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संध्या राजपूत हत्याकांड- पढ़िए भालूकोन्हा में छत पर हुई हत्या के मामले में अब तक क्या बातें आई सामने?

मृतक की दो बहने हैं पुलिस में, वर्दीधारी परिवार में इस तरह हत्या से बढ़ी सरगर्मी

बालोद। ग्राम भालूकोन्हा में शुक्रवार की दरम्यानी रात को हुई संध्या राजपूत की हत्या के मामले में अब तक अर्जुंदा पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 302 का केस दर्ज किया है पर अब तक आरोपी तक नहीं पहुंच पाई है। विभिन्न तकनीकी साक्ष्यों के जरिए सुराग तलाशने की कोशिश हो रही है। तो वहीं संदेहियों पर भी नजर रखी जा रही है। कुछ स्वजनों पर भी शक की सुई लटक रही है। कॉल डिटेल सहित अन्य जानकारी जुटाई जा रही है ताकि पुलिस अंतिम कड़ी तक पहुंच सके। शुक्रवार की देर शाम को मृतक संध्या राजपूत के शव का अंतिम संस्कार मूलग्राम खुरसुनी में हुआ। जहां परिजनों ने रोते बिलखते हुए संध्या के अंतिम दर्शन किए। इस दौरान पूरा गांव उमड़ पड़ा क्योंकि संध्या राजपूत संभ्रांत व प्रतिष्ठित परिवार से थी। उनकी दो बहने पुलिस में है। खाकी के परिवार में इस तरह जघन्य हत्या की घटना से चर्चा की सरगर्मी बढ़ी हुई है। लोगों के बीच तरह तरह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसने संध्या को मौत के घाट उतारा? पति से लगभग 4 साल से विवाद के चलते वह किराए के मकान में भालूकोन्हा में अकेली रहती थी। अब सवाल यही उठता है कि आखिर अकेली रहने वाली महिला के घर किस का आना जाना था। किसके साथ उसकी दुश्मनी थी, जिसने इस तरह जघन्य अपराध किया और उसे बुरी तरह मारकर हत्या की। पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है।

जनपद के एडीओ ने लिखवाई रिपोर्ट- कहा मैंने फोन की तो उठाई नहीं, इसलिए घर पहुंचा था देखने

पुलिस थाने में आदित्य नगर दुर्ग में रहने वाले व जनपद पंचायत गुंडरदेही में पदस्थ एडीओ भुवनलाल साहू ने रिपोर्ट लिखवाई है। उनका कहना है कि मैंने संध्या को व्हाट्सएप और मोबाइल पर फोन किया था लेकिन वह उठाई नहीं थी। संदेह हुआ तो मैं उसे देखने के लिए भालूकोन्हा गया हुआ था। तो वहां छत पर उसकी लाश पड़ी थी। पुलिस प्रार्थी से भी पूछताछ की है व जो सुराग हो सके हासिल करने का प्रयास कर रही है।

प्रार्थी भुवन साहू का कहना जब संध्या के घर पहुंचा तो बाहर से दरवाजे पर लगी थी सिटकिनी

प्रार्थी के जरिए पुलिस को घटनास्थल के कुछ साक्ष्य भी मिले हैं। उनका कहना है कि 29 जुलाई को 11:30 बजे सुबह जब संध्या राजपूत के मकान भालूकोन्हा आया था। संध्या राजपूत के मकान के बाहर के दरवाजा की सिटकिनी लगा हुआ था। जिसे खोलकर मैं घर अंदर प्रवेश किया तो कमरा किचन रूम खुला हुआ था। संध्या राजपूत कमरे में नहीं थी। तब मैं घर के छत के ऊपर जाकर देखा तो छत के ऊपर शव जैसा कुछ
पड़ा था। जिसके ऊपर पीला चादर ढका था। पास जाकर देखा तो चादर में खून लगा हुआ था। शव के आसपास खून के गहरे निशान थे। चादर के बाहर शव के दोनों हाथ पंजे दिख रहे थे ।जिसे पहचानता हूं। वह संध्या राजपूत के थे। इसके बाद मैंने मोबाइल से पुलिस को सूचना दी। फॉरेंसिक टीम और पुलिस आने के बाद आगे की कार्रवाई की गई। चादर उठा कर देखे तो शव संध्या का ही था। अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से उसे चोट पहुंचाकर मार डाला था। प्रार्थी के इस बयान के अनुसार उनके पहले भी यहां कोई और आ चुका था। जिसने शव के ऊपर चादर ढका था। पुलिस व फॉरेंसिक टीम अब तक की जांच में घटना का समय 28 जुलाई के रात्रि 11:30 बजे से लेकर 29 जुलाई के सुबह 11:30 बजे के मध्य मान रही है।

पति विजय क्षत्रिय से विवाद के बाद थी अलग, पति रेप केस में जा चुका जेल

बता दें कि मृतक संध्या राजपूत के पति आमापारा बालोद के रहने वाले विजय क्षत्रिय दुष्कर्म (गैंगरेप) के आरोप में जेल जा चुके हैं। तो वही उन पर फर्जी डिग्री के जरिए डॉक्टरी करने का आरोप भी लगा है। उनके खिलाफ इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी कार्रवाई की गई थी। पति से विवाद के चलते वह उनसे अलग रह रही थी और तलाक का प्रकरण भी चल रहा था। हालांकि पुलिस अभी सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। हत्या के तार कहीं परिवार से भी तो नहीं जुड़े हैं इस दिशा में भी सबूत साक्ष्य देखे जा रहे हैं। तो कहीं और किसी से संध्या की कोई दुश्मनी या और कोई कारण तो नहीं है इसकी भी पतासाजी की जा रही है।

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