आबादी भूमि को छोड़कर निजी जमीन पर किए हैं प्रधानमंत्री आवास का निर्माण, नियम से होना चाहिए पट्टा निरस्त



बालोद। ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकान को पात्र हितग्राहियों द्वारा अपने आबादी भूमि को छोड़कर निजी जमीन पर ही बनाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में पंचायत द्वारा आवंटित उन आबादी भूमि को का पट्टा निरस्त किया जाना चाहिए ताकि उस पट्टे को निरस्त कर उस जमीन को जरूरतमंद को दिया जा सके। ऐसा ही एक मामला ग्राम खुर्सीपार में सामने आया है।मनौद पंचायत के आश्रित ग्राम खुर्सीपार में पूर्व से कई परिवारों को ढाई ढाई डिसमिल आबादी भूमि का पट्टा दिया गया है। उक्त परिवार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत होने पर आवास का निर्माण कार्य उस ढाई डिसमिल आबादी भूमि जो आवंटित की गई है उसमें नहीं कर रहे हैं, ना किए हैं। नियमानुसार वह आबादी पट्टा निरस्त होना चाहिए। लेकिन अभी तक उक्त व्यक्तियों का पट्टा निरस्त नहीं किया गया है। इस और ना तो और राजस्व विभाग (पटवारी) का ध्यान है और ना ही पंचायत विभाग (सचिव) का ध्यान है। अब इसके कारण गांव में स्थिति यह बन रही है कि जो लोग अब अपने निजी संपत्ति से मकान का निर्माण कर रहे हैं वह भी आवंटित भूमि को छोड़कर अपनी पुरानी आबादी भूमि में मकान बना रहे हैं। यदि पट्टों को निरस्त करने की कार्यवाही नहीं की जाती है तो भविष्य में विवाद की स्थिति निर्मित हो सकती है। क्योंकि उपरोक्त पट्टों को निरस्तीकरण कर अन्य जरूरतमंद परिवार को देने की आवश्यकता है क्योंकि अब विधि के अनुसार यह स्पष्ट तौर से अतिक्रमण की श्रेणी में आ गया है। जानकारों के मुताबिक अब इसके लिए ना तो पंचायत प्रस्ताव के जरूरत है ना ही किसी की शिकवा शिकायत की। जरूरत सिर्फ विभागों (पंचायत और राजस्व) की पट्टा निरस्तीकरण उपरांत सूचना की है। कुछ जागरूक ग्रामीणों ने इस संबंध में मीडिया के जरिए यह बात सामने लाई है। ताकि पंचायत प्रशासन योजनाओं के सही क्रियान्वयन कर सके और गांव का व्यवस्थित विकास हो।

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