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शिक्षक लालरघुवीर सिंह ठाकुर ने 27वीं बार किया रक्तदान, हर तीन माह में निभा रहे ‘रक्तदान महादान’ की मिसाल

शिक्षा के साथ समाजसेवा में भी सक्रिय, 2017 से लगातार जरूरतमंदों के लिए कर रहे स्वैच्छिक रक्तदान

बालोद। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ समाजसेवा को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना चुके ग्राम देवारभाट निवासी शिक्षक एवं समाजसेवी लालरघुवीर सिंह ठाकुर (45 वर्ष) ने 8 अगस्त 2026 को जिला अस्पताल बालोद के ब्लड बैंक में 27वीं बार रक्तदान कर समाजसेवा की मिसाल पेश की। उन्होंने ग्राम रेंगाकठेरा, विकासखंड गुंडरदेही निवासी टीकम प्रसाद, पिता अर्जुन प्रसाद के लिए अपना बी पॉजिटिव रक्त दान किया।

2017 से हर तीन माह में रक्तदान

लालरघुवीर सिंह ठाकुर वर्ष 2017 से लगातार प्रत्येक तीन माह में स्वैच्छिक रक्तदान करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाने वाली ऐसी सेवा है, जिसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है। समय पर उपलब्ध कराया गया रक्त किसी मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि “रक्तदान श्रेष्ठ दान और श्रेष्ठ कर्म है। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को इंसानियत की खातिर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।” उन्होंने लोगों से रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों से दूर रहने और चिकित्सकीय रूप से पात्र होने पर स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील की।

समाजहित में मरणोपरांत देहदान और नेत्रदान का भी संकल्प

शिक्षक लालरघुवीर सिंह ठाकुर की समाजसेवा केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है। उन्होंने फरवरी 2022 में जिला अस्पताल बालोद में नेत्रदान के लिए पंजीयन कराया था। इसके बाद मार्च 2022 में मरणोपरांत देहदान की घोषणा से संबंधित दस्तावेज पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर मेडिकल कॉलेज में भेजे थे।

उनका यह संकल्प समाजहित और मानव सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ब्लड बैंक स्टाफ रहा मौजूद

27वीं बार रक्तदान के दौरान जिला अस्पताल बालोद के ब्लड बैंक स्टाफ डॉ. अजय साहू, पोषण देशमुख, रविकांत साहू, फनीस भुआर्य, रीतु साहू एवं उमा ठाकुर उपस्थित रहे। उन्होंने रक्तदान के इस पुनीत कार्य के लिए लालरघुवीर सिंह ठाकुर की सराहना की।

शिक्षक लालरघुवीर सिंह ठाकुर का संदेश है कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। जरूरतमंद मरीजों तक समय पर रक्त पहुंचाने के लिए समाज के स्वस्थ और पात्र लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। उनकी लगातार 27 बार रक्तदान करने की पहल युवाओं और समाज के अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक है।

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