सरकार जरा इधर भी देखो,,,एडीबी प्रोजेक्ट की 69 करोड़ की सड़क परियोजना में धांधली, हो रहा घटिया निर्माण, पुराने पाइप का इस्तेमाल,मामला पिनकापार से डोंगरगांव मार्ग का



शिव सेना ने भी लगाया आरोप अधिकारियों के संरक्षण में हो रहा भ्रष्टाचार

बालोद। लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ राज्य सड़क क्षेत्र परियोजना एडीबी प्रोजेक्ट के तहत बालोद जिला और राजनांदगांव जिला को जोड़ने के लिए डोंगरगांव खुज्जी, पिनकापार जेवरतला मार्ग का उन्नयन व पुनर्निर्माण का कार्य लगभग 70 करोड़ यानी 69 करोड़ 72 लाख की लागत से किया जा रहा है। लेकिन इस काम में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है, ना हीं अधिकारी कोई ध्यान दे रहे हैं। जिसके चलते संबंधित ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य में धांधली बरती जा रही है और इसका जीता जागता उदाहरण सड़क पर पड़े घटिया निर्माण सामग्री ही बता रहे हैं। जो इसके सबूत बयान कर रहे हैं। ग्रामीणों सहित शिवसेना संगठन द्वारा इस घटिया निर्माण का विरोध भी किया जा रहा है। लेकिन कोई ध्यान देने वाला नहीं है। खास तौर से जहां पर पुल पुलिया बन रहा है वहां पर भी घटिया स्लैब पाइप का इस्तेमाल हो रहा है। जो अभी से काम पूरा हुए बगैर टूटने लगा है।


शिवसेना नेता के संदीप कसार ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते बताया कि लोक निर्माण विभाग की बहुप्रतीक्षित एडीबी प्रोजेक्ट की छत्तीसगढ़ राज्य सड़क परियोजना की लगभग 70 करोड़ की लागत से डोंगरगांव खुज्जी पिनकापार _जेवरतला मार्ग का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण का कार्य जारी है।उक्त कार्य का कार्य आदेश दिनांक 30 अगस्त 2019 है और पूर्णता दिनांक की अवधि 20 माह जो की पूर्णता समाप्त हो चुकी है। उक्त सड़क निर्माण परियोजना के निर्माण कार्य में आलम यह है कि ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से भारी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का खेल जारी है।

उक्त निर्माण कार्य में गुणवत्ता और घटिया से घटिया स्तर की सामग्रियों का इस्तेमाल से इनकार नहीं किया जा सकता। यहां तक कि पानी की क्यूरिंग इतनी कमजोर और लचर है कि कुछ कहा ही नहीं जा सकता। उक्त निर्माण में ठेकेदार अधिकारी ज्यादा से ज्यादा कमाना चाहते हैं। इतने बड़े प्रोजेक्ट को ऐसे हाथों में देखकर अफसोस होता है जिससे कि बंदरबांट के सिवाय और कुछ नजर नहीं आता है। उक्त निर्माण कार्य को क्या चारागाह समझ लिया गया है। भ्रष्टाचार करने के लिए 70 करोड़ की लागत की यह परियोजना, महिला बाल विकास मंत्री के जिले की है। क्या मंत्री ने उक्त निर्माण परियोजना का निरीक्षण भी किया है या फिर किसी प्रशासनिक अधिकारियों की निगाह भी गई है या फिर जानबूझकर देखना ही नहीं चाहते? निर्माण कार्य को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की भूमिका भी संदेहास्पद है ? क्या 70 करोड़ लागत की उक्त परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जायेगी? ठेकेदार अधिकारियों की मिलीभगत से और बंदरबांट से उक्त सड़क निर्माण कार्य में लगातार ठेकेदार द्वारा भ्रष्टाचार करते हुए गुणवत्ता हीन सामग्रियों का प्रयोग किया जा रहा है.। जिसे अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।

आपसी मिलीभगत से उक्त कार्य में साइडरेन भी दोयम दर्जे का मटेरियल उपयोग करते हुए बनाया गया है और पानी क्यूरिंग तो पूछो मत। वर्तमान में समय सीमा समाप्त होने के कारण भी ठेकेदार और अधिकारी भी आनन-फानन में जल्द जल्द काम निपटाने के फेर में लगे हैं। उक्त निर्माण कार्य स्थल पर एबीपीएल चलित प्रयोगशाला वाहन की गतिविधियां भी संदिग्ध है। क्या उस वाहन को निर्माण कार्य में खानापूर्ति के लिए रखा गया है या फिर मटेरियल के सही टेस्टिंग और मानिटरिंग के लिए। शिवसेना संदीप कसार ने उक्त निर्माण कार्यों का शिव सैनिकों सहित निरीक्षण किया और साथ ही साथ निर्माण निर्माण स्थल से ग्रामीणों से निर्माण कार्य को लेकर बातचीत की। जिससे ग्रामीण ठेकेदार के कार्यों से असंतुष्ट और नाराज प्रतीत हुए ।उक्त निर्माण कार्यों के निर्माण एजेंसी द्वारा निर्माण कार्यों के मापदंडों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। निर्माण कार्य में गुणवत्ताहिन सामग्री का प्रयोग , पुल पुलिया के आसपास डायवर्सन संबंधी रोकथाम बोर्ड संकेतक बोर्ड जिससे दुर्घटना ना हो, का भी अभाव है पानी क्यूरिंग के लिए जो टैंकर इस्तेमाल किया जा रहा है जो कि महाराष्ट्र पासिंग वाहन है। उसके दस्तावेज को लेकर भी संदेह है। साथ ही साथ फुलसुंदरी के नाले का पानी ठेकेदार द्वारा दोहन किया जा रहे हैं। जब ठेकेदार के पास पर्याप्त पानी क्यूरिंग की व्यवस्था ही नहीं है तो निर्माण कार्य में क्यूरिंग कहां से होगी। निर्माण कार्य में लगे सभी वाहनों से संबंधित दस्तावेजों की जांच भी की जानी चाहिए। क्योंकि बहुत सारे वाहन कंडम नजर आ रहे हैं। बडभूम पंचायत से मुरूम खनन का कार्य भी हो रहा है। इसी तरह पुल पुलिया के निर्माण में भी भारी भ्रष्टाचार होने की बात करते हुए शिवसेना नेता ने बताया कि पुराने टूटे-फूटे पाइपों को पुल पुलिया के निर्माण में सीमेंट का घोल चढ़ाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। जोकि ठेकेदार के रुपया कमाने की भूख और ओछी मानसिकता को प्रदर्शित करता है। साथ ही साथ जेवरतला की ओर से बन रहे डामर की सड़क अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। उक्त सड़क में सिर्फ और सिर्फ गिट्टी नजर आ रही है। ऐसा लगता है कि ठेकेदार द्वारा डामर के नाम पर जले ऑयल का इस्तेमाल किया जा रहा है। डामर तो कहीं नजर ही नहीं आ रहा है। एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रोजेक्ट में ऐसे ठेकेदार को काम देना जो की मिलीभगत से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दे, सरासर गलत है। उक्त निर्माण कार्य को अभी भी संज्ञान में नहीं लिया गया तो क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय होगा ।एडीबी के प्रोजेक्ट ऑफिसर वर्मा के संज्ञान में क्या यह सब बातें नहीं होगी? जब इतने बड़े प्रोजेक्ट को ठेकेदार को सौंपा गया है तो उसके निर्माण कार्य को संज्ञान लेना उनकी निगरानी करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं और उक्त भ्रष्टाचार के लिए स्थानीय मंत्री और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के साथ साथ जिला प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार होगा। अंत में शिवसेना नेता संदीप कसार ने ऐसे भ्रष्ट ठेकेदार पर अंकुश लगाने की आवश्यकता बताते हुए उक्त सड़क निर्माण का निरीक्षण एवं भ्रष्टाचार की जांच करते हुए निर्माण एजेंसी के कार्यों पर रोक लगाते हुए आर्थिक भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की मांग जिला प्रशासन एवं मुख्यमंत्री से की है। जिससे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो सके और क्षेत्र की जनता को राहत प्राप्त हो। वहीं इस मामले में जब हमने एडीबी प्रोजेक्ट के प्रबंधक आरके वर्मा से मोबाइल नम्बर 9425261456 पर बात करनी चाही तो उनसे संपर्क नही हो पाया। पर निर्माण स्थल की दुर्दशा भरी तस्वीरें अपनी सच्चाई प्रमाणित कर रही है।

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