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शिक्षा के अधिकार का कानून बना मजाक, 3 साल से निजी स्कूलों को जारी नही हुआ फंड, जनपद सदस्य संजय बैस ने उठाई आवाज

बालोद/कुसुमकसा । राज्य शासन से शिक्षा के अधिकार के तहत 25 प्रतिशत गरीबी रेखा के तहत बच्चों को निःशुल्क प्रवेश दिया गया था, लेकिन आज पर्यन्त तक पिछले तीन साल का लाखों रूपए बकाया है, जिसे जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों के खाते में बकाया राशि शीघ्र डालने की मांग जनपद सदस्य एवं प्रगति पथ एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष संजय बैस द्वारा किया गया है।

इस वर्ष स्कूल नही खुलने से बच्चों की पढ़ाई में असर तो हुआ है, पर प्राइवेट स्कूल के शिक्षक भी आर्थिक मार झेलने पर भी मजबूर है और इनके समस्या को सुनने वाला भी कोई नही है। शाला प्रबन्धक भी स्कूल नहीं खुलने से मजबूर है। जब बच्चे स्कूल नही आ रहे है, तो फीस की राशि भी नही आ रही है। ऐसे में हम अपने शिक्षकों को वेतन कब तक और कैसे दे।

जनपद सदस्य एवं प्रगति पथ एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष संजय बैस ने सरकार के ऊपर आरोप लगाया कि अपने वाहवाही बटोरने के लिये शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दबावपूर्वक एडमिशन कराए, लेकिन आज 3 वर्षो से एक रुपये भी स्कूलों को नही मिला। अगर यह पैसा अभी मिल जाता है, तो जो दयनीय स्तिथि निजी स्कूलों की है, वह सुधर जाती। प्राइवेट स्कूल के शिक्षक शिक्षक राष्ट निर्माता होने का फर्ज आज भी निभा रहे है। बच्चों की फीस नहीं आने पर भी आनलाइन क्लासेस ले रहे है। हमें अपने शिक्षकों पर गर्व है। जनपद सदस्य संजय बैस ने राज्य सरकार से शीघ्र ही प्राइवेट स्कूलों को बकाया राशि डालने की मांग की है

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