आखिर क्यों इस जिले के एसपी ने किया आरक्षक उज्जवल दीवान का इस्तीफा ना मंजूर….क्या था कारण…पढिये खबर



इस्तीफा नामंजूर

दादू सिन्हा,धमतरी। बहुत पुरानी कहावत है मान न मान मैं तेरा मेहमान, लेकिन इस कलयुग में ये कहावत भी उलट गई लगती है, पुलिस आरक्षक नौकरी छोड़ना चाहता है लेकिन पुलिस विभाग उसे नही छोड़ रहा है, आरक्षक उज्ज्वल दीवान के इस्तीफा देने के बाद भी विभाग मानो जिद्द पर अड़ कर बोल रहा है अरे तू चाहे मान ना मान तू मेरा उज्ज्वल दीवान

आजादी के इतने सालों बाद आज के युग मे भी पुलिस विभाग 1861 के कानूनों को मान रहा है,और इसका उदाहरण ये है कि एक दिन की छुट्टी लेने के लिए जहाँ उचित कारण बताना पड़ता है वहीं दूसरी तरफ उचित कारण बता कर धमतरी पुलिस विभाग में पदस्थ आरक्षक उज्जवल दीवान ने बीते दिनों धमतरी एसपी बीपी राजभानु को इस्तीफा दिया था,तो एसपी ने अंग्रेजी एक्ट 1861 के हवाला दे कर ये कहते हुए आरक्षक का इस्तीफा नामंजूर कर दिया कि आपके द्वारा दिया गया इस्तीफ़े का कारण संतोषजनक नही है,वही इस मामले में आरक्षक से बात किया गया तो आरक्षक ने बताया कि अब जब बात अधिकारियों और सरकार पर आ रही है तो कारण संतोषजनक नही लग रहा है और कारण यदि पारिवारिक है,तो संतोषजनक है ये कैसा सिस्टम है जिसमे छोटे कर्मचारियों को सोचने और लिखने की भी आजादी नही है, अब इस्तीफा भी अधिकरियों के बताए हुए कारण के हिसाब से स्वीकृत किया जाएगा,

आपको बता दे कि धमतरी पुलिस लाइन में पदस्थ एक आरक्षक ने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया,ये कोई सामान्य इस्तीफा नही है बल्कि कई गंभीर आरोप पुलिस के आला अफसरों पर आरक्षक की तरफ से लगाए गए थे,आरक्षक क्रमांक 777 उज्ज्वल दीवान ने बताया था कि,सभी पुलिस कर्मियों को अपना एक दिन का वेतन स्वेक्षा से मुख्यमंत्री सहायता कोष में देने कहा गया था,लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया,तो इसी वजह से उसका तबादला नक्सल प्रभावित थाना मेचका में कर दिया गया,आम तौर पर आरक्षकों का तबादला समूह में होता है लेकिन उज्ज्वल के मामले में सिर्फ एक आरक्षक का तबादला हुआ था,जब आरक्षक ने अपना इस्तीफा सौंपने की कोशिश की तो अब इस्तीफा नही लिया गया था,इन तमाम आरोपो के साथ आरक्षक ने मीडिया से अपनी बाते रखी थी,फिलहाल अब आरक्षक उज्जवल दीवान आगे क्या कदम उठाते है ये देखने वाले बात होगी।

You cannot copy content of this page