भगवान बजरंगबली, नागदेवता और अखाड़े के अस्त्र-शस्त्रों की हुई विधिवत पूजा; पहलवानों ने किया मल्ल युद्ध और युद्धाभ्यास
बालोद। जिला मुख्यालय स्थित जय बजरंग अखाड़ा व्यायामशाला बालोद में नागपंचमी पर्व पर वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। अखाड़े में आठ दशकों से अधिक समय से नागपंचमी के अवसर पर भगवान बजरंगबली, नागदेवता तथा अखाड़े के अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है, जिसे संस्था के उस्तादों और पहलवानों द्वारा आज भी पूरी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।
मल्ल युद्ध और युद्धाभ्यास ने बढ़ाया उत्साह
अखाड़ा के अध्यक्ष रामेश्वर ढीमर ने बताया कि नागपंचमी के दिन अखाड़े में पहलवानों द्वारा पारंपरिक रूप से मल्ल युद्ध एवं युद्धाभ्यास किया जाता है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अखाड़े की पुरातन परंपरा, अनुशासन और शारीरिक साधना से जोड़ने का माध्यम भी है।
उन्होंने बताया कि अखाड़े में वर्षों से पहलवानों को विभिन्न खेल विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है बजरंग अखाड़ा

संस्था के सचिव विजय पारख ने कहा कि बालोद का बजरंग अखाड़ा छत्तीसगढ़ में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यहां के पहलवान कुश्ती, मलखंभ एवं अखाड़ा प्रदर्शन के साथ-साथ कबड्डी और बॉक्सिंग जैसी खेल विधाओं में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।
अखाड़े से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कई युवाओं ने आगे बढ़कर भारतीय सेना, पुलिस बल एवं विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में अपनी सेवाएं देकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
परंपरा और खेल संस्कृति का संगम

नागपंचमी के अवसर पर आयोजित पूजा-अर्चना में पंडित चोवामहाराज जी सहित संस्था के पदाधिकारी नेमीचंद नाग, आनंद ढीमर, रामेश्वर ढीमर, विजय पारख, द्वारिका सिन्हा, अंगद साहू, रवि पटेल, तनवीर आलम, जागेश साहू, बलवंत पुरी गोस्वामी, शुभम ढीमर, तोषुभ नाग, घनश्याम, डेविड, विनायक, दुष्यंत, सुशील सिन्हा, सुशील, विनीत, मोनिश, उदय साहू, तोमन निषाद एवं टीकम ढीमर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में अखाड़े की परंपरा, पूजा और खेल साधना का सुंदर संगम देखने को मिला।











