स्टोरीविवर में बच्चों के लिए कहानी अनुवाद कर “हमारे नायक” के रूप में चयनित हुई तृप्ति गजभिये, जिले को किया गौरान्वित, पढ़िए इनकी प्रेरक कहानी ब्लॉग लेखक श्रवण कुमार यादव की कलम से



कांकेर/बालोद। अगर किसी काम को करने के लिए मन में दृढ़ संकल्प बना लिए, तो फिर उस काम को तन-मन-धन से पूर्ण निष्ठा के साथ करने के लिए उचित अवसर भी मिल जाता है | ऐसे संकल्पित कार्य करने में किसी भी तरह की बाधा आने पर भी सहजता से किया जा सकता है, चाहे सुदूर व दूरस्थ क्षेत्र ही क्यों न हो | ये कहानी है छत्तीसगढ़ शासन के पढ़ई तुंहर दुआर पोर्टल में चयनित “हमारे नायक (शिक्षक)” तृप्ति गजभिये की। जो उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दूरस्थ ब्लॉक दुर्गुकोंदल के शासकीय उ. मा. विद्यालय मेड़ो में कार्यरत है।

ब्लॉग लेखक :- श्रवण कुमार यादव (बालोद)

पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के राज्य स्तरीय ब्लॉक लेखक श्रवण कुमार यादव, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला कोसा, विकासखंड गुण्डरदेही, जिला बालोद से एक चर्चा के दौरान तृप्ति गजभिये ने जानकारी दिया कि वह 2008 से शिक्षकीय कार्य कर रही है | 2008 से 2015 तक दुर्गुकोंदल ब्लॉक के दूरस्थ अंचल ग्राम दमकसा में शिक्षक (पंचायत) के पद पर पदस्थ रही है। वर्तमान में 2016 से अंग्रेजी व्याख्याता के पद पर शा.उ.मा. विद्यालय मेड़ो में सेवा दे रही है।

स्टोरीविवर में सहभागिता, अब तक 10 से अधिक स्टोरी कर चुके है अनुवाद
तृप्ति गजभिये ने बताया कि उनको शिक्षकीय क्षेत्र में अलग अलग तरह के कार्य करना, उन्हें सीखना उनकी दैनिक आदतों में सम्मिलित हो चुका है| स्टोरीविवर वेबसाइट में स्टोरी बनाने व अनुवाद की जानकारी राज्य स्तरीय वेबिनार के माध्यम से मिली । इसके अलावा छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षा के टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से विस्तृत जानकारी मिलने पर इसमें सहभागिता देते हुए एक नए अनुभव प्राप्त हुए। स्टोरीविवर में अभी उनके द्वारा 10 से अधिक स्टोरी अनुवाद किए जा चुके है और आगे अनुवाद कार्य निरन्तर जारी है। जिन प्रमुख स्टोरी को उनके द्वारा अनुवाद किया गया है | उनमें सुमा, नीमा का बर्थडे, मेरे 10 दोस्त, टिप्पी अउ पेपे, विराम चिन्ह यात्रा, जेब्रा को कैसे धारियां मिली, मछली और एक उपहार, आमा के चटनी प्रमुख है | स्टोरीविवर वेबसाइट में बच्चों के स्तर की बहुत ही ज्ञानवर्धक, रोचक कहानियां उपलब्ध हैं | साथ ही यह कहानियां हिन्दी, अंग्रेजी भाषाओं के साथ साथ स्थानीय भाषाओं में भी उपलब्ध है |

पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम में सहभागिता
पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम अंतर्गत उनके द्वारा ऑनलाइन व ऑफ़लाइन शिक्षा पूरी निष्ठा व लगन से प्रतिदिन संचालित किया जा रहा है | वह मई 2020 से ऑनलाइन क्लॉस ले रही हैं, जिसमें कांकेर जिले के अलावा रायगढ़, धमतरी, रायपुर, कोंडागाँव, बिलासपुर, बलरामपुर, जगदलपुर इत्यादि जिलों से भी बच्चे जुड़ रहे है | वह प्रतिदिन 2 से 3 ऑनलाइन क्लॉस लेती हैं | बच्चों के आकलन के लिए ऑनलाइन टेस्ट भी लेती हैं | बच्चों की अभिव्यक्ति कौशल निखारने के लिए प्रति रविवार वाद विवाद प्रतियोगिता सहित निबंध, गायन जैसे अन्य प्रतियोगिता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में आयोजित किया जाता है, जिसमें सभी बच्चे उत्साह से सहभागिता देते है | इसके अलावा ऑनलाइन क्लॉस को प्रभावी बनाने के लिए यूट्यूब चैनल बनाकर सामग्री अपलोड कर रही हैं | cgschool.in पोर्टल में भी कंटेंट अपलोड किए गए है | उनके द्वारा लगभग 200 ऑनलाइन क्लॉस लिए जा चुके है, जिसमें लगभग 5600 से अधिक बच्चे सम्मिलित हो चुके है | मोहल्ला क्लॉस में भी प्रतिदिन लगभग 60 बच्चे सहभागिता दे रहे है |

ग्रुप ऑफ अभिलाषा भी बनाई
दुर्गुकोंदल जैसे दूरस्थ क्षेत्र के गांव की ऐसी बालिकाओं जो सुविधाओं के अभाव में अपनी पढ़ाई बंद कर चुकी है, उनको आगे बढ़ाने व उनके सर्वांगीण विकास के लिए तृप्ति गजभिये द्वारा “ग्रुप ऑफ अभिलाषा” बनाया गया है| इस ग्रुप के माध्यम से ऐसे बालिकाओं की प्रतिभा को सामने ला कर उन्हें उसे क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किए जा रहे है | इसके अलावा इस ग्रुप के माध्यम से इन बालिकाओं को नैतिक शिक्षा, आत्मनिर्भर बनने की शिक्षा सहित अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किए जा रहे हैं |

तृप्ति गजभिये का मानना है कि शिक्षक होना एक महान कार्य है | हमें सच्ची निष्ठा और लगन से अपने कर्तव्य निभाने का प्रयास करना चाहिए | शिक्षा के क्षेत्र में सदैव नवीन दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है | हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा कि हम सभी बच्चों को बेहतरीन शिक्षा प्रदान करें, जो उनके भविष्य निर्माण में सहायक हो, साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर, समझदार और अच्छा इंसान बनने में उनकी मदद कर पाए |

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