नकली खाद का जाल: किसानों को ठगने की साजिश बेनकाब, संयुक्त छापे में खुला बड़ा खेल



हरियाणा-यूपी से लाकर बेचे जा रहे थे संदिग्ध उर्वरक, कृषि विभाग, पुलिस और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना की संयुक्त कार्रवाई

आरंग/रायपुर। किसानों की मेहनत और फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कथित नकली उर्वरक कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कृषि विभाग आरंग, आरंग पुलिस एवं छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने संयुक्त छापामार कार्रवाई की। ग्राम कलई (आरंग) स्थित एक गोदाम में की गई जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना को मिली शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई। जांच में पता चला कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आए कुछ बाहरी व्यक्तियों ने स्थानीय व्यक्ति का मकान किराए पर लेकर गोदाम संचालित किया हुआ था। आरोप है कि ये लोग किसानों के घर-घर जाकर खाद के नाम पर ऑर्डर लेते थे और बाद में घर पहुंच सेवा के माध्यम से संदिग्ध उर्वरकों की आपूर्ति करते थे।

बिना लेबल और पंजीकरण के बेचे जा रहे थे उत्पाद

संयुक्त जांच दल को मौके पर “किसान खाद”, “पोटास बायो” और “माइको राजा” नाम से ऐसे रासायनिक उत्पाद मिले, जिन पर आवश्यक लेबल, पंजीकरण संख्या और वैधानिक जानकारी अंकित नहीं थी। प्रथम दृष्टया यह उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं कृषि संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला माना जा रहा है।

कार्रवाई की भनक लगते ही फरार हुए आरोपी

छापेमारी की सूचना मिलते ही संबंधित आरोपी मौके से फरार हो गए। कृषि विभाग ने गोदाम में उपलब्ध सामग्री, दस्तावेजों और अभिलेखों को जांच के दायरे में लिया है। वहीं आरंग पुलिस भी आरोपियों की तलाश में जुट गई है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

किसानों से सतर्क रहने की अपील

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने किसानों से अपील की है कि किसी भी उर्वरक, कीटनाशक या कृषि उत्पाद को खरीदने से पहले उसके लेबल, लाइसेंस, निर्माता और विक्रेता की वैधता की जांच अवश्य करें। संगठन ने कहा कि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल प्रशासन और संबंधित विभाग को देने से किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।

फसलों और किसानों की मेहनत पर मंडरा रहा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली उर्वरक और बिना गुणवत्ता प्रमाणन वाले कृषि उत्पाद न केवल फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं, बल्कि किसानों को भारी आर्थिक नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई कृषि व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

फिलहाल संयुक्त जांच जारी है और संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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