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शिक्षा सारथी के रूप में प्रेरक देशमुख की अनोखी पहल, मोहल्ला क्लास में ऑगमेन्टेड रियालटी टेक्नोलॉजी का किया प्रयोग, शिक्षिका दीपलता देशमुख से मिली प्रेरणा

अम्बिकापुर । छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना पढ़ई तुंहर दुआर में शिक्षकों व विद्यार्थियों द्वारा निरन्तर सहभागिता दी जा रही है। इसी क्रम में उच्च शिक्षित युवा वर्ग भी शिक्षा सारथी के रूप में अपनी निःस्वार्थ सेवा देने में अग्रणी है। अम्बिकापुर के ऐसे ही उत्साही युवा प्रेरक देशमुख का चयन आज के हमारे नायक के रूप में हुआ है, जो सुदुर वनांचल के असोला संकुल के गांवों के छात्र-छात्राओं को शिक्षा की मुख्य धारा से कोरोना काल में भी जोड़ा है। बी ई मेकेनिकल तक शिक्षित प्रेरक देशमुख द्वारा कोरोना महामारी में स्कूल शिक्षा विभाग की योजना की शुरुआत में ही आनलाइन क्लास के लिए बहुत कम बच्चों के पास मोबाइल उपलब्ध होने एवं नेटवर्क कनेक्टिविटी और रिचार्ज की समस्या होने के मोहल्ला कक्षा आयोजित कर रहे हैं।

शिक्षिका दीपलता देशमुख से मिली प्रेरणा


शिक्षा सारथी प्रेरक देशमुख की माता श्रीमती दीपलता देशमुख स्वयं एक शासकीय शिक्षिका है जो कि व्याख्याता संस्कृत के पद पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय असोला में पदस्थ हैं। उनके द्वारा भी अपने कार्य क्षेत्र में मोहल्ला क्लास, आनलाइन क्लास का आयोजन किया जा रहा है।

उनकी प्रेरणा से ही व उनके पदचिन्हों को आत्मसात करते हुए शिक्षा सारथी प्रेरक देशमुख के द्वारा भी बच्चों को शिक्षा देने में आगे आ कर अपनी निःस्वार्थ दिया जा रहा हैं। प्रेरक बी.ई के छात्र होने के कारण तकनीकी जानकारी में माहिर हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाने या सिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है।

प्रतिकूल परिस्थितियों को बनाया अनुकूल
आनलाइन क्लास में अधिक सफलता नहीं मिलने पर “पढ़ई तुंहर दुआर” योजना के अंतर्गत मोहल्ला क्लास के लिए गांवों के पारा मोहल्ला में जाकर स्थान चयन कर मानीटर चुने, जिससे बच्चों में मोहल्ला क्लास के प्रति रुचि उत्पन्न हुआ। कक्षा में समय का निर्धारण माॅनीटर के द्वारा बच्चों को बताने कार्य करते हैं, गांव के नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों से मिलकर मोहल्ला क्लास में सहयोग की अपील करते हैं। शिक्षा सारथी प्रेरक देशमुख का कहना है कि गांव में पढ़ाने से बहुत ही अच्छा अनुभव मिल रहा है।

आगमेन्टेड रियालटी टेक्नोलॉजी का आगाज
मोहल्ला क्लास के प्रत्येक बच्चों को उनकी इच्छानुसार विषयवस्तु पर आगमेन्टेड रियालटी से जोड़ने का कार्य 01 नवम्बर को इन्होंने किया जो कि आगाज है, परन्तु वास्तविकता का आभास कराता है। कठिन से कठिन विषय वस्तु को भी खेल -खेल में बच्चे आनंदित होकर पढ़ रहे हैं। शिक्षा सारथी प्रेरक देशमुख का कहना है कि आॅगमेन्टेड रियालटी लर्निंग से पुरानी पद्धति से रटने की प्रवृत्ति को बदलकर समझ विकसित करने हेतु कोरोना काल में नवीन टेक्नोलॉजी को जानने एवं समझने का मौका मिला है। इस नवीन टेक्नोलॉजी आॅगमेन्टेड रियालटी लर्निंग से बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है। उन्होंने यह कार्य पालकों एवं प्रबुद्ध जनों की सहयोग से शैक्षणिक कार्य कर पा रहे है। प्रेरक ने पढ़ई तुंहर दुआर के ब्लाॅग लेखक रमेश सोरी को बताया कि वे गौरवशाली है कि शाला बंद होने के कारण पढ़ाई करने वाले बच्चों को शिक्षा दे पा रहे है।

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