बालोद/डौंडीलोहारा – सुभाष सिंह बेलचंदन, सहायक शिक्षक शासकीय प्राथमिक शाला चिलमगोटा, संकुल रेंगाडबरी,विकासखण्ड :– डौंडीलोहारा, जिला बालोद (छ ग) का चयन रविवार को पढ़ाई तुंहर दुआर पोर्टल में हमारे नायक के रूप में हुआ उनकी कहानी को ब्लॉग लेखक श्रवण कुमार यादव, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला कोसा, संकुल केन्द्र तमोरा, विकासखण्ड गुण्डरदेही ने लिखा है हमारे नायक में चयन का आधार शिक्षक बेलचंदन द्वारा टीएलएम में अपनाई जा रही नई गतिविधियाँ हैं।

सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में किसी भी अवधारणा ठीक से समझाने के लिए शिक्षक जिन-जिन सामग्रियों का प्रयोग करता है वह ‘शिक्षण सामग्री’ या ‘शिक्षण-अधिगम सहायक सामग्री’ कहलाता है | इसके अंतर्गत पाठ्यपुस्तक आदि परम्परागत सामग्रियाँ तो हैं ही, साथ ही एनिमेशन आदि नयी सामग्री को भी इसमें जोड़कर इन सामग्रियों के माध्यम से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया न केवल छात्रों में उत्साह जागृत करता है, बल्कि सीखे हुए ज्ञान को लंबे समय तक अपने स्मृति पटल में संजोए रखने में भी सहायक होता है | साथ ही साथ शिक्षक भी अपने अध्यापन के प्रति उत्साहित रहता है | परिणामस्वरूप कक्षा का वातावरण हमेशा सकारात्मक बना रहता है | नवाचारी शिक्षक सुभाष सिंह बेलचंदन ने सहायक शिक्षण सामग्री के नवीनतम स्वरूप को अपना कर बच्चों को बेहतरीन तरीके से शिक्षा दे रहे है|
मल्टीनेशनल कम्पनी की जॉब छोड़ कर शिक्षक बनने का सफर :-
वे स्नातक पूर्ण करने के बाद रिटेल मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर पूर्ण कर मल्टीनेशनल संस्थानों में जॉब कर रहे थे | उस समय उनको लगता था कि समाज के लिए वह कुछ नहीं कर पा रहा है | अंततः मल्टीनेशनल कम्पनी की जॉब छोड़ कर सन 2008 में सहायक शिक्षक हेतु चयनित हुए | उन्होंने बताया कि उनकी पहली पदस्थापना बालोद जिले अंतर्गत डौंडीलोहारा ब्लॉक के दूरस्थ वनांचल ग्राम चिलमगोटा में हुई | मल्टीनेशनल कम्पनी की सुविधापूर्ण जॉब से सीधे दूरस्थ वनांचल ग्राम में आना सहज नहीं था, लेकिन मन में शांति और शिक्षक होने का गौरव था |
CCRT प्रशिक्षण से बढ़ी रूचि, कलात्मक तरीके से करते है TLM की प्रस्तुति :–
वह एक कलाकार भी है | उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से तबला में विद की उपाधि प्राप्त किया है | उनका प्रयास रहता है कि किसी भी कार्य को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करें | उनको अपने बड़े भैया व शिक्षक जितेंद्र देशमुख से गतिविधि आधारित शिक्षण से हमेशा प्रेरणा मिलता रहा है | CCRT हैदराबाद से प्रशिक्षित होने के बाद TLM निर्माण में विशेष प्रेरणा मिली |
“WORD OF THE DAY” थीम पर बनाएं हैं शिक्षण सामग्री
उन्होंने WORD OF THE DAY” थीम पर शिक्षण सामग्री तैयार किया है जिसका उद्देश्य अंग्रेजी भाषा के प्रति बच्चों में रूचि बढ़ाना, शब्दकोश में वृद्धि करना, अंग्रेजी सीखने के वातावरण का निर्माण करना, बच्चों के पूर्व अनुभव का शैक्षिक लाभ लेना है इस TLM से बच्चों में अंग्रेजी भाषा के शब्द-भंडार में वृद्धि होगी | बच्चे आपस मे बातचीत के दौरान सीखे हुए शब्दों का प्रयोग करेंगे | बच्चे उत्सुकता से इंतजार करेंगे कि आज का नया शब्द क्या होगा | बच्चे रोज स्कूल आने हेतु प्रेरित होंगे | पाठ्यपुस्तक को बच्चे पहले की अपेक्षा आसानी से समझेंगे | अधिकांश बच्चों को सिखाये गए अंग्रेजी के शब्द स्थायी रूप से याद होगा क्योकि उन्हें अपनी ज्ञानेंद्रियों को उपयोग करने का स्वतंत्र अवसर प्राप्त है | सभी शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि सम्बंधित नवाचार सतत रूप से चलने वाली एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसका विशेष लाभ बच्चों को उच्च कक्षाओं में अवश्य मिलेगा | एक वर्ष में यदि बच्चा 220 शब्द सीखता है, तो प्राथमिक स्तर की पढ़ाई पूर्ण करने के पश्चात लगभग 1000 शब्द सिख जाता है | जो किसी भाषा को सीखने हेतु एक बहुत बड़ा आधार होगा | साथ ही अंग्रेजी भाषा अध्ययन के प्रति सहज रूप से एक अच्छा वातावरण निर्माण होगा |
बालोद जिला प्रशासन की अभिनव पहल “शिक्षा ज्योति : एक प्रयास” में सहभागिता :–
शिक्षक श्री सुभाष सिंह बेलचंदन ने बताया कि प्राथमिक पाठ्यक्रम को डिजिटल बनाने के लिए सन 2016 में तत्कालीन कलेक्टर श्री राजेश राणा के मार्गदर्शन में बालोद जिला प्रशासन की अभिनव पहल “शिक्षा ज्योति : एक प्रयास” नामक इस कार्यक्रम में संवाद लेखन व वाचन का कार्य हेतु उन्होंने सहभागिता दिया है | छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग की और से राज्य की समृद्धि स्थानीय संस्कृति और भाषाओं से राज्य के छात्र-शिक्षकों को परिचित कराने हेतु “धरोहर” कार्यक्रम में बालोद जिला से परीक्षण-संपादन टीम का सक्रिय सदस्य के रूप में सहभागिता दे रहे है | उनके द्वारा अभी तक गेड़ी नृत्य, शक्ति पुत्र-पुत्री, देवार गीत पर आलेख प्रस्तुत किया जा चुका है|

लोककला का शैक्षिक प्रयोग, पाठ्यक्रम को संगीतमय लोकगीतों के रूप में करते है प्रस्तुत :- संस्कृति शिक्षक के रूप में लोकप्रिय हो चुके श्री सुभाष सिंह बेलचंदन का मानना है कि लोककला हमारे समाज की सहज अभिव्यक्ति है | वह शाला में जब इसका शैक्षिक प्रयोग करते है, तो बच्चे बड़ी तन्मयता, सजगता व प्रसन्नता के साथ पढ़ाई का आनंद लेते हैं | उनके द्वारा पाठ्यक्रम की कविताओं को लोकगीत शैली जैसे आल्हा, देवार गीत, ढोला मारू, ददरिया में संगीतबद्ध कर बच्चों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जिससे बच्चों के सीखने का स्तर बहुत अधिक बढ़ गया है |
वनांचल गेड़ी नृत्य संस्था की स्थापना, अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में दे चुके है प्रस्तुति :-
उन्होंने बताया कि हरेली के दिन शाला के बच्चों को कीचड़ में गेड़ी पर चढ़कर नृत्य करते देखा | इस घटना ने उन्हें प्रेरित किया कि इनकी प्रतिभा को आगे ले जाए | छत्तीसगढ़ अंचल के सांस्कृतिक वातावरण में रचे-बसे गेड़ी नृत्य के संवर्धन व विकास हेतु 2010 में “वनांचल गेड़ी नृत्य संस्था” की स्थापना स्थानीय कलाकारों की सहायता से किया | उनके निर्देशन में स्कूली बच्चों को मंचीय प्रशिक्षण देकर विकासखंड व जिला स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में नयनाभिराम प्रस्तुति दी, जो आज पर्यंत जारी है | इस संस्था की प्रमुख प्रस्तुतियां – जबर हरेली भिलाई, धमतरी, जबर छेरछेरा रायगढ़, हरेली जगार मुख्यमंत्री निवास रायपुर, इंदिरा गांधी मानव संग्रहालय भोपाल, अंतरराष्ट्रीय ब्रह्मपुत्र रिवर आर्ट फेस्टिवल गुवाहाटी, छत्तीसगढ़ साहित्य महोत्सव रायपुर इत्यादि प्रमुख है |
CCRT प्रशिक्षण प्राप्त कर कठपुतली कला का कर रहे है शैक्षिक प्रयोग :– वह सीसीआरटी हैदराबाद से 2010 में “शिक्षा में कठपुतली कला” से प्रशिक्षित होने के उपरांत पाठ्यक्रम संबंधी अनेक कठपुतलियों का निर्माण कर शैक्षिक उपयोग कर रहे है | बच्चों को कठपुतली निर्माण, कबाड़ से जुगाड़ सामग्री, कागज के खिलौने निर्माण की प्रशिक्षण भी देते है |
ग्रीष्मकालीन संगीत कला कार्यशाला का आयोजन : बच्चों में लोक कला के प्रति लगाव को देखते हुए प्रतिवर्ष समर क्लॉस अंतर्गत ग्रीष्मकालीन संगीत कला कार्यशाला का आयोजन शाला में किया जाता है, जिसमें बच्चे लोककला, गायन, वादन, गेड़ी नृत्य और ओरिगेमी मुखौटा निर्माण, पपेट निर्माण, कबाड़ से जुगाड़ इत्यादि विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, जिससे न सिर्फ शाला के बच्चे बल्कि आसपास के गांव के बच्चे भी शामिल होते हैं |
प्रति शनिवार गायन, वादन, योग शिक्षा की विशेष प्रशिक्षण :- शाला में प्रत्येक शनिवार संगीत, योग, बागवानी व नैतिक शिक्षा का संचालन किया जाता है, जिसमें बच्चे गायन, वादन व योग में पारंगत हो रहे हैं | फलतः 2010 से अब तक जिला स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में शाला के बच्चों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा है |
सुपोषण वाटिका का सफल संचालन :- उनके शाला प्रांगण में पोषण वाटिका में सब्जियों का उत्पादन सफलतापूर्वक होत है | इस वर्ष शाला बंद होने के बाद भी पोषण वाटिका का संचालन किया जा रहा है, जिसके लिए व्यक्तिगत रूप से स्वयं की देखभाल में कर रहे है | वर्तमान समय पोषण वाटिका से टमाटर, लौकी, केला, भिंडी व मौसमी भाजियों का उत्पादन किया जा रहा है | शाला को अभी पुनः क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाया जाना है, जहां क्वारंटाइन सेंटर में रहने वाले लोगों के लिए यह सब्जियां उपयोग में आएगी |
ये हैं उनके अब तक सफर के सम्मान,उपलब्धियां :- सभी क्षेत्रों में उत्साहपूर्वक सहभागिता देने वाले नवाचारी संस्कृति शिक्षक श्री सुभाष सिंह बेलचंदन को कई सम्मान प्राप्त हो चुका है, जिनमें माता कौशल्या सम्मान 2015, लोकेंद्र यादव समाज सेवा सम्मान 2016, धरतीपुत्र सम्मान 2013, दाऊ ढाल सिंह दिल्लीवार सम्मान 2017, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान 2019, राष्ट्र गौरव सम्मान 2019 व अन्य मीडिया सम्मान शामिल हैं
शिक्षकों के लिये सन्देश :– शिक्षक श्री सुभाष सिंह बेलचंदन का मानना है कि कोविड-19 की वजह से विगत एक वर्ष से शालाएँ बन्द है | पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने विषम परिस्थिति में भी शिक्षा की ज्योति जला रखा है | यह गर्व की बात है | वर्तमान में कोविड 19 का भयंकर स्वरूप देखने को मिल रहा है | इस विषम परिस्थिति में हम शिक्षकों का कर्तव्य और भी बढ़ जाता है कि हम स्वयं कोरोना से बचकर हमें दुसरो को बचाना है | सभी को पता है कि कोरोना से कैसे बचना है, लेकिन ठीक से क्रियान्वयन नही कर पा रहे है | इस आशय को यदि शिक्षक सिर्फ अपने पदस्थ गांव के लोगो को प्रेरित करें, तो एक बहुत सकारात्मक नतीजा प्राप्त किया जा सकता है | वे स्वयं प्रतिदिन 10 लोगो को प्रेरित कर रहे है |
