बालोद/ गुंडरदेही। कांग्रेस द्वारा सत्ता में आने के बाद छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा गरवा घुरवा बाड़ी के नारे के साथ गांव में बाड़ी प्रोत्साहन की योजना शुरू की गई। जिसमें स्व सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा गया और उन्हें सामूहिक बाड़ी से खेती करके आमदनी में वृद्धि करने के लिए अनुदान योजना दी गई। इस योजना का लाभ उठाकर ग्राम हल्दी के स्व सहायता समूह की महिलाएं भी सब्जी बाड़ी की खेती कर रही है लेकिन बदकिस्मती है कि बिना पानी के खेती सफल नहीं हो पा रही है। जिसके चलते अब इस गांव में सब्जी की फसल तबाह हो गई है और आवक शून्य है। समूह की महिलाओं का कहना है कि हमें जितना अनुदान मिला था वह भी लगा चुके और खुद के खर्चे से 40 से ₹50000 भी लगा चुके। लेकिन आमदनी नहीं हो रही है। बिना पानी के फसल मरती जा रही है। उत्पादन जीरो है, खर्चा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में हमें अब इस योजना के बदले जो नुकसान हुआ है उसका मुआवजा दिया जाए।

अधिकारियों को भी इस संबंध में जानकारी दिए जाने के बाद भी अब तक कोई निरीक्षण के लिए नहीं आया है। जिस पर समूह की महिलाओं में नाराजगी है। छत्तीसगढ़ महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने कहा कि सब्जी की फसल चौपट होने से उन्हें लगभग ₹40000 का नुकसान हुआ है। अधिकारी लोग देखने के लिए आएंगे कहते हैं लेकिन कोई आ नहीं रहे। फसल जो भी लगाए थे वह पूरी तरह से मर गई हैं। इसकी वजह पानी की कमी है। हम बाड़ी से हरियाली लाना चाह रहे थे लेकिन पानी के बिन सब सुना है और करें भी तो क्या करें। हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास करके देख लिए। लेकिन पानी का पर्याप्त साधन ना होने के चलते यहां बाड़ी योजना सफल होना बहुत मुश्किल है। महिलाओं ने बताया कि कुछ महीने पहले पंचायत की ओर से नहर नाली के माध्यम से सिंचाई करवाई गई थी लेकिन जल संसाधन विभाग द्वारा नहर में पानी बंद कर दिए जाने के बाद वहां से भी पानी मिलना मुश्किल हो गया। शासन प्रशासन द्वारा हमें बाड़ी विकास योजना में जोड़ा तो गया है लेकिन सिंचाई की व्यवस्था ना किए जाने से उसमें कारगर सफलता हासिल नहीं हो पा रही हैं और सरकार की यह अच्छी योजना अब ध्वस्त होती नजर आ रही है।

महिलाओं ने मांग किया कि संबंधित अधिकारी यहां आए और स्थल निरीक्षण करें और जितना भी हमें नुकसान हुआ है उसका मुआवजा दिया जाए। समूह अध्यक्ष रोशनी सिन्हा,सचिव सीमा बाई, अहिल्याबाई साहू, कामिन ठाकुर, सोहद्रा, फुलेश्वरी, ओमेश्वरी ने कहा कि अगर संबंधित अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं किया गया और हमें नियमानुसार मुआवजा नहीं दिया गया तो हम पूरी तरह से कर्ज से दब जाएंगे और जिस उत्पादन फायदे की सोच के हमने बाड़ी योजना से खेती शुरू की थी वह भी घाटे का सौदा साबित होगी।
