DAILY BALOD NEWS

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गेड़ी नृत्य को जिसने दिलाई छत्तीसगढ़ ही नही दूसरे राज्यों और विदेशों में पहचान, उस सुभाष बेलचंदन ने कोरोना से गंवाई जान, पढ़िए उनकी जिंदगी के जंग की कहानी

दुर्ग/बालोद। जिले ने बुधवार को एक अनूठा कलाकार खो दिया जिन्होंने गेड़ी नृत्य को एक अलग ही पहचान दी। बात हो रही है चिलमगोटा डौंडीलोहारा ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक सुभाष बेलचंदन की। जो हाल ही में नेवई दुर्ग में रहते थे। कोरोना की वजह से उनका रामकृष्ण अस्पताल रायपुर में निधन हो गया। लगभग 24 दिन तक वे इससे जंग लड़ते रहे पर उनकी जान ना बच पाई। उनका अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया। इस निधन पर कला जगत से जुड़े हुए लोगों के अलावा शिक्षकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। गेड़ी नृत्य को एक अलग ही रूप में पेश करते हुए उन्होंने वनांचल ग्राम चिलमगोटा में गेड़ी नृत्य दल का गठन किया था। शुरुआत स्कूली बच्चों से किए फिर इसमे बड़े भी जुड़ते गए। जो कि बालोद जिला ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्य और विदेशों तक में एक अलग पहचान बना चुकी थी।

वर्षों से गेड़ी नृत्य को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहे थे और उनका यह प्रयास काफी रंग भी चुका था और इसके लिए वे कई मंच पर सम्मानित भी हो चुके थे। लोग उनके गेड़ी नृत्य दल को विशेष अवसरों पर प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया करते थे। छत्तीसगढ़ की लोक धरोहर संस्कृति को बचाने के लिए उन्होंने हमेशा प्रयास किया। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कृति के संरक्षण को लेकर वे बीज बोते रहे और समय-समय पर छत्तीसगढ़ के त्योहारों पर उनका कार्यक्रम गेड़ी व अन्य माध्यम गीत संगीत के जरिए सामने आता रहा। कोरोना काल में उनका आल्हा गीत भी काफी प्रसिद्ध रहा। जो लॉकडाउन के दौरान अपने साथियों के साथ तैयार किए थे।

ससुर को देखने गए थे अस्पताल,खुद हुए शिकार

बताया जाता है कि उनके परिवार में अन्य लोग पहले से कोरोना के शिकार हुए थे। इस बीच उनके ससुर को भी स्पर्श अस्पताल भिलाई में भर्ती कराया गया था। वे उस दौरान डौंडीलोहारा में रह रहे थे। अपने ससुर की देखरेख के लिए वे अस्पताल गए ।क्योंकि बाकी लोग कोरोना की चपेट में पहले से थे। ससुर की देखभाल करने के दौरान भी खुद कोरोना के शिकार हो गए और वहीं खुद भी उन्हें भर्ती होना पड़ा पर उनके सेहत में सुधार नहीं आया फेफड़ों में संक्रमण बढ़ता रहा। जिसके बाद उन्हें 4 दिन पहले रामकृष्ण अस्पताल में शिफ्ट किया गया और अंततः उन्होंने बुधवार को अंतिम सांसे ली और वे कोरोना से जंग हार गए।

शिक्षक व कलाकार सुभाष बेलचंदन का निधन शिक्षा व कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति: देवेन्द्र हरमुख

.वनांचल गेड़ी नृत्य सांस्कृतिक संस्था के संस्थापक, निदेशक एवं शासकीय प्राथमिक शाला चिलमगोटा (रेंगाडबरी, डौंडीलोहारा) के सहायक शिक्षक सुभाष सिंह बेलचंदन का कोरोना से आकस्मिक निधन हो गया। शिक्षक व कलाकार सुभाष बेलचंदन के संबंध में देवेन्द्र हरमुख ने जानकारी देते हुए बताया कि सुभाष बेलचंदन ने अनेक प्रदेशों में जाकर बच्चों की कला को प्रदर्शित किया। वे कला व शिक्षा के क्षेत्र में गांव गाँव के चहेते शिक्षक थे,वनांचल गेड़ी नृत्य जिन्होंने विलुप्त होती छत्तीसगढ़ी परम्परा को नए कलेवर में प्रस्तुत किया , वे सांस्कृतिक संस्था के संस्थापक, निदेशक थे , वे छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अगुवा सेनानी थे, आदर्श दशहरा उत्सव समिति नेवई के संगीतकार थे। बालोद जिले के शिक्षा के क्षेत्र में मिल के पत्थर शिक्षा ज्योति में भी उन्होंने आवाज और संगीत देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन पर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के देवेन्द्र हरमुख, श्रवण यादव, शुभाष गजेन्द्र, एलेन्द्र यादव,अश्वनी सिन्हा,प्रह्लाद कोसमार्य, संजय सेन, नारायण साहू, अनिल दिल्लीवार, छविलाल साहू, द्रोण सार्वा सहित ऐनुका सार्वा, कादम्बिनी यादव, सुरेश दिल्लीवार, खेमन्त साहू, किशन साहू ने गहरा शोक व्यक्त किया है। इसके अलावा विभिन्न शैक्षणिक संगठनों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी उनके आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है तथा उनके निधन को शिक्षा व कला के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताया।

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