बालोद/छत्तीसगढ़। बेटियां किसी से कम नहीं , वे आज हर मुकाम छू रही है। जब बात होगी रामलीला की तो इसमें भी वे पीछे नहीं। आज हम छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ऐसे गांव की कहानी बता रहे हैं जो रोचक है। यहां गांव की बेटियां ही रामलीला की बागडोर संभालती है।

सबसे अच्छी बात जुड़वा बहने राम लक्ष्मण का किरदार निभाती है। राम लक्ष्मण की जोड़ी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। मंगलवार की रात को जब गांव में दशहरा के साथ इन बेटियों की लोगों ने रामलीला देखी तो रातो रात में यह बेटियां चर्चा में आ गई।

पढ़िए कहानी विस्तार से, दीपक यादव( 9755235270) संपादक की कलम से,,,,,
ग्राम परसवानी (अर्जुन्दा) में पहली बार बेटियों की रामलीला की प्रस्तुति हुई। गांव की कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं व कॉलेज तक पढ़ने वाली छात्राओं ने यहां रामलीला के सभी पात्रों में अभिनय किया। जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ भी जुटी। पहली बार यहां बेटियों की रामलीला हुई। सिर्फ वाद्य यंत्रों का जिम्मा पुरुषों ने संभाला। बाकी सभी अभिनय लड़कियों ने की।

रामलीला मंडली के निर्देशक नूतन ठाकुर ने बताया कि वे गांव में कई साल से रामलीला मंडली का संचालन कर रहे हैं। पहले वे स्वयं रामधुनी के भी कलाकार व निर्देशक थे। लेकिन विगत 4 साल से पुरुष पात्रों द्वारा रुचि ना लिए जाने व रामलीला के प्रति मोहभंग होने के चलते आयोजन नहीं हो पा रहा था। जिसे देखते हुए उनके मन में विचार आया कि क्यों ना लड़कियों से रामलीला करवाई जाए। उसके लिए गांव की ही एक बाल गायिका खिलेश्वरी यदु से संपर्क किए।

उन्होंने भी इच्छा जताई कि हम सहेलियों के साथ मिलकर रामलीला की शुरुआत करेंगे। देखते- देखते कई सहेलियां तैयार हो गई और फिर रिहर्सल शुरू हुआ। चंद दिनों की अच्छी खासी तैयारी के साथ इनकी मंडली मंगलवार की रात को मंच पर आ ही गई और पहली प्रस्तुति में ही खूब तालियां बटोरी। अभिनय देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। क्योंकि यह पहला अवसर था जब पहली बार इस गांव में इस तरह बेटियों ने रामलीला की बागडोर संभाली।

जुड़वा बहने हैं राम- लक्ष्मण के किरदार में
इस रामलीला मंडली की खासियत है कि एक ही घर के दो- दो, तीन-तीन बहने इसमें अभिनय करती हैं। राम और लक्ष्मण का किरदार जुड़वा बहन राम नीलम मंडावी और लक्ष्मण रितु मंडावी निभाती हैं। रावण का किरदार सोनी यदु ने बखूबी निभाया तो मेघनाथ अंजलि यदु ने ।इसके अलावा अन्य पात्रों में विभीषण गीतांजलि यादव, भरत महिमा देशमुख, अंगद निकिता यादव, हनुमान ज्योति मंडावी, सीता मोनिका मानिकपुरी, नल दीप्ति ठाकुर, नील चंद्रिका खरे, जामवंत प्रीती खरे, सुषैण पुष्पेंद्र यदु, कालनेमि नोमेंश्वरी देवानंद, कुंभकरण प्रियंका मानिकपुरी तो निशाचर की वंदना यादव नीलम खरे ने भूमिका निभाई।

बेटियों को आगे बढ़ाने की अनूठी पहल
मंडली से जुड़े गायक अवध राम यदु ने बताया कि इस तरह से रामलीला मंडली में सभी पात्रों को लड़कियों से अभिनय करवा कर हम बेटियों को आगे बढ़ाने का एक छोटा सा प्रयास भी कर रहे हैं। ताकि समाज मे बेटी बेटा में फर्क दूर हो। आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं तो रामलीला में पीछे क्यों रहे। रामलीला में सीता हरण, रावण वध की प्रस्तुति के साथ बेटियों के द्वारा ही बनाई गई रावण के पुतले का दहन भी गांव में किया गया।

टूटने नहीं दी परंपरा
4 साल से गांव में रामलीला का आयोजन नहीं हो पा रहा था। पुरुष पात्र इसमें रुचि नहीं दिखा रहे थे तो परंपरा टूटने की कगार पर थी। लेकिन यहां की लड़कियों ने इस परंपरा को टूटने से बचा लिया। लड़कियों ने कहा कि वे आगे भी इस तरह अभिनय करती रहेंगी । मंडली को टूटने नही देंगे।

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