पॉक्सो न्यायालय बालोद का फैसला, ₹2 हजार अर्थदंड के साथ पीड़िता को ₹5 लाख क्षतिपूर्ति देने की अनुशंसा
बालोद, 17 अगस्त 2026। नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफ.टी.एस.सी. (पॉक्सो) बालोद श्री कृष्ण कुमार सूर्यवंशी ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर ₹2,000 का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही पीड़िता को हुई शारीरिक एवं मानसिक क्षति के लिए ₹5 लाख की क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की अनुशंसा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के सचिव को भेजी गई है।
न्यायालय ने आरोपी हेमकुमार साहू उर्फ राजू साहू, उम्र 35 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 13 अरमरीकला, थाना सनौद, जिला बालोद को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 6 के तहत दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई।
विशेष लोक अभियोजक ने रखा अभियोजन पक्ष
प्रकरण की पैरवी विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) बसंत कुमार देशमुख ने की। अभियोजन के अनुसार 3 अक्टूबर 2025 को नाबालिग पीड़िता अपनी माता के साथ अपने मायके गई थी। अगले दिन आरोपी ने पीड़िता को एक अन्य लड़के द्वारा गलत काम किए जाने की बात के संबंध में बुलाया और पीड़िता के परेशान होने की बात कहते हुए उसे अपने पास छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद उसकी माता पीड़िता को आरोपी के पास छोड़कर दुर्ग चली गई।
अभियोजन के अनुसार 5 अक्टूबर 2025 को आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद 10 अक्टूबर 2025 को आरोपी अपनी पत्नी के साथ पीड़िता को दुर्ग स्थित उसके घर छोड़ गया।
दोबारा घटना को दिया अंजाम
अभियोजन के अनुसार 25 अक्टूबर 2025 को पीड़िता के दोबारा अपने नाना के गांव जाने के बाद आरोपी ने 26 अक्टूबर 2025 को फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।
मामले की जानकारी पीड़िता ने 19 नवंबर 2025 को बाल कल्याण समिति, बालोद के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद दी। इसके बाद पीड़िता की माता ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, न्यायालय में पेश हुआ अभियोग पत्र
पीड़िता की माता की रिपोर्ट के आधार पर सहायक उप निरीक्षक लता तिवारी ने थाना सनौद में आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 117/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(एम), 65(1), 351(3) एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की।
सम्पूर्ण विवेचना के बाद पुलिस ने 19 जनवरी 2026 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक दुलार सिंह यादव द्वारा की गई।
पीड़िता को ₹5 लाख क्षतिपूर्ति की अनुशंसा
न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357(क) एवं संशोधित भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 396 के तहत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना 2018 के अनुसार पीड़िता को शारीरिक एवं मानसिक क्षति के लिए ₹5,00,000 की क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की अनुशंसा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद को प्रेषित की है।









