बालोद -जिला अस्पताल में अंधविश्वास के चलते एक जहरीला फल खाने वाले कोरगुड़ा के रहने वाले मिथलेश कुमार देवांगन उम्र 32 वर्ष की मौत हो गई। दरअसल में मिथलेश कुमार ने अज्ञात कारणवश कनेर का जहरीला फल खा लिया था। उसने यह फल कब खाया किसी को जानकारी नहीं लेकिन अचानक बुधवार को दोपहर 12 बजे उसे उल्टी होने लगी। घरवालों द्वारा पूछने पर उसने बताया कि उसने कनेर का फल खा लिया है। जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में जान बचाने के इरादे से उसे उल्टी करवाने के लिए परिजनों व ग्रामीणों ने अफवाह में पड़कर गोबर पानी घोलकर पिला दिया लेकिन स्थिति और बिगड़ गई और फिर मजबूरी में उसे अस्पताल लाने लगे। जैसे ही जिला अस्पताल पहुंचे, पांच से 10 मिनट के बाद उसकी मौत हो गई। डॉक्टर भी कुछ नहीं कर पाए। डॉक्टरों ने परिजनों को जब इस बारे में पूछा कि उसकी तबीयत बिगड़ी कैसी थी तो परिजनों ने फिर पूरे मामले का खुलासा किया। इस पर डॉक्टर ने भी बताया कि आखिर गोबर पानी क्यों पिलाए थे? जहर कौन सा खाया या पिया था, इसकी पुष्टि करने के लिए पोस्टमार्टम करना पड़ेगा। फिर परिजनों ने बताया कि कनेर फल खाने की बात मृतक ने घरवालों को बताई थी। देर शाम तक पीएम के बाद परिजनों को शव सौंपा गया। मिथलेश कुमार देवांगन खेती किसानी के अलावा बुनकर काम भी करता था।
ना पिलाए गोबर पानी, इससे बिगड़ जाती है और तबियत, ये है अंधविश्वास

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक व प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश मिश्र ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मामलों में लोग अक्सर अंधविश्वास में पड़कर पीड़ितों को गोबर पानी का घोल पिला देते हैं। जबकि यह पूरी तरह से अफवाह है। ऐसी अफवाह से सावधान रहें। अंधविश्वास में ना आए। इससे मरीज की तबीयत सुधरने के बजाय और बिगड़ जाती है। आजकल आधुनिक मेडिकल साइंस ने काफी तरक्की कर ली है। अगर किसी ने जहर सेवन कर लिया है। तो समय रहते उसे अस्पताल पहुंचा दें। तो उसकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन लोग हैं कि अंधविश्वास व अफवाहों में आकर अपने लोगों की जान के दुश्मन बन जाते हैं और इसी का नतीजा है कि कई मर्तबा ऐसी घटनाएं सामने आती है। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में यह अफवाह आज भी बना रहता है कि अगर कोई जहर पी ले तो उसे गोबर पानी का घोल पिला देने से वह उल्टी करने लगेगा और फिर जहर बाहर आ जाएगा। लेकिन आमतौर पर यह उपाय सफल नहीं होता है। उल्टा इससे और तबीयत बिगड़ जाती है।
परिजनों को हो रहा पछतावा

जब मरीज को अस्पताल लाया गया तो उसके मुंह के पास भी गोबर चिपका हुआ था। जिसे देखकर डाक्टर व स्टाफ भी अंदाजा लगा चुके थे कि इसे गोबर पानी पिला दिया गया है। बाद में जब डॉक्टरों ने बताया कि ऐसा नहीं करना था तो परिजन भी पछतावा करने लगे। उनका बड़ा भाई अस्पताल में रोने लग गया तो वही यह सवाल व जांच का विषय अभी भी बना है कि आखिर किस तरह की परेशानी के चलते मिथलेश देवांगन ने जहरीला फल खाया था। बालोद पुलिस मर्ग कायम कार मामले की जांच करेगी।
Today Big news
