बालोद । शिक्षक कला एवं साहित्य अकादमी बालोद द्वारा कोरोना संक्रमण से जागरूकता हेतु छत्तीसगढ़ी गीत संगीत का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। अकादमी अध्यक्ष अरूण कुमार साहू ने आमंत्रित गीतकार एवं कलाकारों का स्वागत सम्मान करते हुए कहा कि कोरोना का संक्रमण त्यौहार के सीजन में तथा शीतकाल में प्रदूषण के खतरे के कारण बढ़ने की आशंका रहती है। इन प्रतिकूल हालातों में लोगों की सतर्कता एवं जागरूकता बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार लोकगायक सीताराम साहू श्याम ने कहा कि कोरोना के संक्रमण को दुबारा बढ़ने से रोकने के लिए मास्क लगाने, शारीरिक दूरी का पालन एवं हाथ धोने के नियम को नियमित रुप से करना ही सोशल वैक्सीन है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जगदीश देशमुख प्रधान संपादक ने कहा कि कोविड महामारी के खिलाफ लोगों को जागरूक होने की सख्ती से ही मास्क पहनने की आदत डाली जा सकती है। अकादमी के प्रांतीय संयोजक डॉ शिवनारायण देवांगन ने कोरोना विशेष आनलाइन कार्यक्रम को जनचेतना का अच्छा प्रयोग निरुपित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कमला वर्मा ने कोरोना प्रार्थना की प्रस्तुति देते हुए विपदा के अंत में खुशहाली की कामना की। चित्रमाला राठी ने राजगीत अरपा पैरी के धार की प्रस्तुति दी। संगीतकार सोहन साहू ने ददरिया के बदलते लोक स्वरूप को कोरोना से सावधानी में पिरोकर प्रस्तुत किया।
गीतकार शिवकुमार अंगारे ने अपनी रचना के माध्यम से संक्रमण को रोककर आने वाले सुखद भविष्य की सुंदर कल्पना प्रस्तुत की। आकाशवाणी गायक रमेश यादव ने अपने चिर परिचित शैली में लोकगीतों में कोरोना ददरिया की विशेष प्रस्तुति दी।

हर्षा देवांगन ने कोरोना से बचने के लिए घर को सुरक्षा घेरा बनाकर गीत में प्रस्तुत किया। गायत्री साहू ने घर के अंदर बाहर मास्क लगाकर परिवार के बच्चे बुजुर्ग की देखभाल करने की समझाइश देते हुए गीत प्रस्तुत किया।धर्मेन्द्र कुमार श्रवण ने विभिन्न लोकगीतों में राऊत, बिहाव, जंवारा के माध्यम से कोरोना के प्रति जागरूकता को जन सामान्य तक सहज रूप से पहुंचाया।

कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए संस्कृतिकर्मी पुसन साहू ने कहा कि शिक्षकों की कला प्रतिभा को सामाजिक चेतना की रचनात्मक दिशा में ले जाकर कोरोना के इस जंग में एकजुट होकर वैचारिक शक्ति से विजय हासिल करेंगे। कार्यक्रम की अकादमी के शिक्षक सदस्यों ने सराहना की.

