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शिक्षकों को “प्रथम पंक्ति कोरोना वारियर्स” घोषित करने की मांग

सूरजपुर । छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा कोरोना महामारी के रोकथाम, कोरोना कंट्रोल रूम, कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग, एक्टिव सर्विलांस, चेक पोस्ट और टीकाकरण हेतु प्रोत्साहित करने एवं 45 से अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों को टीकाकरण कराने प्रेरित करने हेतु शिक्षकों की भी ड्यूटी लगाई जा रही है।

आपको बता दे कि शिक्षकों की ड्यूटी तो इस कार्य में लगी दी गई है, लेकिन उन्हें किसी प्रकार की सुविधा प्रदान नहीं की जा रही है। यही नहीं जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, उनका टीकाकरण तक नहीं किया गया है, जिससे उनके संक्रमित होने की प्रबल संभावना है।

हाल ही में जिले के शिक्षकों की ड्यूटी टीकाकरण हेतु ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने और उन्हें टीकाकरण स्थल तक पहुँचाने की जिम्मेदारी देने के संबंध में आदेश जारी किये गए हैं, इसके आदेश के परिपालन में शिक्षकों को संबंधित ग्राम के एक – एक घर में जाकर 45 और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों से सम्पर्क करना पड़ रहा है, जबकि वर्तमान समय में कोरोना के लक्षणरहित मामले सामने आ रहे हैं, जिससे किसी के लिए यह तय कर पाना संभव नहीं है कि कौन व्यक्ति संक्रमित हैं और कौन नहीं ।

शिक्षकों को ऐसे जोखिम भरे कार्य करने के लिए न तो उन्हें किसी प्रकार की प्रशिक्षण दिया गया, न उनका टीकाकरण किया गया, न ही उन्हें पी.पी.टी. कीट और थर्मल स्केनर जैसी अति आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गई है।

इस पर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ सूरजपुर के जिलाध्यक्ष यादवेन्द्र दुबे ने कहा कि शासन – प्रशासन का ऐसा कृत्य संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन रक्षा का अधिकार और मानवाधिकार का घोर उल्लंघन है।

श्री दुबे ने शिक्षक समुदाय के हित में वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईमेल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल श्रीमती अनुसुइया उइके और मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से मांग की है कि कोरोना से सम्बंधित ड्यूटी के दौरान प्रदेश के दर्जनों शिक्षक कोरोना महामारी के चपेट में आकर मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं और निरंतर ऐसी दुखद घटना हो रही है, पर शासन – प्रशासन के दोहरे मापदंड के कारण आज तक शिक्षकों को “वैधानिक कोरोना वारियर्स” का दर्जा नहीं मिला है,जिसके कारण उन्हें मिलने वाले बीमा सुरक्षा कव्हर, सम्मान इत्यादि सुविधाओं से पूर्णतः वंचित होना पड़ रहा है, जबकि यह उनका ड्यूटी करते हुए डॉक्टर्स, पुलिस, सफाईकर्मी जैसे स्वाभाविक अधिकार बनता है।

इस संबंध में पूर्व में शिक्षक संघ के प्रदेश पदाधिकारियों द्वारा शिक्षा सचिव डॉ.आलोक शुक्ला के समक्ष अपनी बात रखी गई तो, शिक्षा सचिव ने स्पष्ट तौर पर कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की ड्यूटी लगाने सम्बंधित कोई भी निर्देश – आदेश नहीं दिया गया है। यदि इसके बाद भी शिक्षकों की ड्यूटी लगायी जा रही है तो इसके जिम्मेदार सम्बंधित विभाग व प्रशासन होगा, इसलिए जो ड्यूटी लगा रहे हैं, उनसे ही ये सब मांग करें।

श्री दुबे ने आगे कहा कि सेवा – भाव के कारण शिक्षक इस विषम परिस्थिति में सभी प्रकार के सहयोग करने हेतु पूरी तरह से तैयार है, परन्तु स्थिति की गम्भीरता, संवेदनशीलता और भयावहता को देखते हुए महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि इस सेवा कार्य में लगे शिक्षकों को तत्काल “कोरोना वारियर्स” बतौर सम्मान, सुरक्षा, बीमा कव्हर एवं सुविधा प्रदाय के तत्काल आदेश जारी किया जावे तथैव कालकवलित हो चुके शिक्षक साथियों को भी मृत्युउपरांत “कोरोना वारियर्स” घोषित करें।

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