भुवन सिन्हा सहित कई शिक्षक नेताओं ने जताई आपत्ति, कहा- “प्राकृतिक न्याय और सेवा नियमों के खिलाफ कार्रवाई”
बालोद। बालोद जिले में बोर्ड परीक्षा परिणाम में गिरावट को लेकर जिला प्रशासन द्वारा 8 प्राचार्यों के निलंबन और 14 प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के संभागीय अध्यक्ष भुवन सिन्हा ने भी इस कार्रवाई को अवैधानिक और विवाद को जन्म देने वाला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
भुवन सिन्हा ने शिक्षा मंत्री एवं स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि प्राचार्य द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होते हैं और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार केवल राज्य शासन को है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1965 एवं 1966 के नियम 9 के विपरीत है।
“परीक्षा परिणाम ही शिक्षा का एकमात्र मापदंड नहीं”
भुवन सिन्हा ने शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित होकर रह गई है, जबकि कमजोर परिणाम के पीछे प्रशासनिक नीतियां, शिक्षकों की कमी, मूल्यांकन पद्धति, छात्रों की सामाजिक परिस्थितियां और विभागीय अव्यवस्था भी जिम्मेदार होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में लंबे समय से प्रभारवाद, प्रशासनिक अव्यवस्था और अयोग्य अधिकारियों की नियुक्तियों के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, युक्तियुक्तकरण की अव्यवस्था, खराब गुणवत्ता वाले प्रश्नपत्र और शिक्षा में बढ़ते भ्रष्टाचार पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
“केवल प्राचार्यों को जिम्मेदार ठहराना गलत”
शिक्षक संघ ने कहा कि यदि परीक्षा परिणाम कमजोर है तो इसकी जिम्मेदारी केवल प्राचार्यों की नहीं बल्कि जिला शिक्षा विभाग और निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भी बनती है। संघ ने पूछा कि संबंधित विद्यालयों का निरीक्षण जिला शिक्षा अधिकारी, संयुक्त संचालक, डाइट और एससीईआरटी के अधिकारियों ने कब-कब किया और क्या सुधारात्मक पहल की गई।
भुवन सिन्हा ने कहा कि बिना समुचित जांच और पक्ष सुने सीधे निलंबन जैसी कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी खिलाफ है। इससे शिक्षकों में आक्रोश और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है, जो भविष्य में शैक्षणिक वातावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
प्राचार्यों से सम्मान समारोह के बहिष्कार की अपील
इसी बीच जानकारी सामने आई है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम वाले प्राचार्यों का सम्मान समारोह आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इस पर भी शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए जिले के समस्त प्राचार्यों से कार्यक्रम का बहिष्कार करने की अपील की है।
संभागीय अध्यक्ष भुवन सिन्हा ने कहा कि जब एक ओर प्राचार्यों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सम्मान समारोह आयोजित करना विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है। उन्होंने कहा कि जब तक अवैधानिक आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक शिक्षक समाज में असंतोष बना रहेगा।
आदेश निरस्त करने की मांग
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने राज्य शासन से मांग की है कि बालोद कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन एवं वेतनवृद्धि रोकने संबंधी आदेश तत्काल निरस्त किए जाएं तथा भविष्य में जिला प्रशासन को विभागीय राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध सीधे कार्रवाई करने से रोका जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की अनदेखी जारी रही तो आगे व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
