DAILY BALOD NEWS

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वैक्सीन पहुंची कम, लोग पहुंच गए ज्यादा, वैक्सीन का स्टॉक हुआ खत्म ,हो गया हंगामा

वैक्सीन खत्म होने पर वापस जाती टीम

बालोद

एक तरफ जहां सरकार कह रही है कि लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए सामने आना चाहिए। इसमें पीछे बिल्कुल नहीं रहना चाहिए पर इसके ठीक उलट सरकारी व्यवस्था टीकाकरण को लेकर नाकाम नाकाम नजर आ रही है। इसका एक बड़ा उदाहरण बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के गुजरा पंचायत में सामने आया।जहां पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीकाकरण शिविर लगाया गया था। पर जहां एक ओर लोग पहले टीका लगवाने के लिए आते नहीं थे तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें जागरूक करने के लिए प्रयास किया था। लेकिन जब लोग जागरूक हो रहे हैं और टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं तो उस मुताबिक वहां टीका ही उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गुजरा में यही स्थिति रही। मुश्किल से 200 लोगों को टीका लग पाया। स्वास्थ विभाग का कहना था कि हमारे पास 200 वैक्सीन ही प्राप्त हुई थी। ऐसे में फिर इससे कहीं ज्यादा लोग जो वहां टीका लगाने के लिए पहुंचे थे। उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। कुछ तो देर तक इंतजार करते रहे कि विभाग व्यवस्था कर लेगी लेकिन कुछ ना हो सका तो फिर लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी खुद को मजबूर बता कर वहां से चले गए पर ग्रामीण है कि शिविर स्थल पर डटे रहे और नाराजगी जताते रहे। दरअसल में इस गांव में सहित आसपास गांव के लोगों को टीकाकरण के लिए बुलाया गया था। इसके लिए बकायदा मुनादी भी कर दी गई थी कि इस जगह पर जाना है। क्योंकि वैक्सीन की बहुत दिक्कत आ रही है। वैक्सीन की कमी है वैक्सीन का स्टाक चंद दिनों में ही खत्म हो जा रहा है। इसलिए ग्रामीणों को भी जैसे ही सूचना मिलती है कि वैक्सीन आ गया है तो वे झट से उन केंद्रों में पहुंच जाते हैं। पर जितनी भीड़ वहां आती है उतना वैक्सीन ही नहीं रह पाता। ऐसे में कई लोग वैक्सीन लगवाने से छूट जाते हैं उन्हें दोबारा आना पड़ता है। दोबारा वैक्सीन कब आएगी इसका भी कोई ठिकाना नहीं रहता है। नतीजा हालात भी बिगड़ने लगे हैं और इसी के चलते अव्यवस्था का आलम गुजरा पंचायत में सामने आया।

लोग भी दिखे लापरवाह

एक तरफ जहां लोग वैक्सीन लगवा कर खुद की जागरूकता का परिचय भी दे रहे थे तो दूसरी ओर बिना मास्क पहने भीड़ जुटाकर लापरवाही ही दिखा रहे थे। जो कि अनुचित था। एक तरफ लोग कोरोना से बचने के लिए टीका लगवाने के लिए पहुंचे थे तो दूसरी ओर वही लोग भीड़ में बैठकर प्रदर्शन कर कोरोना को बढ़ावा भी दे रहे थे। सोशल मीडिया में इसकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं जो बता रही है कि किस हद तक वहां भीड़ जुटी थी और कैसे वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने पर स्टाफ को वहां से खिसकना पड़ा। क्योंकि भीड़ उन पर हावी हो रही थी। लोग नाराज हो रहे थे कि जब वैक्सीन ही नहीं आई है पर्याप्त, तो हमें क्यों बुलाते हो। मुनादी क्यों करवाते हो।

दरअसल में 200 वैक्सीन के बदले यहां पर 800 से ज्यादा लोग पहुंच गए थे। आसपास के ग्रामीण जो वैक्सीनेशन को लेकर अब जागरूक हुए हैं पर उन्हें वैक्सीन ही नहीं लग पा रहा है। इससे ग्रामीण निराश हुए और नाराज हो कर चले गए।

स्थिति अब हो रही है उलट

एक वक्त था जब वैक्सीन की शुरुआत की गई तो लोग कई तरह की अफवाहों के चलते वैक्सीन लगवाने से घबराने लगे थे। लोग इससे बचने लगे थे वैक्सीन की पूरी डोज अस्पतालों में खत्म नहीं हो पाती थी। स्वास्थ्य विभाग लोगों को तलाश तलाश कर वैक्सीन लगाता था। लोग हैं कि सामने नहीं आते थे लेकिन अब स्थिति परिवर्तित हो गई है। लोगों में धीरे-धीरे वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता आ रही है। लोग अब स्वेच्छिक वैक्सीन लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। लोग कतार लगा रहे हैं कि हमारा नंबर कब आएगा। पहले से ही सब रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। अब ऐसी स्थिति में सरकार को भी चाहिए कि वह वैक्सीन का पर्याप्त इंतजाम करें। यह तो जगजाहिर है कि राज्य, केंद्र पर निर्भर है। इसलिए पहली जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है कि वह सभी राज्य में पर्याप्त वैक्सीन का स्टाक भेजें ताकि समय पर जिला छत्तीसगढ़ सहित पूरा भारत कोरोना से निपटने के लिए खुद को तैयार कर सके। क्योंकि वैक्सीनेशन ही कोरोना को मात दे सकता है। आने वाली तीसरी लहर के पहले ज्यादा से ज्यादा वैक्सिनेशन होना जरूरी है ताकि लोगों की जान खतरे में ना पड़े। हालांकि वैक्सीन लगने के बाद भी कोरोना हो सकता है इसलिए सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। वैक्सीन लगने के बाद लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले की तुलना में बढ़ जाती है जो उन्हें कोरोना से लड़ने में मदद करती है इसलिए वैक्सीन लगाना बहुत जरूरी है। तो वही लोग अगर जागरूक हो रहे हैं तो शासन प्रशासन को वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक रखना भी उतना ही जरूरी है। वरना ऐसी नौबत हर शिविर में सामने आ सकती है और हंगामे की स्थिति पैदा हो सकती है। जिससे शासन प्रशासन की ही छवि खराब होती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक पर्याप्त वैक्सीन के स्टाक की व्यवस्था नहीं होती मुनादी भी ना कराया जाए, उन्हें ना बुलाया जाए। अगर स्टॉक पर्याप्त है तो ग्रामीण आएंगे और टीका लगाकर जरूर जाएंगे।

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