जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में स्व-सहायता समूह की महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने की पहल
बालोद, 17 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मूल प्रावधानों एवं ग्रामीण महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तीकरण के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में बालोद जिले में महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला पंचायत बालोद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी के कुशल मार्गदर्शन एवं सतत प्रेरणा से जिले में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी दीदियों को स्थायी आजीविका से जोड़ने का कार्य तेज गति से संचालित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण निर्धन परिवारों को संगठित कर स्व-सहायता समूहों से जोड़ना, संस्थागत ढांचे को मजबूत करना तथा बहुआयामी आजीविका गतिविधियों के माध्यम से उनकी वार्षिक आय में वृद्धि कर उन्हें गरीबी से बाहर निकालना है। इसी उद्देश्य के अनुरूप जिले में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है।
इसी क्रम में बालोद विकासखंड अंतर्गत वृंदावन संकुल स्तरीय संगठन जमरूवा (सिवनी) को इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है। इस क्लस्टर में मुख्य रूप से हर्राठेमा, देवारभाट एवं मुल्लेगुड़ा तीन क्लस्टर शामिल हैं, जिनके अंतर्गत लगभग 1000 ग्रामीण परिवारों को आजीविका संवर्धन के लिए आच्छादित किया जा रहा है। आईएफसी का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण महिला परिवार को कम से कम 2 से 3 पूरक आजीविका गतिविधियों जैसे कृषि, पशुपालन, कड़कनाथ, बैकयार्ड कुक्कुट पालन एवं उद्यानिकी आदि से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय एवं स्थायी वृद्धि करना है।
26 सदस्यों को 875 उन्नत किस्म के चूजों का वितरण
सहायक परियोजना अधिकारी श्री नितेश साहू ने बताया कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के तहत बिहान से जुड़ी दीदियों की सतत एवं संवहनीय आजीविका संवर्धन के लिए 17 अगस्त को 21 स्व-सहायता समूहों की 26 सदस्यों को 30 दिवसीय उन्नत किस्म के कुल 875 चूजे आईएफसी के प्रावधानों के अनुरूप प्रदान किए गए। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को बैकयार्ड पोल्ट्री के माध्यम से अतिरिक्त एवं नियमित आय का साधन उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के दौरान दीदियों को केवल चूजा वितरण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इस आजीविका गतिविधि से अधिकतम लाभ अर्जित करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। बिहान कैडर एवं विशेषज्ञों द्वारा दीदियों को चूजों के शुरुआती 30 से 40 दिनों की विशेष देखरेख एवं प्रबंधन, संतुलित दाना, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, समय पर टीकाकरण, रोग प्रतिरोधक उपचार तथा शेड प्रबंधन के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण एवं जानकारी दी गई।
लखपति दीदी की संकल्पना को मिलेगा बढ़ावा
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बिहान योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल समूह तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें स्वावलंबी उद्यमी बनाना है। उन्होंने कहा कि बैकयार्ड पोल्ट्री और आईएफसी मॉडल के माध्यम से ग्रामीण दीदियों की दैनिक एवं मासिक आय में नियमित बढ़ोतरी होगी। इससे महिलाएं ‘लखपति दीदी’ की संकल्पना को साकार करते हुए अपने परिवार के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी।
इस अवसर पर विकासखंड के बिहान स्टाफ, संकुल स्तरीय संगठन की पदाधिकारी दीदियां एवं स्व-सहायता समूहों की सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।







