07से 16 सितंबर 2024 समारोह विशेष,,


राजा चक्रधर सिंह पोर्ते समारोह छत्तीसगढ़ अपने प्राकृतिक धरोहर के साथ-साथ सांस्कृतिक, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कला ,साहित्य ,नृत्य संगीत, जीवन का अभिन्न अंग है,…

पोरा तिहार,लेख- नागेश कुमार वर्मा,टिकरापारा रायपुर


हमर संस्कारधानी छत्तीसगढ़ जेकर भुइयाँ ह किसम-किसम के तीज-तिहार ले हरियर हावय।इहाँ के जम्मो तिहार के अपन बिसेस महत्ता हावय। इही तीज-तिहार म एक सुग्घर तिहार हे 'पोरा तिहार'।ए परब…

हां मैंने सूरज को डुबते देखा हैं तलाब मे खिले उन कमलों को सिकुड़ते देखा है ,


हां मैंने सूरज को डुबते देखा हैंतलाब मे खिले उन कमलों को सिकुड़ते देखा है ,चड़िया को अपने घोंसला कि ओर मुड़ते देखा हैहां मैंने सूरज को डुबते देखा है…

लेख: शान्ति व सदभावना हमेशा कायम रहे स्वतंत्र भारत में : बिजेंद्र सिन्हा दुर्ग


हमारा देश स्वतंत्रता के 78 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह बेहतर भारत की संकल्पना को सामने लाने का उपयुक्त अवसर है। एक ऐसा भारत जहाँ समाजिक समानता…

लघु कथा: भैय्या जताते नहीं पर हर मुसीबत में ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं!


लघुकथा - कुछ रिश्ते खून से भी बढ़कर होते हैं यह बात मैं आशु भैया से मिलकर जाना ! मेरे परिवार में मां पापा और हम तीन बहने हैं मुझे…

अइसन तीज-तिहार रचना: प्रेम कुमार रावत बलोदा बाजार (भाटापारा )


नांगर ढीला गे बइला धोवा गेघर डाहर रेंगे किसान जी सुमरन करे माटी महतारी केधरथे देवी देवता के ध्यान जी गहुँ पिसान के चीला बनाकेबंदन चंदन ला सजा के जी…

पुरखा पुरातन “परब” : प्रकृति के जोहार -हरेली तिहार “


हरेली सावन महिना के अम्मउस तिथि म मनाए के चर्चित लोक परब आय। जेला देश के आन -आन भाग मा अलगे -अलग नाव ले जाने जाथे जइसे - मध्यप्रदेश म…

देख अइसन हरेली मनाएंव- हमर पहली तिहार


हमर छत्तीसगढ़ ह तिहार ले भरे पुरे राज्य हरय। ननपन ले ही तिहार के उछाह तो तिहार के आए के आघू ले होवत रहिथे अउ उछाह काबर नइ रही भई…

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