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बालोद में 8 प्राचार्यों के निलंबन और 14 की वेतनवृद्धि रोकने का छग प्रदेश शिक्षक संघ ने भी किया विरोध

“शिक्षकों को डराकर शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधारी जा सकती” : तामेश्वर कौशल

बालोद। बोर्ड परीक्षा परिणाम को लेकर बालोद जिला प्रशासन द्वारा 8 प्राचार्यों के निलंबन तथा 14 प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ ने भी कड़ी आपत्ति जताई है।

संघ के बालोद जिला अध्यक्ष तामेश्वर कौशल ने जारी बयान में कहा कि प्रशासन द्वारा की गई एकतरफा कार्रवाई से पूरे शिक्षक समुदाय में भय और आक्रोश का माहौल है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था सामूहिक जिम्मेदारी है, लेकिन पूरी जवाबदेही केवल प्राचार्यों और शिक्षकों पर डालना उचित नहीं है।

“सालभर गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझे रहे शिक्षक”

तामेश्वर कौशल ने कहा कि पूरे वर्ष शिक्षकों को विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्यों, सर्वे, प्रशिक्षण, चुनावी ड्यूटी, परीक्षा कार्य और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों में व्यस्त रखा गया। इसके बावजूद बेहतर परिणाम की अपेक्षा करना और परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं आने पर कठोर कार्रवाई करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि कई स्कूलों का परीक्षा परिणाम संतोषजनक होने के बावजूद केवल प्रतिशत में मामूली गिरावट के आधार पर निलंबन जैसी कार्रवाई की गई, जो शिक्षकों का मनोबल तोड़ने वाला कदम है।

“शिक्षकों को प्रताड़ित करना बंद करे प्रशासन”

जिला अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षक लगातार संसाधनों की कमी, स्टाफ की कमी और बदलती व्यवस्थाओं के बीच काम कर रहे हैं। बीच सत्र में युक्तियुक्तकरण और स्थानांतरण से भी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा: “शिक्षकों को प्रताड़ित कर शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधारी जा सकती। आवश्यकता सकारात्मक वातावरण और सहयोगात्मक कार्यप्रणाली की है।”

कार्रवाई वापस लेने की मांग

छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ ने जिला प्रशासन से 8 प्राचार्यों के निलंबन और 14 प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई जारी रही तो संगठन आगे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा।

संघ के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने शासन से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संवाद और सहयोग की नीति अपनाने की अपील की है।

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