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ईरागुड़ा स्कूल में मिशन वात्सल्य जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों को बताए बाल अधिकार और सुरक्षा के उपाय

गुड टच-बैड टच, साइबर क्राइम से लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तक दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

बालोद, 07 अगस्त 2026। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अमित सिन्हा के मार्गदर्शन में गुंडरदेही विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ईरागुड़ा में मिशन वात्सल्य एकीकृत बाल संरक्षण सेवाएं के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, बाल अधिकार और विभिन्न प्रकार के शोषण से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम 2012, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों से अवगत कराया गया।

गुड टच-बैड टच और साइबर क्राइम की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच, साइबर क्राइम और बाल अधिकारों के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया गया। उन्हें बताया गया कि किसी भी प्रकार की असहज, अनुचित या शोषणकारी स्थिति का सामना होने पर चुप रहने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति अथवा संबंधित सहायता तंत्र से संपर्क करना चाहिए।

विद्यार्थियों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के संबंध में भी जागरूक किया गया तथा साइबर अपराधों से बचने के लिए सावधानी बरतने की जानकारी दी गई।

संकट की स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी

कार्यक्रम में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया गया। किसी बच्चे के सामने संकट, शोषण, हिंसा, बाल विवाह अथवा अन्य गंभीर समस्या की स्थिति में सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री गजानंद साहू, प्राचार्य श्रीमती सुषमा पटेल, शिक्षक-शिक्षिकाएं, मास्टर ट्रेनर श्रीमती सुमन देवांगन, गोकुल राम यादव, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक श्री वेदप्रकाश साहू, केस वर्कर श्री कैलाश निषाद एवं श्री हेमशंकर निर्मलकर, जिला बाल संरक्षण इकाई के आउटरीच वर्कर श्री नूतन नेताम सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक कर सुरक्षित एवं संरक्षणपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करना रहा।

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