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लेख /आरामपसन्दगी व अधिक सुविधाभोगी जीवन शैली से बढ रहे हैं रोग: बिजेंद्र सिन्हा दुर्ग

आज हम आधुनिक टेक्नोलाजी व साधनों सुविधाओं के युग में जी रहे हैं। दूर संचार माध्यम गाडियाँ कम्प्यूटर देशी विदेशी उपभोग की सामग्री से परिपूर्ण जीवन, कुल मिलाकर आरामपसन्दगी व अधिक सुविधाभोगी जीवनशैली। साधन सुविधाएँ आधुनिक जीवन शैली का अंग बन गया है। सम्भवतः मानव जीवन की जटिलताओं व परेशानियों को दूर करने के लिए साधनों सुविधाओं का आविष्कार किया था।
लेकिन आज भौतिकता व वस्तुकरण इतना हावी हो गया है कि दिनचर्या का अधिकांश समय साधनों सुविधाओं के उपभोग में व्यतीत होता है। व्यक्ति आत्मकेन्द्रित व अधिक सुविधाभोगी होता जा रहा है। सुविधाभोगी जीवन शैली व आधुनिक यन्त्रों का अतिउपयोग मानव शरीर पर दुष्प्रभाव डालते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अनियन्त्रित व खराब जीवनशैली अनियमित जीवनशैली और अनियमित खान-पान के कारण बीमारियां घेर रही हैं।
इसे दो दृष्टिकोण से देखना होगा।


एक यह कि आधुनिक यन्त्रों के अति उपयोग व दुरूपयोग से मानव शरीर पर पडने वाला दुष्प्रभाव।
दुसरा साधनों सुविधाओं के कारण मानव शरीर का प्रकृति से दूर होना ।वाहनों के कारण बढते प्रदूषण आधुनिक यन्त्रों से निकलने वाले हानिकारक तरंगें व विकिरण शरीर पर खतरनाक असर डालते हैं। जैसे मोबाइल व मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें व विकिरण से अनेक रोग हो रहे हैं। स्मार्ट फोन का दूषित प्रभाव इस कदर बढता जा रहा है कि मनोरोग सहित
क ई रोगों के मामले सामने आते हैं। आए दिन स्मार्ट फोन से बच्चों पर होने वाले विभिन्न रोगों के समाचार आते रहते हैं। चिकित्सक समय-समय पर मोबाइल के दुष्परिणाम से हमें आगाह करते ही रहते हैं। हमें इन यन्त्रों के दुष्प्रभाव से बचने की जरुरत है। आज सर्वाधिक आवश्यकता इन यन्त्रों के
विवेकपूर्ण उपयोग की है
मानव जीवन का प्रकृति से दूर होना ।
भौतिक विकास के साथ-साथ साधनों सुविधाओं के कारण आज मनुष्य प्राकृतिक जीवनशैली से दूर होते जा रहा है। भागदौड की जिंदगी के कारण लोगों की दिनचर्या डगमगा सी गयी है। जीवन प्रकृति के विपरीत होने लगा है। हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का हर पाँचवा मधुमेह रोगी भारतीय। यह स्थिति मानव समाज के लिए चिंताजनक व शोचनीय है एवं गहन चिंतन व शोध का विषय है। अनियन्त्रित व खराब जीवनशैली और अनियमित खान-पान के कारण बीमारियां घेर रही हैं। आज न तो आहार पर किसी का ध्यान है न निद्रा पर और न ही ब्रम्हचर्य पर। तो निश्चित ही रोगियों की संख्या बढना स्वाभाविक है। जब हम प्रकृति के विपरीत कार्य करने लगते हैं तो अपनायी जाने वाली अप्राकृतिक जीवन शैली हमारे शरीर को बीमार करने लगती है और हम विभिन्न तरंह के शारीरिक व मानसिक रोगों से हम घिरने लगते हैं। प्राकृतिक जीवनशैली से मिलने वाले लाभों से हमें लाभान्वित होना चाहिए। प्राकृतिक सान्निध्य से उपजी उर्जा शान्ति स्फूर्ति व सक्रियता का स्रोत है।
शिशु रोग विशेषज्ञों का मत है कि जो बच्चे धूल और मिट्टी में खेलते हैं वे अपेक्षाकृत अधिक तंदुरुस्त रहते हैं। स्पष्ट है कि स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध वायु प्रकाश मिट्टी या मिट्टी की परत से शरीर का सम्पर्क जरूरी है।
लेकिन आज हम फर्श और टाइल्स पर चलते हैं। इन सुविधाओं के चलते आज हम प्राकृतिक उर्जा से उपजी स्वास्थ्य लाभ से हम वंचित हो रहे हैं। स्वस्थ जीवन के लिए मनुष्य का पंचतत्व से संतुलन संतुलन आवश्यक है। वर्तमान समय में मनुष्य और पंचतत्व में संतुलन बिगड़ने लगा है जिसके कारण वातावरण में अनेक बीमारियां फैल रही हैं। हमें समझना होगा कि पेड़ पौधे मिट्टी प्रकाश आदि प्राकृतिक तत्व हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यदि हम उन्हें ही अपने जीवन से दूर रखेंगे या उनके सम्पर्क से वंचित रहेंगे तो निश्चित रूप से बीमारियां हमे घेर लेंगी। इनके सम्पर्क से शरीर में तेज बल शक्ति व स्फूर्ति का संचार होता है। पहले लोगों की दिनचर्या प्रकृति के अनुकूल थी। उनकी यही दिनचर्या उन्हे स्वस्थ व सक्रिय बनाए रखती थी। पैदल घूमना व्यायाम साईकिलिन्ग और शारीरिक श्रम आदि शारिरीक गतिविधियाँ
जीवन चर्या से घट रही हैं। इन शारीरिक गतिविधियों से पसीने द्वारा शरीर से विषैले एवं त्याज्य पदार्थों का परित्याग सही ढंग से होते रहता है। तथा मांस पेशियों सक्रिय रहती हैं जो अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। अप्राकृतिक व विकृत जीवन शैली तनाव व रोग ग्रस्त होने का कारण है जबकि अपनाए जाने वाले प्राकृतिक जीवनशैली स्वास्थ्यवर्धक व तनावो से मुक्त होने में सहायक है। वर्तमान समय में सर्वाधिक आवश्यकता प्राकृतिक जीवनशैली के महत्व को समझने व इसको व्यापक स्तर पर अपनाए जाने की है।

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