सड़क हादसे कम करने के लिए इस बार शहर के अलावा गांव में भी लगेगी जागरूकता चौपाल, एसपी ने बनाई है ये योजना, देखिये क्या-क्या होगा, क्या है जिले में स्थिति ?



बालोद। बालोद जिले में सड़क सुरक्षा माह शुरू हो चुका है। पूरे 1 महीने तक यह अभियान जिले भर में चलेगा। जिले में प्रमुख पांच थानों को इस बार फोकस किया जाएगा। जिसमें शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक करने की पहल की जाएगी। इसके तहत जागरूकता रथ गांवों में जाकर लोगों को ट्रैफिक रूल्स बताएगी। नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को जागरूक करेगी। सोमवार की शाम को यातायात दफ्तर बालोद परिसर में इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे संसदीय सचिव व गुंडरदेही के विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि सड़क सुरक्षा माह को सार्थक बनाने के लिए इसे गांव तक ले जाना चाहिए। स्कूल के पाठ्यक्रम में भी इसे शामिल किया जाना चाहिए। ताकि बच्चे बचपन से ही इसके बारे में जाने और सतर्क रहें। वहीं उन्होंने हादसों की प्रमुख वजह शराब सेवन को बताया। इसी तरह एसपी जितेंद्र सिंह मीणा ने भी कहा कि हमारी प्लानिंग इस बार सड़क हादसों में 10 से 20% तक कमी लाने की है। इसी को ध्यान में रखकर पूरे 1 माह अभियान चलाया जा रहा है और इसके लिए अलग अलग तरह से योजना बनी है। जिस पर हमारे सभी स्टाफ व थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में काम करेंगे।


संसदीय सचिव निषाद ने कहा कुछ जगह चेकिंग हो जहां दुर्घटना होती है। पिकनिक वाले पिकअप व ट्रैक्टर में ज्यादा जा रहे। गांव में जागरुक करने की जरूरत है। हम शहर तक ही न सिमटे। दुर्घटना को रोकने पहल हो। पंचायतों में यह फरमान जारी करें, स्कूलों में भी इसका पाठ्यक्रम हो। हम देखते हैं 13 से 14 साल के बच्चे भी स्कूटी चलाते हैं। इसके जिम्मेदार पालक हैं। ज्यादा दुर्घटना शराब सेवन से हो रही। सख्ती जरूरी है ऐसे लोगों पर। कई लोग पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर हमें फोन करते हैं। पर मैं कहता हूं दुर्घटना के भागीदार पर कार्रवाई होनी चाहिए। रूल्स के डेफिनेशन को अभियान की तरह चलाया जाए ताकि सब इसे बारीकी से जाने। सड़क सुरक्षा माह के माध्यम से गांव में शिविर लगे।
जिला जज के विनोद कुजूर ने कहा हमारा राज्य सड़क सुरक्षा व जीवन की रक्षा के लिए अपने कर्तव्यों को पहला स्थान देता है। 20 नवम्बर 2018 में केंद्रीय सड़क परिवहन व राज मार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक हर घण्टे भारत मे 53 दुर्घटना होती है। प्रति घण्टे 17 लोगों की मौत होती है। जो चिंता का विषय है। मोटर दावा अभिकरण के केस में सुनवाई के दौरान पीड़ितों की तकलीफ को करीब से जानने की कोशिश की। बच्चे अनाथ हो जाते हैं, परिवार तबाह हो जाता है। क्षतिपूर्ति देने के लिए वाहन मालिक व चालक दोनो को परेशानी होती है। इन सब से बचना है तो एक ही विकल्प है हम सड़क में सावधानी बरतें। जब हम इन चीजों में फंस जाते हैं तब हमें इस सड़क सुरक्षा का महत्व समझ में आता है। उन्होंने कहा दुर्घटना होती नही, कारित होती है। इसका कारण उपेक्षा व लापरवाही है। यह आकस्मिक नही है, यह हमारी अपनी उपज है।


पूर्व विधायक भैया राम सिन्हा ने कहा विषय तो बहुत अच्छा है, हमें जागरूक रहना चाहिए, लेकिन व्यवस्था बनाना सिर्फ पुलिस का काम नही है, व्यवस्था बनेगा तब जब हम जागरूक होंगे लेकिन देखने से ऐसा लगता नही है। सिग्नल पर लोगों को बहुत जल्दी रहती है, ऐसा आयोजन हर साल होता है, पिछले साल नाश्ता बांट रहे थे, लोग नाश्ता खाकर भाग जाते थे। इसके लिए कड़ाई की जरूरत है। हाल ऐसा है कि कोई पकड़े तो हमें फोन आ जाता है। स्कूल में पढ़ाया जाना चाहिए । ताकि बच्चे शुरू से जागरूक हो। मुझे लगता है शराब सेवन के कारण ज्यादा हादसा (70 फीसदी) होता है। ऐसे लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है।

क्या बोले कलेक्टर


कलेक्टर जनमेजय महोबे ने कहा सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा थीम पर काम जरूरी है। अगर अभी स्थिति नही संभली तो एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 में हर पांचवा या छटवा व्यक्ति की मौत एक्सीडेंट से होगा।
स्पीड को आपदा माने , ट्रैफिक रूल्स पता हो, सभी को स्कूल में भी सिलेबस में इसे शामिल किया जाना चाहिए। इसकी भी परीक्षा होनी चाहिए।, लायसेंस के लिए आवेदन करने वालों को रूल्स पता होनी चाहिए। उन्हें ड्रायविंग आनी चाहिए। लोगों को यातायात का ध्यान रखना है। माल वाहको में सफर न करें।
रेस्क्यू भी एक बड़ा उपाय है। हादसे हो तो खबर जरूर करें, 108 112 को फोन करना है।
जान बचाने ट्रेनिंग देने की जरूरत है। मिडिल स्कूल से बच्चों को ट्रैफिक रूल्स बताने की जरूरत है।

जिला पंचायत सीईओ ने क्या कहा
सीईओ लोकेश चन्द्राकर ने कहा हर साल ये आयोजन मनाते हैं पर बातों पर चिंतन करें। इसे गंभीरता से ले। प्लान बनाते रहते हैं। एनसीसी व पुलिस जागरूकता भी करती है, हादसे में कमी लाई जाए। इसके लिए प्रयास करें। दुर्घटना से देर भली, लिखे को पढ़ते हैं फिर भी स्पीड में चलते हैं।, जब हम कहीं जाने में देर हो तो सब नसीहत भूल जाते हैं। शराब पीकर लोग और स्पीड में चलते हैं।

यह है जिले में हादसों का ग्राफ
एसपी के मुताबिक 2019 में 167 मौत हादसों से हुई है। पिछले साल से इस बार 2020 में हादसों में कमी आई। लॉक डाउन के दौरान कमी आई व पहल हुई। डीएसपी दिनेश सिन्हा व टीआई ट्रैफिक आरएस सिन्हा लगातार काम करते रहे। 2020 में 124 मौत हुई। छग में साल भर 4500 मौत होती है। जिसमें युवा वर्ग 15 से 35 के होते हैं। स्कूल कॉलेज में जागरूक करने की जरूरत है।


सिलेबस में रोड सेफ्टी को स्थान देने की जरूरत है। एसपी थाने वार जानकारी दी कि हादसों के मामले में थाना टॉप 1 में है। गुरुर थाने में सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। क्योंकि वहां पुरूर से कोचवाही तक नेशनल हाइवे चारामा पड़ता है। पुरूर से बालोद रोड में भी ज्यादा हादसा होता है।
दूसरा स्थान बालोद थाने का है।
बालोद से कुसुमकसा में हादसे होते हैं। तीसरा स्थान डौंडी थाना है। जहां राजनांदगांव मार्ग है।
चौथा दल्ली वपांचवा लोहारा थाना आता है। सभी जगह हाइवे हैं। इन टॉप 5 पुलिस स्टेशन हैं दुर्घटना के मामले में। इस बार का लक्ष्य हादसे में 10 से 20 फीसदी कमी लाना है।
पिछले साल 25 फीसद कमी आई थी रॉड सेफ्टी एक्शन
प्लान बना है। जागरूकता रथ हमने तैयार किया है। घायल की मदद करें,सूचना जरूर दे। राष्ट्रीय पर्व पर गुड सेमेरिटीन का सम्मान करेंगे। पंचायत स्तर पर भी सड़क सुरक्षा को लेकर भी जागरूकता लाएंगे। जिला पंचायत के जरिए
ब्लैक स्पॉट तय करेंगे इंजीनियरिंग सुधार होगा।
इसका कितना प्रभाव पड़ा, उसका मूल्यांकन करेंगे।एंबुलेंस के जरिए घायल को जल्द पहुंचाए। यातायात विभाग ओवर स्पीड ड्रिंक एन्ड ड्राइव ओवर लोड मोबाइल यूज पर चलानी कार्रवाई करते है। इस दौरान सीएमएचओ जेपी मेश्राम, एएसपी डीआर पोर्ते, डीएसपी दिनेश सिन्हा, टीआई बालोद जीएस ठाकुर, टीआई गुंडरदेही रोहित मालेकर, लोहारा टीआई मनीष शर्मा सहित अन्य थाना प्रभारी मौजूद रहे। धीरज उपाध्याय अधिवक्ता ने मंच संचालन किया।

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