
121 बाल कविताओं से सजी पुस्तक बनी आकर्षण का केंद्र, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भी हुआ नामांकन
रायपुर/बालोद। हमर चिन्हारी साहित्य समिति एवं साहित्य लेखन रिसोर्स शिक्षक परिवार छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में रायपुर के वृंदावन हॉल, सिविल लाइन में साझा बाल काव्य संग्रह ‘मोर अंगना के शोर’ का भव्य विमोचन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, संस्कृति एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बालोद जिले के डौण्डी विकासखंड की शिक्षिका मोना रावत को साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन, जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप थे। विशिष्ट अतिथियों में धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य भाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र, सीए अमित चिमनानी, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. गीता देवी तथा भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ की प्रदेश कोषाध्यक्ष के. शारदा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समारोह का मुख्य आकर्षण साझा बाल काव्य संग्रह ‘मोर अंगना के शोर’ का विधिवत विमोचन रहा। हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा की 121 थीम आधारित बाल कविताओं से सुसज्जित इस पुस्तक का निर्माण नई शिक्षा नीति 2020 और समावेशी शिक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पुस्तक में प्रत्येक कविता के साथ क्यूआर कोड भी जोड़ा गया है, जिससे बच्चे, शिक्षक, पालक एवं विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग विद्यार्थी भी डिजिटल माध्यम से कविताओं को सुन और समझ सकेंगे।
आयोजकों ने बताया कि ‘मोर अंगना के शोर’ का गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भी नामांकन किया गया है। मुख्य अतिथि केदार कश्यप ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और बाल साहित्य नई पीढ़ी के संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने पुस्तक में डिजिटल तकनीक एवं समावेशी शिक्षा के समन्वय को शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से जुड़े सहभागी शिक्षकों एवं रचनाकारों को मंत्री एवं अतिथियों के हाथों प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।












