उसरवारा की रहने वाली गरीब परिवार के टॉपर बेटी का सम्मान करने पहुंचे समाजसेवी जयंत किरी, आगे की पढ़ाई का खर्चा भी उठाएंगे



गुरुर । गुरुर ब्लॉक के ग्राम उसरवारा की रहने वाली दसवीं कक्षा की टॉपर बेटी पद्मिनी शांडिल्य का सम्मान करने के लिए स्वयं गुरुर के समाजसेवी जयंत किरी उनके घर पहुंचे और उनका सम्मान कर गुलदस्ता भेंटकर हौसला बढ़ाया। साथ ही समाज सेवी जयंत किरी ने दरियादिली दिखाते हुए कहा कि आगे की पढ़ाई में जो भी खर्च आएगा उस खर्च को उठाने की भी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने कहा कि इस बेटी को अब आगे कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने पद्मिनी की माता के संघर्ष को सलाम किया और कहा कि 3 साल पहले पिता के गुजर जाने के बाद माता ने हार ना मानते हुए रोजी मजदूरी और रसोईया का काम करते हुए अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाया और आज इस काबिल बना रहे हैं कि एक बेटी टॉप टेन में आ गई है। यह गौरव की बात है। प्रतिभा अगर हो तो गरीबी बाधा नहीं बन सकती। बस खुद के ऊपर विश्वास और लगन की जरूरत है। पढ़ाई में मेहनत जरुरी है। पद्मिनी शांडिल्य सभी बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत है। टॉप फाइव में स्थान बनाने वाली पद्मिनी शांडिल्य निवासी उसरवारा, पांचवे स्थान पर आई है। पद्मिनी शांडिल्य फागुनदाह हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करती है। पद्मिनी का जीवन संघर्षमय है। वह इसलिए क्योंकि तीन साल पहले ही उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है । पिता भूपेंद्र शांडिल्य के निधन के बाद उनकी माता प्रतिभा शांडिल्य ने ही उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। घर में कोई जमीन जायजाद नहीं है। सिर्फ मजदूरी के भरोसे उनकी माता ने मेहनत करके परिवार चलाया और बेटी को पढ़ाया। आज बेटी ने उनका नाम रोशन कर दिया है। स्कूल के साथ-साथ घर पर वह 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी। पद्मिनी कहती है सभी शिक्षकों का उन्हें पूरा साथ और मार्गदर्शन मिला। उन्हें खो-खो खेलना पसंद है। वह प्रेरणा स्रोत अपनी मम्मी प्रतिभा को ही मानती है। पद्मिनी कहती है मेरी मां बहुत मेहनती है ।मेहनत से कभी कतराती नहीं है और उसी से मुझे पढ़ाई करने की प्रेरणा मिली। आगे चलकर पद्मनी सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहती है। उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की। सेल्फ स्टडी और शिक्षकों के मार्गदर्शन में उन्होंने पढ़ाई की।

टॉपर

बेटी से दो बार मिलने पहुंचे समाजसेवी जयंत किरी

जब उन्होंने उसरवारा की टॉपर बेटी के बारे में सुना तो समाज सेवी जयंत किरी से रहा नहीं गया। तत्काल ही उनसे मिलने के लिए ग्राम पहुंचे। पर पहले वक्त बेटी घर पर नहीं थी तो उन्होंने फिर दोबारा जाकर टॉपर बेटी से मुलाकात की और उनके परिवार वालों को भी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। जयंत किरी ने टॉपर बिटिया का फूलमाला से स्वागत कर उनको मिठाई भी खिलाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि बालोद ज़िले के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी उपलब्धि प्रदेश में हासिल की है। जिसमें बालोद ज़िले से 12 छात्रों ने बाजी मारी है। यह बालोद ज़िले के लिए बड़े ख़ुशी और गौरव का विषय है।

हताश निराश न हो, आगे भी अवसर आएगा – जयंत किरी

समाज सेवी जयंत किरी ने कहा कि ज़िंदगी के हर एक क्षण में परीक्षा होती है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी परिणाम में जो भी छात्र असफल और अनुत्तीर्ण हुए है वह हताश ना निराश ना हो। निराश होकर ऐसा कोई कदम ना उठाएँ जिसका तकलीफ़ परिवार को उठाना पड़े। आगे और भी अवसर आयेंगे जिसमे कड़ी मेहनत व लगन से पढ़ाई कर सफलता हासिल की जा सकती है।

कोई भी कर सकता है बड़ा मुक़ाम हासिल

समाज सेवी जयंत किरी ने कहा कि जीवन में कोई भी बड़ा मुक़ाम हासिल कर सकता है। उन्होंने टॉपर बिटिया के साथ मुलाक़ात कर चर्चा की तो छात्रा ने कहा कि वह स्कूल में शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गये बातों को ध्यान से सुनकर उसका नोट्स बनाकर गंभीरता से अध्ययन करते थे। जिसके चलते यह मुक़ाम हासिल किया। समाज सेवी जयंत किरी ने कहा कि अगर इसी तरह सभी छात्र शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गये बातों को ध्यान में रखकर गंभीरता से पढ़ाई करे तो हर कोई टॉप कर सकता है।

कई प्रशासनिक अधिकारी असफल होने के बाद हुए सफल

जयंत किरी ने कहा कि वर्तमान में देश के विभिन्न स्थानों में ड्यूटी कर रहे कई प्रशासनिक अधिकारी यानी आईएएस, आईपीएस, आईएफ़एस, आईआरएस अफ़सर कई बार असफल हुए हैं। कई तो ऐसे अधिकारी भी है जिनके दसवी और बारहवीं में बहुत कम नंबर अर्जित किए हैं। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी। इसी तरह कम नंबर आये या अनुत्तीर्ण छात्र निराश ना होकर दोबारा मेहनत कर और अच्छे अंकों से पास हो सकते हैं।

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