
40 वर्षों तक रामायण कथा के माध्यम से जनमानस को संस्कारित करने वाले मानस मर्मज्ञ को याद कर आयोजित हुआ भव्य धार्मिक कार्यक्रम
बालोद। क्षेत्र के सुप्रसिद्ध मानस मर्मज्ञ एवं रामकथा वाचक स्वर्गीय एम.आर. यादव की पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई गई। इस अवसर पर सत्यम शिवम सुंदरम मानस परिवार, हरि दर्शन मानस परिवार एवं तन्मय बालिका मानस मंडली भरदाकला द्वारा संगीतमय रामकथा एवं मानस पाठ की आकर्षक प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय एम.आर. यादव ने लगभग 40 वर्षों तक रामायण कथा के माध्यम से समाज में धार्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और संस्कारों का अलख जगाया। उनकी वाणी और कथा शैली ने हजारों लोगों के जीवन को प्रेरित किया। उनके योगदान को आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।
धार्मिक वातावरण में हुई मानस प्रस्तुति
पुण्यतिथि कार्यक्रम में विभिन्न मानस मंडलियों ने भगवान श्रीराम के चरित्र, आदर्शों और भक्ति भाव से ओतप्रोत प्रस्तुतियां देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालु भावविभोर होकर रामकथा का रसपान करते रहे।
इनका रहा विशेष सहयोग
कार्यक्रम के आयोजन में क्रांति भूषण साहू (अध्यक्ष, जिला सरपंच संघ), धर्मेंद्र यादव (सुपुत्र स्व. एम.आर. यादव), जनपद सदस्य श्रीमती टुकेश्वरी भोपेंद्र साहू, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजनांदगांव भूपत सिंह साहू, टामन लाल साहू, भोपेंद्र साहू, मिर्जा रहमान बेग एवं इंद्र कुमार धनकर का विशेष सहयोग रहा।
मानस परिवारों का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी सहभागी रामायण एवं मानस मंडलियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया तथा उनके योगदान की सराहना की गई।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्रीमती नामेश्वरी बांधव, रूपा लहरे, रोहिणी साहू (सदस्य ग्राम पंचायत भरदाकला), कृष्ण कुमार तिवारी, बालाराम साहू, भूपत सिंह कलीहारी, द्वारिका साहू, गोपाल साहू, नेपाल धनकर, पी.आर. विश्वकर्मा, मनहरण धनकर, विजय साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन खेमन साहू एवं झनत साहू ने किया।
संस्कारों की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
पुण्यतिथि समारोह में उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय एम.आर. यादव के आदर्शों एवं धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं, जिनकी स्मृतियां और कार्य सदैव जीवित रहते हैं।
