लगभग 7,43,000 लाभान्वितों को 150 करोड़ (1.5 अरब) की सहायता उपकरण प्रतिपूर्ति अनुदान आदि का वितरण
बिलासपुर/रायपुर/बालोद । छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा कोरोना वायरस (कोविड 19) के कारण लंबे समय से शासन की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे आम नागरिकों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन की मदद से आज राज्य स्तरीय ई-मेगा विधिक सेवा कैम्प का आयोजन प्रदेश के सभी जिलों में किया गया। जिसमें प्रदेश के 23 सिविल जिले तथा 64 तहसीलों को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से जोड़ा गया था। शिविर का शुभारंभ माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा, न्यायाधीश, छ.ग. उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, छ.ग.राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं माननीय न्यायमूर्ति मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव, न्यायाधीश, छ.ग. उच्च न्यायालय की अध्यक्षता तथा माननीय न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी, न्यायाधीश, छ.ग. उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की विशिष्ट आतिथ्य में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मीटिंग हाल में किया गया।

शूभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा, न्यायाधीष छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि आज के कोरोना महाकारी के दौर में डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से आमजन तक न्याय सब तक पहुँचाने के क्रम में यह ई-मेगा विधिक सेवा कैम्प एक अभिनय प्रयास है। कोविड-19 के कारण विधिक साक्षरता की गतिविधियों ई-प्लेटफार्म से की जा रही है क्योंकि हमारे मेगा कैम्प पिछले 8-10 माह से नहीं हो पा रहे थे।

उन्होंने कहा कि पिछली बार ई-लोक अदालत का आयोजन किया गया था, जिसमें अच्छी सफलता प्राप्त हुई। आज ई-मेगा कैम्प का आयेाजन सभी जिलों में एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं, यह एक नई पहल है। वर्तमान में बदली हुई परिस्थितियों में हमें पुनः विकास के कार्य करने है। हमारे संविधान की यह खूबी है कि जब जब विकट परिस्थतियां निर्मित होती है हम सब साथ कंधे से कंधा मिलकर उससे निपटते है। हम समाज के आखिरी छोर में खड़े व्यक्ति को उसके अधिकारों से अवगत कराए और उनके अधिकारों को दिलाने मेें उनकी मदद करें। आज किसी को कानूनी रूप से जो न्याय मिलना चाहिए, वह नहीं मिलता है तो उसके लिए न्याय की यही परिभाषा है कि उसको समुचित अधिकार और न्याय मिल, जिसके साथ अन्याय हुआ है। वर्तमान कोविड 19 की विषम परिस्थितियों में सरकार अपना कार्य कर रही है, लेकिन हम सब को मालूम है कि राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारी है, वे अपना खुद का काम करने के साथ साथ कोविड संबंधी मामलों में कोविड से बचाव कैसे करें, इसको लेकर ज्यादा केन्द्रित है, अन्य कामों की अपेक्षा।

इस कैम्प के अंतर्गत शासन की योजनाओं को गरीब जनता तक पहुंचाना है और हमारे पैरालीगल वाॅलिंटियर्स जमीनी स्तर पर जाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाये है और शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताए हैं। शासन की जो विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं हैं, उनमें से कुछ योजनाओं के तहत लाभार्थियों को प्रदाय की जाने वाली सामग्रियों का वितरण इस कैम्प के माध्यम से किया जावेगा। इस हेतु शासन के द्वारा पूर्ण सहयोग किया जा रहा है। ई-मेगा कैम्प के माध्यम से शासन की योजनाओं को गरीब लोगों तक पहुंचाने का का प्रयास जारी रहेगा और यह पूरे नवंबर माह तक चलेगा, पीएलव्ही इसके लिये चिन्हांकित करने का कार्य भी करेंगे। जरूरतमंद लोग हेल्पलाईन नंबर 15100 पर भी अपनी समस्याएं बता सकते हैं।
सद्भावना विधिक जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ
छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विधिक जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत यू-ट्यूब चैनल ’’जन चेतना’’ तैयार किया गया है। जिसमें न्यायाधीशों के द्वारा आम जनता को विभिन्न कानूनों के संबंध में जानकारी दी जाती है, परन्तु समाज के मूक एवं बधिर निःशक्त बंधु उक्त जानकारी प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं इसको ध्यान में रखते हुए ’’सद्भावना विधिक जागरूकता कार्यक्रम’’ आज से प्रारंभ किया गया है। आज के इस कार्यक्रम में ’’सद्भावना’’ पहले एपिसोड को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजनांदगांव द्वारा समाज कल्याण विभाग के सहयोग से तैयार करवाया गया है जिसमें कोविड-19 महामारी के संबंध में जानकारी दी गयी है। यह प्रयास देश में अपने तरह का प्रथम प्रयास है। जिसके माध्यम से कानूनी जानकारियों से वंचित एक बड़े समूह को इसका लाभ प्राप्त होने की संभावना है।

शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव, न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, कम्प्यूटराईजेशन कमेटी, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कहा कि आज ई-मेगा कैम्प के शुभारंभ साथ एक और अन्य सद्भावना सीरिज का भी प्रारंभ किया गया है। वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी गतिविधि हमारे लिये एक बड़ी चुनौती से लड़ने के लिये तैयार करने का है। सबकों मालूम है कि किन परिस्थतियों में, किन मुश्किलों में, महामारी के खतरें में आज हम सब जी रहे हैं। परन्तु इस विकट स्थिति में पब्लिक सरवेंट जनसेवा से जुड़े कार्यो को कर रहे हैं और आज की कठिन परिस्थतियों में ये जनसेवक देश की सारी जनता को न्याय उन तक पहुंचे, इसके लिये प्रयासरत हैं और इसी को आगे बढ़ाने के लिये नये-नये तरीके आविष्कार करने के लिए आप लोगों से जुड़े हुए हैं।

सालसा एवं जिला प्राधिकरण का गठन होने के उपरांत इसका मूल उद्देश्य ‘‘सबके लिये न्याय’’ हम जहां न्याय की बात करते हैं तो सिर्फ कोर्ट में पक्षकार को न्याय दिलाना नहीं है। यह न्याय की परिभाषा नहीं है, संविधान के मूल उद्देश्य की ओर जाये तो आर्थिक और सामाजिक न्याय लोगों तक पहुंचाना ही न्याय की मूल भावना को संपोषित करना होगा। इसके लिये सालसा नई नई योजनाएं बनाता है और इन सेवा योजनाओं को क्रियान्वित किया जाता है। नई योजनाएं बनाकर उसे क्रियान्वित करना एक चैलेंज होता है और यह एक अकेले व्यक्ति से नहीं हो सकता, इसके लिये सामूहिक प्रयास, एक आंदोलन की आवश्यकता पड़ती है, जिसे पूरा करने का प्रयास यह कैम्प है। वर्तमान परिस्थति में एक साथ इक्कठा होना मुश्किल है, पर इसे डिजिटल प्लेटफार्म के जरिये ई-मेगा कैम्प से इसे करने का प्रयास किया जा रहा है। इस मेगा कैम्प का लाभ अवश्य आम जन को मिलेगा। शासन द्वारा सिर्फ स्कीम बनाना ही पर्याप्त नहीं है लेकिन इसे जनआंदोलन के रूप में क्रियान्वित कर आम जन तक पहुंचाने में हमारे जो सालसा एवं विधिक संस्थान है, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लोगों को यह बताना जरूरी है कि केन्द्र और राज्य कीे कौन कौन सी कल्याणकारी योजनाएं है।

उक्त कैम्प के शुभारंभ अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में माननीय न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी, न्यायाधीश, छ.ग. उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति कहा कि वर्तमान कोविड महामारी संक्रमण काल में जब सभी लोगों के सामान्य कार्य प्रभावित हैं, लोगों से संबंधित सेवाएं एवं अन्य सामान्य कामकाज लगभग बंद हैं, ऐसी परिस्थिति में जो आज यह शिविर का आयोजन हो रहा है, इससे निश्चित रूप से आमजन को लाभ मिल सकेगा। इस विकट समय पर लोगों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने का जो विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कैम्प का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति को लाभ मिल सके, यही इस ई-मेगा कैम्प का उद्देश्य है। शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं हैं जिनके बारे में लोगों को मालूम नहीं होता है, इसे ही उन तक पहुंचाना ही इस शिविर का उद्देश्य है। इस ई- मेगा कैम्प के जरिये हम सब एक प्लेटफार्म पर आये हैं, जिसमें शासन एवं विधिक सेवा संस्थान की योजनाओं की जानकारी दी जावेगी।

उपरोक्त शुभारंभ समारोह के प्रारंभ में स्वागत भाषण छ.ग. उच्च न्यायालय के इंचार्ज रजिस्ट्रार जनरल दीपक कुमार तिवारी एवं अंत में धन्यवाद ज्ञापन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव सिद्धार्थ अग्रवाल के द्वारा दिया गया। उक्त शुभारंभ समारोह में न्यायिक एकाडेमी के निदेशक के.एल चरियाणी एवं अन्य अधिकारीगण, रजिस्ट्री न्यायिक अधिकारीगण, महाधिवक्ता सतीषचन्द्र वर्मा, उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष, सचिव उपस्थित रहें। इसके अलावा उपरोक्त शुभारंभ समारोह में लाईव डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से नालसा के सदस्य सचिव अशोक कुमार जैन, डायरेक्टर सुनील चौहान, समस्त जिलों के न्यायिक अधिकारीगण, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं शासन के प्रतिभागी विभागों के प्रतिनिधिगण जुड़े रहें। सदस्य सचिव सिद्धार्थ अग्रवाल ने बताया है कि आज आयोजित हुए इस ई-मेगा विधिक कैम्प में लगभग 7-8 माह से शासन के कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित लोगों को जिला मुख्यालयों एवं तहसीलों से संपर्क कर मिलने वाले उपकरण, छात्रवृत्ति, अनुदान, क्षतिपूर्ति राशि आदि प्राप्त किये जिसकी प्राप्ति के लिए प्रतीक्षारत थे। अब तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश भर में 7 लाख 43 हजार 583 व्यक्ति इस शिविर के माध्यम से लाभान्वित हो चुके हैं। जबकि शासन द्वारा इन व्यक्तियों पर लगभग डेढ़ अरब रूपये अनुदान उपकरण, छात्रवृत्ति, प्रतिपूर्ति आदि के रूप में उपलब्ध कराये है। विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पीड़ित महिलाओं को लगभग डेढ़ करोड़ रूपये क्षतिपूर्ति का भुगतान किया गया है। यह जानकारी शशांक शेखर दुबे, विधिक सहायता अधिकारी द्वारा दिया गया।
