बालोद जिले के दिनेश कुमार यादव शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के उपाध्यक्ष जिनकी सफलता की कहानी लिखी है राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक विवेक धुर्वे ने

बालोद-शासकीय प्राथमिक शाला चैनगंज,विकासखंड-गुंडरदेही,जिला-बालोद के शाला प्रबंधन एवं विकास के उपाध्यक्ष दिनेश कुमार यादव ने कोरोना काल में शिक्षा से जुड़े कार्यो को प्राथमिकता दी | शाला प्रबंधन एवं विकास समिति एक विशिष्ट प्रक्रिया है, जिसका कार्य विद्यालय के मानवीयएवं भौतिक संसाधनों को ऐसी गतिशील संगठन इकाइयों में परिवर्तित करना है | जिसके द्वारा उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इस प्रकार से कार्य किया जा सके कि शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के लिए उन्हें संतुष्टि प्राप्त हो सके और जो कार्य कर रहे हैं, उनमें उच्च नैतिक स्तर बनाए रखते हुए उत्तरदायित्व निभाने की भावना भी बनी रहे | अपने इन्ही विशेष कार्यो की वजह से शासकीय प्राथमिक शाला चैनगंज,विकासखंड-गुंडरदेही के शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के उपाध्यक्ष दिनेश यादव हमारे नायक के रूप में चयनित हुए हैं। विवेक धुर्वे राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक ने उनकी इस सफलता की कहानी लिखी है। दिनेश विद्यालय व बच्चों के लिए हमेशा से तत्पर रहे व अपने कार्यो से एक अलग पहचान बनाई गई | शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सभी सदस्यों के सहयोग से विद्यालय के सभी कार्यो में अग्रसर रहने वाले जो अपने कामो से आज पहचाने जाते है |
उनके द्वारा किये गए कार्य:-
मोहल्ला कक्षा में सहयोग- इसमे इनका पूरा सहयोग रहा है, शिक्षको को भवन उपलब्ध करवाने से लेकर शिक्षा सारथी की भी नियुक्ति इनके द्वारा की गई और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में सहभागिता बनाए रखे है | और समय समय पर मोहल्ला कक्षा का निरीक्षण भी इनके द्वारा किया जाता रहा है | बच्चों को कोरोना के प्रति जागरूक भी इनके द्वारा किया जाता है,पालको को मोहल्ले में बच्चों को भेजने के लिए प्रेरित किया जाता है |
मास्क का वितरण- इनके द्वारा सभी बच्चों को समय समय पर मास्क का वितरण भी किया जाता रहा है, जिससे कोरोना महामारी से बचा जा सके मास्क के फायदे भी व इनको घर मे कैसे बनाए ये सारी जानकारी भी इनके द्वारा दी जाती है |
वृक्षारोपण का कार्य- पर्यावरण को बचाने के लिए गांव के लोगो को जागरूक करना व अपने गाँव विद्यालय परिसर में शिक्षकों के सहयोग से वृक्षारोपण का कार्य भी इनके द्वारा किया गया है | व सभी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते रहते है |
विद्यालय के कार्यो में आर्थिक मदद-
विद्यालय के कार्यो में निरंतर सहयोग करते रहते है, विद्यालय में जनभागीदारी के सहयोग से साफ सफाई के लिए भी सहयोग किया जाता रहा है | बच्चों को पुरस्कृत भी किया जाता है |
प्रिंटरिच वातावरण में सहयोग – गाँव की दीवारों को प्रिंटरिच वातावरण इनके सहयोग से बनाया गया है,और शिक्षकों का भी सहयोग इनके द्वारा किया जाता रहा है |
अँगना म शिक्षा- अँगना म शिक्षा के लिए माताओ को जागरुक करना, घर में ही बच्चों की पढ़ाई कैसे की जाए उसके लिए उनको तैयार भी किया गया | माताओ के उन्मुखीकरण में भी इनकी भागीदारी रही है |
किचन गार्डन में सहयोग– बच्चों को पौष्टिक आहार मिले इसके लिए इनके द्वारा किचन गार्डन में पूर्ण सहयोग किया जाता रहा है |
मध्याह्न भोजन सामग्री वितरण में सहयोग :-इनके द्वारा विद्यालय में मध्याह्न भोजन सामग्री वितरण में सहयोग का कार्य भी किया जाता है |
पुस्तक एवं गणवेश वितरण में सहयोग :- प्रतिवर्ष इनके द्वारा शिक्षको के साथ पुस्तक एवं गणवेश वितरण में सहयोग किया जाता है | इनका यही मानना होता है, की समय और तारीख के बदलते ही जिंदगी भी बदलती है | लेकिन वास्तव में जिंदगी का बदलाव किसी निश्चित तारीख या समय पर निर्भर नही करता | बल्कि यह तो सतत चलने वाली हर किसी के जीवन में होने वाली प्रक्रिया है | जिंदगी हमेशा चलती रहती है | जीवन में यदि कोई चीज स्थिर है,तो वह बदलाव है | जिंदगी का हर एक पल बदलता रहता है | और कुछ कार्यो को समय रहते हुए बच्चों के लिए करना जरूरी रहता है | आज समय अनुकूल नही है उसी को देखते हुए सभी को एक कदम शिक्षा की और बढ़ाना चाहिए |
