EXCLUSIVE- कच्ची और देसी शराब से हो सकती है छत्तीसगढ़ में शराबबंदी की शुरुआत, इस बैठक से मिला संकेत, पढ़िए पूरी खबर,,



बलरामपुर में अध्ययन के लिए जाएगी दल, अन्य राज्यों का भी दौरा जल्द

अध्ययन दल में बालोद जिले से शामिल हुई पद्मश्री शमशाद बेगम ने भी रखी अपना सुझाव, नशा मुक्ति और जागरूकता का पाठ्यक्रम स्कूल में शामिल करने की भी मांग

बालोद/ रायपुर। कांग्रेस द्वारा घोषित शराबबंदी को जल्द अमल में लाया जा सकता है। शराबबंदी के लिए बनाए गए अध्ययन दल की दूसरी बैठक रायपुर के आबकारी विभाग के प्रमुख कार्यालय में हुई। जहां विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस बैठक में बालोद जिले से पद्मश्री शमशाद बेगम भी शामिल हुई। उन्होंने कई सुझाव रखे। बैठक में एक संकेत निकल कर यह आई कि छत्तीसगढ़ में शराबबंदी की शुरुआत कच्ची और देसी शराब के जरिए हो सकती है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि बैठक में आबकारी विभाग के अफसरों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इस तरह से शुरुआत करके देखा गया है। वहां कच्ची शराब बनाने पर पाबंदी है तो कई जगह देसी शराब दुकान भी बंद कराई गई है। सिर्फ अंग्रेजी शराब दुकान चलती है। लेकिन चूंकि अंग्रेजी शराब महंगी होती है इस वजह से इसकी बिक्री में भी गिरावट दर्ज की गई है। लोग ज्यादा खरीदते नहीं है। इस तरह से वहां कुछ हद तक शराब बिक्री में कमी आई है तो वहीं माहौल भी बदला है। शराबबंदी के लिए बनी अध्ययन दल सबसे पहले बलरामपुर जिले का अध्यन करने के लिए जाएगी। इसके बाद अन्य राज्यों का भी रुख करेगी। जहां पर शराब बंदी लागू है जिनमें गुजरात और बिहार शामिल है। बैठक में शामिल बालोद जिले से पद्मश्री शमशाद बेगम ने यह सुझाव रखा कि बच्चों और युवाओं में बढ़ते नशे की लत को देखते हुए नशा से संबंधित जागरूकता पाठ्यक्रम को स्कूल में लागू किया जाए। आज शराब ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे बच्चे और युवा नशीली गोलियों के गिरफ्त में भी है। जिससे भावी पीढ़ी खतरे में है और इसका हल अभी निकालना जरूरी है। तो वहीं उन्होंने बालोद सहित विभिन्न जिलों में नशा मुक्ति सहित अन्य समाज सेवा के कार्य में जुटी महिला कमांडो द्वारा भी शराबबंदी के लिए जागरूकता अभियान चलाने में सहयोग करने की बात कही। अध्ययन दल की इस बैठक में तय हुआ है कि बहुत जल्द बलरामपुर जिले में जाकर वहां की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद दूसरे राज्यों में भी अध्ययन दल जाएगी। कोरोना काल की वजह से अध्ययन दल की कार्यवाही रुकी हुई है। जिसमें अब तेजी आने की उम्मीद है। यह तो लगभग तय माना जा रहा है कि बलरामपुर जिले की तर्ज पर अन्य जिलों में भी एक-एक करके देसी शराब दुकानों को बंद किया जा सकता है। साथ ही कच्ची शराब यानी महुआ शराब के बनाने पर भी धीरे-धीरे पाबंदी लगाई जाएगी।

राजनीतिक और सामाजिक समिति के सदस्यों के साथ शराबबंदी वाले राज्यों का अध्ययन करेंगे

राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू किए जाने के संबंध में अनुशंसा हेतु आबकारी विभाग के सचिव निरंजन दास की अध्यक्षता में राज्य सरकार द्वारा गठित प्रशासकीय समिति की द्वितीय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक सोमवार को आबकारी आयुक्त कार्यालय नवा रायपुर में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रशासनिक समिति के सदस्यों ने विचार-विमर्श के पश्चात् राज्य में पूर्ण शराबबंदी किए जाने के संबंध में राजनीतिक और सामाजिक समिति के सदस्यों के साथ शराबबंदी वाले राज्यों का अध्ययन करने का निर्णय लिया गया। बैठक में सदस्यों ने अपने-अपने सुझाव दिए। सदस्यों ने कहा कि राज्य में शराबबंदी होने के फलस्वरूप शराब के लत व्यक्तियों के पुनर्वास, उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति में होने वाले परिवर्तन के लिए कार्यशाला आयोजित करने, काउंसिलिंग सेंटर-नशामुक्ति केन्द्रों की स्थापना आदि पर भी चर्चा की गई। बैठक में सदस्यों ने बच्चों को बाल्यकाल से ही नशे से दूर रखने प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करने पर बल दिया। सदस्यों ने यह भी कहा कि नशामुक्ति अभियान में राज्य की इन्फोर्समेंट एजेंसियों का सहयोग लिया जाना चाहिए। नशामुक्ति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं को वित्त पोषण दिया जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वसहायता समूहों तथा महिला कमांडो के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। सदस्यों ने कहा कि नशामुक्ति के प्रति जागरूकता के लिए सिनेमाघरों में शॉर्ट फिल्म के माध्यम से जागरूकता मुहिम चलाया जाए। अवैध मदिरा पर कड़ाई से रोकथाम करने के भी सुझाव दिए गए।
बैठक में प्रशासनिक समिति के सदस्य सचिव ए.पी. त्रिपाठी, सदस्यगण पदमश्री श्रीमती फुलबासन बाई यादव, पद्मश्री शमशाद बेगम, नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्य कर रहे सुश्री मनीषा शर्मा, अजय कुमार, आबकारी उपायुक्त राकेश मण्डावी, आर.एस. ठाकुर, प्रशानिक, राजनीतिक एवं सामाजिक समिति के नोडल अधिकारी राजीव झा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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