देखिए अगला कदम,रेंगाडबरी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा खुलवाने 7 पंचायत के 16 गांव के ग्रामीण हुए एकजुट, धरना अब भी जारी,,,,



भंवरमरा बैंक प्रबंधन को सौंपा गया ज्ञापन सहित फाइल

बालोद। विगत दिनों रेंगाडबरी के ग्रामीणों द्वारा गांव में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खुलवाने सहित तीन मांगों को लेकर विधानसभा घेरने के लिए रैली निकाली गई थी। जिसे अधिकारियों द्वारा समझाइश देकर गांव वापस से भेजा गया था कि उनके गांव में बैंक खोलने सर्वे होगा। तो वहीं अन्य मांगे भी पूरी होगी ।लेकिन अब तक ग्रामीण अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटे हैं। और लगातार गांव में धरना प्रदर्शन जारी है। इस क्रम में रेंगाडबरी के ग्रामीणों को जायज की मांगों को जायज बताते हुए आसपास के अन्य पंचायत के लोग भी एकजुट हो गए हैं। बुधवार को 7 पंचायतों के लोगों ने एकजुट होकर भंवरमरा के जिला सहकारी बैंक की शाखा प्रमुख को सर्वे से संबंधित फाइल और ज्ञापन सौंपा और रेंगाडबरी में बैंक खोलने की मांग की। इन 7 पंचायतों के अंतर्गत कुल 16 गांव के किसान शामिल होंगे जो रेंगा डबरी में प्रस्तावित बैंक से जुड़ेंगे। वहां के पंचायतों के सरपंच सहित प्रमुख लोगों ने भंवरमरा बैंक जाकर प्रस्ताव सौंपा ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू हो सके।

बैंक खोलने को लेकर इन पंचायतों ने दी है सहमति

रेंगाडबरी में बैंक खोलने को लेकर ग्राम पंचायत चिलमगोटा, खैरकट्टा, भीमपुरी , बंजारी, भीमा टोला, जूनापानी, रेंगाडबरी पंचायत ने सहमति दी है। भंवरमरा बैंक प्रबंधन को फाइल सौंपने के लिए रेंगाडबरी के सरपंच इंद्रपाल तुमरेकी, उपसरपंच चंद्र प्रकाश सोनी, जनपद सदस्य हेमकुमार रावटे, विधायक प्रतिनिधि थान सिंह रावटे, ताराचंद निषाद, पंच निरंजन, रेंगाडबरीके सोसायटी अध्यक्ष सियाराम साहू सहित अन्य पहुंचे हुए थे।

ग्रामीण आज भी बैठे हैं धरने पर

ग्रामीण आज भी अपनी मांगों को लेकर गांव में धरना दे रहे हैं। अधिकारी उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं कि जब सर्वे शुरू हो गया है तो धरना समाप्त कर दो लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बैंक खुल नहीं जाता हम धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि हमारी मांगों को अनदेखा किया गया तो आगे चलकर चक्का जाम और भूख हड़ताल की नौबत भी आ सकती है। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा मंत्री अनिला भेड़िया के आगमन का इंतजार किया जा रहा है। 29 जुलाई शुक्रवार को उनके आगमन की संभावना है। जिसे देखते हुए ग्रामीण धरने पर डटे हुए हैं और उस दिन भी सारे कामकाज बंद कर भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। अगर भूख हड़ताल से भी बैंक से संबंधित बात नहीं बनी तो आमरण अनशन की बात भी कही गई है।

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