन्होंने बिना किसी सरकारी नोटिस या दबाव का इंतजार किए स्वयं पहल की।

26 मई से 4 जून के बीच सरपंच ने बुलडोजर लगवाकर अतिक्रमित हिस्से को हटवा दिया और शासकीय भूमि को खाली करा दिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में उनकी निष्पक्षता और जिम्मेदार रवैये की चर्चा हो रही है।

भूमि स्वामी परस राम साहू ने बताया कि शिकायत के बाद पटवारी द्वारा चिन्हित स्थल से अतिक्रमण हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हैं तो दोबारा सीमांकन कराया जा सकता है।

सरपंच मंजूलता साहू ने कहा कि शिकायतकर्ता रोहित साहू की शिकायत सही थी और नियमानुसार शासकीय भूमि को खाली करना आवश्यक था। उन्होंने बताया कि यह जमीन उनके ससुर स्वर्गीय फूल सिंह साहू ने करीब 35 वर्ष पहले खरीदी थी और परिवार लंबे समय से वहां काबिज था। इसके बावजूद सरपंच होने के नाते उन्होंने नियमों का पालन करते हुए स्वयं अतिक्रमण हटाने की पहल की।

उन्होंने प्रशासन से भी अपेक्षा जताई कि क्षेत्र में मौजूद अन्य सभी अतिक्रमणों पर भी समान रूप से कार्रवाई की जाए, ताकि कानून का पालन सभी के लिए एक समान हो सके।

गौरतलब है कि सामान्यतः वर्षों पुराने अतिक्रमण मामलों में तहसील न्यायालय से नोटिस जारी होने और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस मामले में सरपंच द्वारा स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाए जाने को लोग सुशासन और जवाबदेही की सकारात्मक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि स्वयं नियमों का पालन करें तो समाज में कानून के प्रति विश्वास और सम्मान और अधिक मजबूत होगा।

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