DAILY BALOD NEWS

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नाबालिग से शादी का प्रलोभन देकर बलात्कार करने पर 20 वर्ष का कारावास

बालोद। किरण कुमार जागडे विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) बालोद (छ.ग.) के द्वारा आरोपी धीरेन्द्र उईके उर्फ पिन्टू आ० भगवान उईके, उम्र 21 वर्ष, निवासी- रानीतराई, थाना- बालोद, जिला-बालोद (छ.ग.) को भादवि की धारा 376 व लैंगिक अपराधों के संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के आरोप में बीस वर्ष का सश्रम कारावास व कुल 3,000/- रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
प्रकरण का संक्षिप्त विवरण छन्नू लाल साहू, विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) के अनुसार एक ग्राम की पीड़िता की माता के द्वारा दिनांक 06.01.2020 को थाना बालोद में उपस्थित होकर मौखिक रूप से रिपोर्ट दर्ज करायी कि दिनांक 04.01.2020 के शाम 07:00 बजे करीबन गांव के गली में वह अपनी नाबालिग पुत्री पीडिता के साथ जा रही थी तभी धीरेन्द्र उइके उसकी पुत्री पीडिता को “बाई” करके बोला। तब वह बोली कि किसको बाई बोल रहा है, तब धीरेन्द्र उसे गाली देते हुए बोला कि तुम्हारी लड़की पीड़िता को बोल रहा हूँ, तब उन दोनों के बीच झगड़ा हो गया और उसी समय आरोपी कहने लगा कि मैं तुम्हारी लड़की को घर ले जाऊंगा,” उसी समय उसकी पुत्री पीड़िता बतायी कि वह धीरेन्द्र से करीब एक साल से प्रेम करती है और उसके तरफ से वह तीन माह की गर्भवती है। इस प्रकार से धीरेन्द्र ने उसकी पुत्री को नाबालिग होना जानते हुए बहला-फुसलाकर शादी कर पत्नी बनाकर रखूंगा, बोलकर प्रलोभन देकर हाथ पकड़कर अपने घर ले जाकर लगातार शारीरिक संबंध स्थापित किया है। जिससे उसकी पुत्री पीडिता 03 माह की गर्भवती हो गयी । थाना बालोद के उप निरीक्षक शोभा यादव के द्वारा पीडिता की माता के कहे अनुसार अभियुक्त धीरेन्द्र उईके उर्फ पिन्टू के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पीड़िता को आरोपी धीरेन्द्र उईके उर्फ पिन्टू के कब्जे से बरामद किया गया। उप निरीक्षक शोभा यादव के द्वारा पीड़िता से पूछताछ कर कथन लेने पर बतायी कि माह सितम्बर 2019 शिक्षक दिवस के दिन आरोपी ने पहली बार गांव के ही खाली मैदान में नाबालिग जानते हुए पीडिता के साथ पहली बार बलात्कार किया। उसके बाद आरोपी पीड़िता के साथ लगातार 04.01.2020 तक जबरदस्ती लगातार बलात्कार किया, जिससे 04 माह का गर्भवती हो गयी। तत्पश्चात् संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियुक्त के खिलाफ अपराध पाये जाने पर आरोपी के विरूद्ध अभियोग पत्र दिनांक 10.02.2020 को विचारण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय का मत है कि बलात्संग के अपराध से स्त्री की सुरक्षा एवं उसकी प्रतिष्ठा धूमिल होने के साथ ही उसके जीवन एवं भविष्य को भी कुंठित एवं प्रभावित करता है। आज के विकसित समाज में आये दिन महिलाओं के प्रति घटित होने वाली बलात्कार की घटना सभ्य समाज के लिए कलंकारी है, जो स्त्री की दैहिक स्वतंत्रता का हनन कर उन्हें व्यक्तिगत एवं सामाजिक रूप से कलंकित करता है। ऐसे गंभीर अपराध में आरोपी किसी प्रकार की सहानुभूति प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। प्रकरण में आये साक्ष्य के आधार पर आरोपी को उक्त दण्ड से दण्डित किया गया।

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