ऐतिहासिक मंदिर में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने की महादेव आराधना
बालोद। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व “अटूट आस्था के 1100 वर्ष” के उपलक्ष्य में बालोद जिले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन जगन्नाथपुर शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। ग्राम पंचायत जगन्नाथपुर के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भगवान शिव की विधिवत पूजा कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर सरपंच देव कुंवर कोसमा, सचिव खिलेश कुमार सोनबोईर, उपसरपंच मनोज सुकतेल सहित पंचायत प्रतिनिधि एवं पंचगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनपद सदस्य दमयंती सुभाष हरदेल, भाजपा मंडल जुंगेरा अध्यक्ष अरुण साहू, दौलत कोसमा, पत्रकार दीपक यादव तथा पुरातत्व विभाग के केयर टेकर उमाशंकर देवांगन भी मौजूद रहे।
11वीं-12वीं शताब्दी का ऐतिहासिक शिव मंदिर
बालोद जिले के बालोद-अर्जुन्दा मार्ग पर स्थित ग्राम जगन्नाथपुर का यह शिव मंदिर लगभग 11वीं से 12वीं शताब्दी का माना जाता है। यह मंदिर तालाब के किनारे ऊंचे स्थान पर स्थित है और अपनी प्राचीन स्थापत्य कला एवं धार्मिक महत्व के कारण विशेष पहचान रखता है।
पौराणिक कथा से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, जगदलपुर के राजा और रानी ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की यात्रा से लौटते समय यहां रुके थे। यहां के भक्तिमय वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य से प्रभावित होकर उन्होंने इस स्थान पर दो मंदिरों का निर्माण कराया। कहा जाता है कि उसी समय गांव का नाम “डुआ” से बदलकर “जगन्नाथपुर” पड़ा।
अद्भुत स्थापत्य कला का उदाहरण
मंदिर 12 पत्थर के स्तंभों पर टिका हुआ है, जिन पर बेहद सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर के गर्भगृह में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, वहीं भगवान गणेश की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
यह मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर के बेहतर संरक्षण और सौंदर्यीकरण की आवश्यकता है।
33 फीट ऊंची महादेव प्रतिमा बन रही आकर्षण का केंद्र
हाल ही में मंदिर परिसर के समीप 33 फीट ऊंची भगवान महादेव की प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनने जा रही है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण का संकल्प भी लिया।
