मनरेगा कर्मचारी 4 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, पढ़िए वजह?



बालोद। छत्तीसगढ़ राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजनांतर्गत कार्यरत अधिकारी / कर्मचारी एवं ग्राम रोजगार सहायकों के द्वारा विगत 16 वर्षो से निरंतर कार्य किये जा रहे है। साथ ही समय-समय पर विभिन्न माध्यमों से मनरेगा कर्मियों की निरंतर नियमितीकरण सहित अन्य मांगे रही है, किन्तु शासन द्वारा उनकी मांगो पर आज पर्यन्त तक कोई विचार नहीं किया गया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले 14 मार्च.2022 सोमवार को जिला स्तरीय एक दिवसीय धरना प्रदर्शन एवं रैली आयोजित किया गया था। साथ ही शासन एवं प्रशासन को विभिन्न पत्रों के माध्यम से मिलने का समय मांगा गया था, किन्तु शासन एवं प्रशासन के द्वारा समय नहीं दिया गया और न ही उनकी मांगों का निराकरण किया गया। जिसके कारण विवश होकर “छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले” 4 अप्रैल, सोमवार से छत्तीसगढ़ प्रदेश के समस्त 28 जिलों के सभी मनरेगा कर्मी अनिश्चित कालीन धरना में जा रहे, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन की होगी। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ की 02 सूत्रीय मांग है। जिसमें चुनावी जन घोषणा पत्र को आत्मसात करते हुए समस्त मनरेगा कर्मियों का नियमितीकरण किया जाए।. नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक ग्राम रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण करते हुए समस्त मनरेगा कर्मियों पर सिविल सेवा नियम 1966 के साथ पंचायत कर्मी नियमावली लागू किया जाए। प्रांतीय आह्वान पर बालोद जिले के मनरेगा कर्मचारी भी हड़ताल पर रहेंगे। इससे पंचायतों में मनरेगा के कामकाज भी प्रभावित होंगे।

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