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सिवनी के 150 ग्रामीणों ने श्रमदान कर पेश की मिशाल, गांव को पानी की समस्या से निजात दिलाने कर दिया ये काम? पढ़िए प्रेरक खबर

बालोद। बालोद से लगे हुए ग्राम सिवनी में यहां के ग्रामीणों ने श्रमदान करके तांदुला मुख्य नहर में एक अस्थाई बंधान बनाया है।ताकि यहां पर पानी का कुछ भराव हो। जिससे भूजल स्तर बना रहे। आने वाली गर्मी में होने वाली पानी की समस्या का हल व रास्ता निकालने के लिए ऐसा किया गया है। सरपंच दानेश्वर सिन्हा ने बताया कि जल संसाधन विभाग द्वारा इस बार तांदुला कैनाल में कुछ काम चलने के कारण पानी नहीं छोड़ा गया है क्योंकि तांदुला डैम के पानी से ही गांव की अधिकतम आबादी निस्तारी करती है। इसी के भरोसे गांव में गुजारा होता है लेकिन इस बार पानी न दिए जाने से बहुत परेशानी खड़ी हुई। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग से ग्रामीणों व पंचायत ने निवेदन किया गया कि पानी छोड़ा जाए। लेकिन अधिकारियों द्वारा यह समस्या बताई गई की पानी छोड़ेंगे तो आगे काम चलना है वहां प्रभावित होगा। पर ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि हम छोटे तलाब नुमा केनाल के बीचो-बीच बंधान बना देंगे ताकि पानी रुक जाए। विभाग ने भी अनुमति दे दी। फिर क्या था गांव वालों ने सब मिलकर लगभग 2 घंटे तक श्रमदान करके वहां मुरूम मिट्टी व बोरियों के जरिए बंधान बना दिया। जहां पर अब डैम से पानी छोड़े जाने के बाद वही पानी बंधान में भरा हुआ है। ताकि लोग यहां निस्तारी कर सके।सरपंच दानेश्वर सिन्हा ने बताया कि ग्राम विकास समिति में भी फंड कमी थी। अगर हम अलग से बनवाते तो कम से कम 10000 से 20000 रुपये तक आ जाता इसलिए उन्होंने अपना विचार ग्रामीणों के समक्ष रखा कि क्यों न सभी की भलाई के लिए श्रमदान करके बंधान बना दें। ग्रामीण राजी हो गए। गांव में मुनादी हुई।लगभग डेढ़ सौ लोग इकट्ठा हो गए और जिन्होंने 2 से 3 घंटे तक यहां श्रमदान करके बन्धान बना दिया और अब यहां पानी ठहरने लगा है। ताकि अब गर्मी में किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी।

जलस्रोत सूख जाते वरना

सरपंच सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि अगर इस बार डैम से पानी निस्तारी के लिए नहीं छोड़ा जाता तो गांव का जल स्रोत सूखने लग जाता। वहीं निस्तारी की बड़ी दिक्कत हो जाती। लोगों को या तो डैम जाना पड़ता या फिर अन्य सहारा लेना पड़ता। लेकिन विभाग ने उनकी समस्या सुनी और वहां बंधान बनाने की अनुमति दी । श्रमदान से बंधान बना दिया गया है। अब पानी भी छोड़ दिया गया है। जितने हिस्से में पानी भरा हुआ है जहां से अब ग्रामवासी निस्तारी आराम से कर सकते हैं। इससे अन्य स्रोत का भूजल स्तर भी बना हुआ है।

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