योग से मिल सकती है संस्कार की शिक्षा, जिसकी महिलाओं की दशा सुधारने में होगी सार्थक भूमिका



बालोद। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिकोसा में पदस्थ राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षिका मधुमाला कौशल ने महिलाओं की दशा पर चिंतन किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ 8 मार्च को ही ना मना कर महिलाओं का सम्मान प्रतिदिन होनी चाहिए। प्रतिदिन सम्मान एवं घर से ही सम्मान की शुरुआत होनी चाहिए। इस दिन महिलाओं को सम्मान के साथ अधिकार की बात होती है लेकिन आज भी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, दुष्कर्म, सामूहिक कुकर्म की घटनाएं घट रही हैं। जो चिंतन का विषय है। इसे दूर करने के लिए केवल और केवल एक ही उपाय है, वह है बालक और बालिकाओं में समानता लाना। जो घर से ही शुरू होती है। बालिका के बजाय बालकों को भी जो संस्कार बालिकाओं को दी जाती है वह संस्कार दिया जाए। बचपन से ही उन्हें योग से जोड़ा जाए। जिससे स्वस्थ शरीर होगा और कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है। योग से अच्छे विचार, अच्छी सोच अर्थात सकारात्मक विचार का विकास होगा। तो निश्चित ही सुधार होगा। योग से संस्कार की सीढ़ी चढ़ सकते हैं और इससे हम समाज में महिलाओं की दशा में भी सुधार कर सकते हैं। ज्ञात हो कि श्रीमती कौशल शिक्षा विभाग द्वारा राज्य पाल पुरस्कृत हैं तो वहीं रेड क्रॉस के जरिए भी राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। स्काउट गाइड में एशिया फेशेफिक नेशनल पुरस्कार मिला है। तो वहीं पतंजलि समिति की जिला महिला अध्यक्ष के रूप में भी काम करती हैं। इसके जरिए वह महिलाओं को हमेशा प्रेरित करते रहते हैं। वह योग की नेशनल ट्रेजर भी हैं। जो लगातार लोगों को योग सिखा कर उन्हें निरोगी बनाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने खुद अपने गले में हुए थायराइड की बीमारी को योग से दूर किया और योग का महत्व बताकर आज लोगों को स्वस्थ जीवन जीना सिखा रही हैं। महिला दिवस पर उन्होंने संस्कारों की सीख पर जोर दिया और इसके लिए योग को भी एक अच्छा माध्यम बताया है।

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